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किसानों के लिए जरूरी खबर! खेत में दिखे ये सफेद कीड़े तो...


बोकारो: बरसात के मौसम में खेतों में नमी बढ़ने के साथ किसानों के सामने कई तरह के कीटों का खतरा भी बढ़ जाता है. इन्हीं में से एक व्हाइट ग्रब यानी सफेद गिडार है, जो मुख्य रूप से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचाता है और टमाटर, मूंगफली, मिर्च, बैंगन समेत कई सब्जियों की फसल में इसका प्रकोप अधिक देखने को मिलता है.

जानें पौधे क्यों लगते हैं मुरझाने

यह कीट पौधों की जड़ों में प्रवेश कर उसे खाने लगता है, जिस कारण पौधे धीरे-धीरे मुरझाने लगते हैं और समय रहते इसकी पहचान नहीं होने पर किसानों को फसल में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. ऐसे में बोकारो की उप परियोजना निदेशक सविता जोजो ने व्हाइट ग्रब की पहचान, फसल पर इसके प्रभाव और बचाव के उपायों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है.

नमी बढ़ने से बढ़ता है ये रोग

सविता जोजो ने बताया कि बरसात के दिनों में मिट्टी में नमी बढ़ने के कारण व्हाइट ग्रब का प्रकोप अधिक बढ़ सकता है. इसके लार्वा मिट्टी के अंदर रहकर पौधों की जड़ों को खाते हैं, जिससे पौधे की जड़ें कमजोर होने लगती हैं. साथ ही पौधे धीरे-धीरे मुरझाने लगते हैं, कई बार किसान पौधे के मुरझाने का सही कारण नहीं समझ पाते और जब तक कीट की पहचान होती है. तब तक फसल को काफी नुकसान हो चुका होता है.

बता दें कि व्हाइट ग्रब की पहचान इसके सफेद रंग के शरीर से आसानी से की जा सकती है. वहीं, इसके मुंह का हिस्सा हल्का लाल या काला दिखाई दे सकता है. मिट्टी में जड़ों के आसपास इसकी मौजूदगी मिलने पर किसानों को सतर्क हो जाना चाहिए.

व्हाइट ग्रब की रोकथाम के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपायों में खेत की अच्छी तरह जुताई करना चाहिए है. बरसात का मौसम शुरू होने से पहले खेत की गहरी जुताई करने से मिट्टी में मौजूद कीटों के अंडे और लार्वा नष्ट होने में मदद मिलती है. साथ ही जुताई के बाद ये कीट मिट्टी की ऊपरी सतह पर आ जाते हैं, जिन्हें पक्षी भी खा लेते हैं, इससे खेत में व्हाइट ग्रब की संख्या को शुरुआती स्तर पर ही कम हो जाता है.

नीम खली समेत इस जैविक खाद का करें इस्तेमाल

इसके अलावा व्हाइट ग्रब के नियंत्रण के लिए किसान नीम खली या नीम आधारित जैविक खाद मिट्टी में इस्तेमाल कर नियंत्रित कर सकते हैं. वहीं, मिट्टी के अलावा व्हाइट ग्रब के वयस्क कीट यानी बीटल बाहर निकलकर उड़ते हैं और पौधों पर बैठकर अंडे देते हैं. उस समय इनकी संख्या को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है. इसके लिए किसान फेरोमोन ट्रैप और लाइट ट्रैप का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस ट्रैप की मदद से वयस्क कीट आकर्षित होकर फंस जाते हैं, जिससे वे बड़ी संख्या में अंडे देने से पहले ही नियंत्रित किए जा सकते हैं.

वहीं, अगर खड़ी फसल या पौधे अचानक मुरझाने लगें, तो किसान इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज न करें. बल्कि कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर फसल के अनुसार जैविक या रासायनिक कीटनाशी का इस्तेमाल किया जा सकता है.



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