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पलामू के चेडावार गांव की सुनीता देवी मचान विधि और जैविक खाद से सब्जियों की खेती कर रही हैं. वे नेनुआ, करेला और टमाटर उगाकर रोजाना मेदिनीनगर बाजार में बेचती हैं. इससे उन्हें हर महीने 50 से 60 हजार रुपये की आमदनी होती है. सुनीता देवी आज आत्मनिर्भरता की मिसाल हैं.
पलामूः पारंपरिक खेती के साथ किसान आधुनिक खेती और जैविक खेती से भी अच्छा और ज्यादा मुनाफा कमा रही है. पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड के चेडावार गांव की महिला किसान सुनीता देवी पिछले करीब 30 वर्षों से खेती कर रही हैं. शादी के बाद जब वह ससुराल आईं, तभी से सब्जी की खेती को अपनी आजीविका का जरिया बनाया. शुरुआती दौर में वह मुख्य रूप से बैंगन की खेती करती थीं, लेकिन समय के साथ उन्होंने खेती में बदलाव किया और अब अलग-अलग मौसम में कई तरह की सब्जियों का उत्पादन कर रही हैं.
बता दें कि सुनीता देवी आज सालभर सब्जी की खेती करती हैं. उनके खेत में नेनुआ, भिंडी, करेला, कद्दू, टमाटर समेत कई प्रकार की सब्जियां उगाई जाती हैं. करीब पांच कट्ठे में नेनुआ, एक कट्ठे में करेला और एक कट्ठे में टमाटर की खेती के साथ अन्य सब्जियों का भी उत्पादन करती हैं. पिछले करीब तीन वर्षों से वह विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती पर विशेष ध्यान दे रही हैं.
मचान विधि से हुआ मुनाफा
सुनीता देवी ने बताया कि खेती में बेहतर उत्पादन और सब्जियों को खराब होने से बचाने के लिए वे मचान विधि का इस्तेमाल करती हैं. बांस और रस्सी के सहारे तैयार किए गए मचान पर सब्जियों की बेल को चढ़ाया जाता है. इससे फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, जिससे सब्जियों के खराब होने की संभावना कम रहती है और उत्पादन भी बेहतर होता है. कुछ फसलों में वह मल्चिंग तकनीक का भी इस्तेमाल करती हैं. खेती में जैविक खाद का भी प्रयोग करती हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है.
आगे कहा कि खेती सिर्फ घर चलाने का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का जरिया भी बन चुकी है. वह रोज सुबह खेत में काम करने पहुंचती हैं और सुबह-शाम मिलाकर करीब दो से चार घंटे खेती में मेहनत करती हैं. खेत से सब्जियां तोड़ने के बाद उन्हें लेकर मेदिनीनगर शहर के बाजार में पहुंचती हैं और वहां बेचती हैं. सब्जियों की बिक्री से उन्हें रोजाना करीब 2500 से 3000 रुपये तक की आमदनी हो जाती है.
हर माह 50-60 हजार कमाई
सुनीता देवी ने बताया कि सब्जी की खेती से उन्हें महीने में करीब 50 से 60 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है. इसी आमदनी से बच्चों की पढ़ाई और घर के जरूरी खर्च पूरे होते हैं. उनका कहना है कि मेहनत, सही तकनीक और बाजार में सीधे सब्जी बेचने से खेती में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. सुनीता देवी की कहानी गांव की उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेती के जरिए आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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