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Palamu News: झारखंड सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भेड़ पालन योजना चला रही है, जिससे किसान 30 भेड़ों के साथ व्यवसाय शुरू कर सकते हैं. पलामू जिले में इस योजना के प्रति पशुपालकों की रुचि बढ़ रही है. पिछले वर्ष 58 लाभुकों को फायदा मिला था, जबकि इस वर्ष 144 लाभुकों का लक्ष्य है.
पलामू. सरकार द्वारा किसानों की आत्मनिर्भरता के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. झारखंड सरकार किसानों और पशुपालकों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए पशुपालन को बढ़ावा दे रही है. इसी कड़ी में सरकार की ओर से भेड़ पालन योजना संचालित की जा रही है. इस योजना के जरिए किसान भेड़ पालन का व्यवसाय शुरू कर अपनी आय का एक अतिरिक्त साधन बना सकते हैं. पलामू जिले में भी इस योजना को लेकर पशुपालकों के बीच रुचि बढ़ रही है.
इस बार 144 को मिलेगा लाभ
पलामू जिले के जिला पशुपालन पदाधिकारी ने बताया कि पिछले वर्ष भेड़ पालन योजना के तहत जिले के 58 लाभुकों को इस योजना का लाभ मिला था, जबकि इस वर्ष 144 लाभुकों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए आवंटन मिलना भी शुरू हो गया है. जिसका आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर जल्द ही लाभुकों को लाभ दिया जाएगा.
भविष्य में आमदनी बढ़ा सकते हैं
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत किसान करीब 30 भेड़ों के साथ अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं. सरकार की ओर से योजना में अनुदान का प्रावधान किया गया है, जिससे लाभुकों पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम होता है. भेड़ पालन कम लागत में शुरू होने वाला व्यवसाय माना जाता है और ग्रामीण क्षेत्रों में इसके लिए पर्याप्त अवसर भी हैं. किसान भेड़ के पालन-पोषण के साथ इनके प्रजनन से संख्या बढ़ाकर भविष्य में अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं.
आय का साधन उपलब्ध कराना है
पशुपालन विभाग की ओर से योजना का लाभ देने के लिए लाभुकों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाता है. इच्छुक किसानों को आवेदन करने के बाद विभागीय स्तर पर पात्रता की जांच और चयन प्रक्रिया से गुजरना होता है. योजना का उद्देश्य ग्रामीण किसानों, पशुपालकों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पशुपालन के माध्यम से रोजगार और आय का साधन उपलब्ध कराना है.
बकरी यूनिट भी मिलेगी
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से पशुपालन क्षेत्र में एक नई योजना भी शुरू की गई है. इसके तहत लाभुकों को 100 बकरी और 5 बकरा की यूनिट उपलब्ध कराने का प्रावधान है. इस योजना से भी बड़ी संख्या में किसानों और पशुपालकों को लाभ मिलने की उम्मीद है. बकरी पालन की यह यूनिट छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय बढ़ाने का बेहतर माध्यम बन सकती है.
आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
बता दें कि भेड़ और बकरी पालन दोनों ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. जहां पशुओं से मिलने वाले बच्चे, ऊन और अन्य उत्पादों की बिक्री से किसान नियमित आमदनी पा सकते हैं. सरकार की ओर से 50% से 90% तक अनुदान मिलने से पशुपालकों को व्यवसाय शुरू करने में आर्थिक मदद मिलती है. ऐसे में भेड़ पालन योजना ग्रामीण इलाकों के किसानों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.
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Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…
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