Last Updated:
Palamu Malay Dam: मॉनसून के बाद पलामू का मलय डैम हरियाली और पहाड़ों के बीच बेहद खूबसूरत नजर आता है. मेदिनीनगर से करीब 34 किलोमीटर दूर स्थित यह डैम सात पहाड़ों से घिरा है. डैम में फिलहाल करीब 40 फीट पानी है. करीब 45 फीट जलस्तर होने पर पानी ओवरफ्लो होकर झरने की तरह गिरने लगता है. पर्यटक यहां नौका विहार का आनंद भी ले सकते हैं. अब सैलानियों को डैम के ओवरफ्लो होने का इंतजार है.
पलामू: मॉनसून आते ही प्रकृति का नया और अनोखा रूप देखने को मिलता है. झारखंड जंगल और पहाड़ों से घिरा इलाका है. बारिश के बाद यहां की खूबसूरती और बढ़ जाती है. पलामू की धरती भी हरियाली की चादर ओढ़ लेती है. खेतों में किसान कृषि कार्य में जुट जाते हैं. जंगलों में चिड़ियों की चहचहाहट बढ़ जाती है. पहाड़ों के बीच बहता पानी प्रकृति की खूबसूरती में चार चांद लगा देता है. बारिश जहां कई जगह परेशानी का कारण बनती है, वहीं कुछ स्थानों पर यही वर्षा सुकून और रोमांच का एहसास कराती है. ऐसा ही नजारा पलामू के मलय डैम में देखने को मिलता है. बारिश के मौसम में यहां का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है. चारों तरफ हरियाली दिखाई देती है. पहाड़ों के बीच फैला जलाशय लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है.
सात पहाड़ों से घिरा है ये डैम
दरअसल, पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से करीब 34 किलोमीटर दूर मलय डैम स्थित है. यह डैम सात पहाड़ों से घिरा हुआ है. शांत वातावरण, हरियाली और पहाड़ों के बीच फैला जलाशय इसे बरसात के मौसम में खास बना देता है. बारिश के बाद यहां का प्राकृतिक नजारा देखने लायक होता है. भारी बारिश के बाद जब डैम पानी से लबालब भर जाता है, तो इसका पानी ओवरफ्लो होने लगता है. पानी ऊंचाई से झरने की तरह नीचे गिरता है. उस समय डैम की खूबसूरती देखते ही बनती है. यही वजह है कि अब सैलानियों को डैम के ओवरफ्लो होने का इंतजार रहता है.
बारिश में नजारा और भी आकर्षक
स्थानीय लोगों ने बताया कि मलय डैम घूमने पहुंचे तस्लीम अंसारी को यहां का नजारा काफी पसंद है. उन्होंने बताया कि जब भी उन्हें काम से छुट्टी मिलती है, वह परिवार के साथ मलय डैम घूमने आते हैं. उन्होंने कहा कि सात पहाड़ों के बीच स्थित यह डैम बेहद खूबसूरत है. बरसात में डैम भरने के बाद जब पानी झरने के रूप में नीचे गिरता है, तो नजारा और भी आकर्षक हो जाता है.
मलय डैम पर सुकून का एहसास
तस्लीम अंसारी ने कहा कि मलय डैम पहुंचने के बाद सुकून का एहसास होता है. यहां परिवार के साथ समय बिताना अच्छा लगता है. बच्चे भी नौका विहार का खूब आनंद लेते हैं. बारिश के मौसम में हरियाली के बीच डैम का नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है. मलय डैम सिर्फ पर्यटन के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है. इसका पानी आसपास के किसानों के लिए भी काफी उपयोगी है. डैम के पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए किया जाता है. आसपास के कई गांवों के किसान खेती के लिए इस जलाशय पर निर्भर रहते हैं. इससे कृषि कार्य में भी मदद मिलती है.
नौका विहार की सुविधा उपलब्ध
नौका चालक सुनील कुमार ने बताया कि मलय डैम में पर्यटकों के लिए नौका विहार की सुविधा उपलब्ध है. सैलानी मोटर बोट और पैडल बोट से जलाशय की सैर कर सकते हैं. मोटर बोट की सवारी के लिए प्रति व्यक्ति 100 रुपये शुल्क लिया जाता है. वहीं, पैडल बोट के लिए 50 रुपये शुल्क है. नौका विहार के दौरान पर्यटकों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाता है. सैलानियों को लाइफ जैकेट पहनाकर नौका विहार कराया जाता है. इससे लोग सुरक्षित तरीके से जलाशय की सैर कर सकते हैं. डैम परिसर में खाने-पीने की छोटी दुकानें भी मौजूद हैं. रविवार को यहां कुछ ठेले भी लगते हैं. पर्यटकों की सुविधा के लिए शौचालय की व्यवस्था भी की गई है.
डैम में करीब 40 फीट पानी
बारिश का दौर बढ़ने के साथ अब सैलानियों की नजर डैम के जलस्तर पर है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, फिलहाल डैम में करीब 40 फीट पानी हो चुका है. उनका कहना है कि करीब 45 फीट पानी होने के बाद डैम का पानी ओवरफ्लो होने लगता है. इसके बाद पहाड़ों के बीच गिरते पानी का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है. ऐसे में पर्यटकों को अब उस पल का इंतजार है, जब मलय डैम पूरी तरह भर जाएगा. डैम के ओवरफ्लो होने के बाद पहाड़ों के बीच गिरता पानी यहां की प्राकृतिक खूबसूरती को और बढ़ा देगा. बारिश, हरियाली, पहाड़ और झरने का यह नजारा सैलानियों के लिए यादगार बन सकता है.
About the Author
न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…
और पढ़ें