रांची: सरकार के फैसले और निर्णय के बाद करीब दो महीने के लिए थमा छात्र आंदोलन अब एक बार फिर जोर पकड़ता नजर आ रहा है. इसकी बड़ी वजह राज्य में रद्द की गई 22 परीक्षाओं को लेकर हाई कोर्ट का फैसला है. इन परीक्षाओं पर फिलहाल हाई कोर्ट ने स्टे लगा दिया है. इसके बाद छात्रों में काफी आक्रोश है. शुक्रवार को मुख्यमंत्री के पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान राजधानी रांची के अलावा हजारीबाग, गढ़वा, गिरिडीह और रामगढ़ में भी जमकर हंगामा हुआ. कई जगहों पर छात्रों के साथ मारपीट की बात सामने आई. इस दौरान जेएमएम कार्यकर्ताओं और छात्राओं के बीच भी विवाद हुआ. वहीं, पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए कई जगहों पर लाठीचार्ज किया.
छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया
सरकार और छात्रों के बीच चल रहा टकराव 19 अगस्त के आसपास थमता हुआ नजर आ रहा था. अब यह विवाद एक बार फिर तेजी से उभरता दिखाई दे रहा है. हाई कोर्ट ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा के साथ ही सबसे ज्यादा विवादों में रही जेएसएससी सीजीएल परीक्षा पर भी स्टे लगा दिया है. इसके अलावा कुछ अन्य परीक्षाओं को लेकर भी कोर्ट की ओर से रोक लगाई गई है. इस फैसले के बाद छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया है.
परीक्षा रद्द करने का फैसला जल्दबाजी में
छात्रों का आरोप है कि सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला जल्दबाजी में लिया. उनका कहना है कि सरकार ने पूरे मामले की पर्याप्त तैयारी नहीं की थी. इसी वजह से मामला कोर्ट में पहुंचते ही सरकार का फैसला कानूनी कसौटी पर टिक नहीं पाया. छात्रों का दावा है कि सरकार की ओर से सही तरीके से तैयारी नहीं किए जाने के कारण कोर्ट ने एक के बाद एक परीक्षाओं से जुड़े आदेशों पर स्टे लगा दिया.
जेएमएम की ओर से प्रेस वार्ता
अब तक जिन परीक्षाओं पर स्टे की बात सामने आई है, उनमें 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा, जेएसएससी सीजीएल, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी ऑफिसर की परीक्षाएं शामिल हैं. इन परीक्षाओं को लेकर पहले से ही छात्रों के बीच नाराजगी थी. हाई कोर्ट के फैसले के बाद यह नाराजगी और बढ़ गई है. इसी के विरोध में छात्रों ने 21 अगस्त को राज्यभर में मुख्यमंत्री के पुतला दहन कार्यक्रम का आयोजन किया. छात्रों ने अलग-अलग जिलों में सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. हालांकि, पुतला दहन कार्यक्रम से ठीक पहले जेएमएम की ओर से प्रेस वार्ता की गई. इसमें आरोप लगाया गया कि छात्रों के आंदोलन के पीछे बीजेपी और कोचिंग माफियाओं का हाथ है.
छात्रों के इस आंदोलन का विरोध
जेएमएम ने छात्रों के इस आंदोलन का विरोध भी किया. इसके बाद राज्य के कई हिस्सों में स्थिति तनावपूर्ण हो गई. कई जगहों पर जेएमएम कार्यकर्ताओं और प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच विवाद हुआ. कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों से पुतला छीनने की कोशिश की गई. इसे लेकर भी दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट हुई. कई जगहों पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया.
प्रदर्शन के दौरान विवाद की स्थिति
रांची के अलावा हजारीबाग, गढ़वा, गिरिडीह और रामगढ़ में भी प्रदर्शन के दौरान विवाद की स्थिति बनी. छात्रों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान उनके साथ मारपीट की गई. वहीं, पुलिस और प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई. पूरे घटनाक्रम के बाद छात्रों का आक्रोश और बढ़ता नजर आ रहा है. इन तमाम घटनाक्रमों से साफ है कि छात्र आंदोलन एक बार फिर बड़ा रूप ले सकता है. जेएमएम कार्यकर्ताओं और पुलिस की कार्रवाई को लेकर छात्रों में नाराजगी बढ़ी है. ऐसे में आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है. अगर छात्रों का आंदोलन फिर से व्यापक स्तर पर शुरू होता है तो सरकार के सामने इसे संभालना आसान नहीं होगा.
सीआईडी की जांच भी तेज
इधर, जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में सीआईडी की जांच भी तेज कर दी गई है. जांच के लिए गठित एसआईटी में सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 17 कर दी गई है. जांच एजेंसी की ओर से एक बार फिर आम लोगों से इस मामले से जुड़ी जानकारी देने की अपील की गई है. सीआईडी की यह अपील वर्ष 2023-24 में आयोजित जेएसएससी सीजीएल परीक्षा से संबंधित है. जब इस मामले की जांच शुरू हुई थी, तब भी सीआईडी ने आम लोगों से परीक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की थी. अब जांच को आगे बढ़ाने के लिए फिर से लोगों से सहयोग मांगा गया है.
सीआईडी ने मांगे सहयोग
सीआईडी के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति के पास जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी से संबंधित कोई जानकारी है तो वह जांच टीम तक पहुंचा सकता है. सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने की बात कही गई है.
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