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झारखंड सरकार ने जेएसएससी नियुक्ति और विवादित एजेंसी टीडीपीएल के जरिए ली गई 10 परीक्षाएं रद्द कर दी है। इस गड़बड़ी की कीमत सिर्फ सरकारी सिस्टम को ही नहीं, बल्कि नौकरी की उम्मीद में सालों से तैयारी कर रहे लाखों युवाओं पर भी पड़ा है। इन परीक्षाओं में करीब 10 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए हैं। आवेदन फीस से लेकर परीक्षा केंद्र तक आने-जाने और रहने पर ही इन अभ्यर्थियों के करीब 300 करोड़ रुपए पानी में डूब गए। यहीं नहीं, पैसे खर्च होने के साथ इनकी महीनों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई। अब एक बार फिर दोबारा परीक्षा की अनिश्चितता खड़ी हो गई है। एक अनुमान के अनुसार अगर 10 लाख परीक्षार्थियों का औसत आवेदन शुल्क 500 रुपए माना जाए तो केवल आवेदन करने में ही इनकी 50 करोड़ रुपए खर्च हो गए। फिर फीस से ज्यादा भारी परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और रहने में पड़ा। अभ्यर्थियों ने कहा कि कई परीक्षार्थियों को 300-400 किमी तक की यात्रा कर परीक्षा केंद्र पर पहुंचना पड़ा। दूरी होने के कारण उन्हें एक दिन पहले ही केंद्र पर पहुंचना पड़ा। ऐसे में एक अभ्यर्थी को यात्रा, भोजन और ठहरने पर औसतन 2500 रुपए खर्च करना पड़ा। इस तरह 10 लाख अभ्यर्थियों का अनुमानित खर्च 250 करोड़ रुपए होता है। ऐसे में आवेदन शुल्क जोड़ने पर यह खर्च करीब 300 करोड़ रुपए आता है। जो परीक्षा रद्द होने के कारण पानी में डूब गए। अब अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा दर्द यह है अब उन्हें फिर से परीक्षा देनी होगी। इसके लिए उन्हें दोबारा इतना ही खर्च उठाना पड़ेगा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह काफी मुश्किल काम होगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि सिर्फ खर्च ही नहीं, सबसे बड़ा नुकसान उनकी तैयारी का हुआ। उन्होंने महीनों तक कड़ी मेहनत की। सब काम छोड़कर तैयारी में जुटे रहे। अब फिर पूरी प्रक्रिया दोहरानी होगी। सबसे बड़ी चिंता… उम्र बढ़ने से अवसर छूट सकते हैं प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्र सीमा सबसे महत्वपूर्ण है। ऐसे में परीक्षा में देरी से कई अभ्यर्थी अगली भर्ती परीक्षा में निर्धारित उम्र सीमा पार कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें अवसर खोना पड़ सकता है। जिन युवाओं ने ये परीक्षाएं दी थीं, सफल हुए थे, उनके सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अब दोबारा कब परीक्षा होगी। कब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होगी।
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