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Local Mobile Brand : सरकार ने भारतीय मोबाइल कंपनियों को बढ़ावा देने और उनके मौलिक डिजाइन को निखारने की पहल शुरू की है. केंद्रीय प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विणी वैष्णव ने कहा है कि मोबाइल प्रोत्साहन योजना का लाभ पाने के लिए इन कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उनके डिजाइन पूरी तरह उनके खुद के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी भी हैं.
सरकार ने भारतीय कंपनियों को प्रोत्साहन देने के लिए मोबाइल फोन विनिर्माण योजना लॉन्च की है.
नई दिल्ली. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारतीय कंपनियों को खुद के डिजाइन और तकनीक वाले फोन बनाने होंगे. यह किसी अन्य कंपनी या प्रोडक्ट की नकल नहीं होने चाहिए. उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय कंपनियों के बौद्धिक संपदा अधिकार वाले और देश में डिजाइन किए गए मोबाइल फोन अगले 10-14 महीने के भीतर बाजार में आ जाएंगे. यह फोन 62,500 करोड़ रुपये की ‘मोबाइल फोन विनिर्माण योजना’ (एमपीएमएस) के तहत पेश किए जाएंगे.
वैष्णव ने एमपीएमएस की जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत आवेदन करने वाली कंपनियों को यह साबित करना होगा कि मोबाइल फोन के विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले डिजाइन के बौद्धिक संपदा अधिकार (इंटेलेक्चुअल राइट्स) उनके पास हैं. उन्होंने दो टूक कहा कि भारतीय ब्रांड विकसित करने के लिए हम इस बात को लेकर बहुत स्पष्ट हैं कि डिजाइन आपका अपना होना चाहिए. यह किसी अन्य उत्पाद की नकल नहीं हो सकता. भारतीय कंपनियों को अपना डिजाइन तैयार करना होगा और साबित करना होगा कि उसका बौद्धिक संपदा अधिकार भी उनका अपना है.
डिजाइन के मूल्यांकन में नरमी नहीं
वैष्णव ने कहा कि सरकार भारतीय ब्रांडों के डिजाइन के मूल्यांकन में किसी तरह की नरमी नहीं बरतेगी. तीन कंपनियों को डिजाइन के विकल्प पेश करने के लिए कहा गया है और उनके डिजाइन अपने क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ उत्पादों के स्तर के होने चाहिए. वैष्णव ने कहा कि हमें तीन ऐसी कंपनियां दिख रही हैं, जिनमें अब से करीब 10-14 महीने में इस क्षेत्र में आने की क्षमता है. यह कंपनियां भारतीय हैं और उनके पास खुद का डिजाइन बनाने की क्षमता है.
कोई भी फोन भारत में नहीं होता डिजाइन
फिलहाल कोई भी मोबाइल फोन पूरी तरह भारत में डिजाइन नहीं किया जाता है. घरेलू ब्रांड लावा इंटरनेशनल और एआई प्लस का दावा है कि वे अपने स्मार्टफोन को स्थानीय स्तर पर ही डिजाइन करते हैं. एमपीएमएस को दो हिस्सों में बांटा गया है. इनमें मोबाइल फोन विनिर्माण को बढ़ावा देने वाला टार्गेट सेग्मेंट-1 (टीएस1) और भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों को समर्थन देने वाला टार्गेट सेग्मेंट-2 (टीएस2) शामिल हैं. टीएस1 के तहत अनुबंध पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कंपनियों समेत पिछले वित्तवर्ष में 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाली मोबाइल फोन कंपनियां योजना का लाभ लेने के लिए पात्र होंगी.
टीएस-2 में कौन सी कंपनियां शामिल
टीएस2 के तहत आवेदन करने वाली कंपनियों में 51 फीसदी भारतीय स्वामित्व और वित्तवर्ष 2025-26 में कम-से-कम 1,000 करोड़ रुपये का कारोबार होना जरूरी है. वैष्णव ने कहा कि भारत में पहले मोबाइल फोन विनिर्माण का परिवेश था, लेकिन कर-संबंधी मुद्दों और चीनी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के कारण भारतीय कंपनियों के लिए बाजार में टिक पाना मुश्किल हो गया. अब दोबारा भारतीय ब्रांड विकसित करने पर ध्यान देने का समय है. मौजूदा ब्रांड को योजना का लाभ लेने के लिए हर साल वित्तवर्ष 2025-26 के कुल कारोबार से कम से कम 5,000 करोड़ रुपये अधिक की बिक्री का न्यूनतम स्तर हासिल करना होगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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