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Dharohar: रांची से 65 किलोमीटर दूर मैक्लुस्कीगंज इलाका बहुत ही खूबसूरत है. यहां अंग्रेजों द्वारा बनाए गए बंगले, वॉच टावर, चर्च और स्कूल आज भी अपने मूल स्वरूप में मौजूद हैं. यह स्थान 100 साल पुरानी जीवनशैली का अनुभव कराता है, जहां आधुनिकता का कोई प्रभाव नहीं दिखता है.
रांची से करीब 65 किलोमीटर की दूरी पर मैक्लुस्कीगंज स्थित है. यहां की सबसे खास बात ये है कि अंग्रेजों द्वारा बनाया गया बंगले से लेकर वॉच टावर, चर्च से लेकर गार्डन, स्कूल से लेकर डांस बार हर एक चीज आज भी बिल्कुल वैसा ही आपको देखने को मिलेगा. इसकी खूबसूरती देखकर आप तारीफ जरूर करेंगे.
बहुत लोग तो घर को रिनोवेट करके और खरीद कर एकदम हेरिटेज स्टाइल में रहना पसंद करते हैं. बिल्कुल भी बदलाव नहीं किया गया है. अगर आप 100 साल पहले वाली जिंदगी जीना चाहते हैं तो एक बार आपको यहां आना चाहिए. पूरा का पूरा शहर ही बिल्कुल ऐसा है. यहां पर कोई भी नई बिल्डिंग आपको देखने को नहीं मिलेगी.स्कूल भी डॉन बॉस्को है, जो कि अंग्रेजों ने ही बनाया था. यह स्कूल भी एकदम अंग्रेजी स्टाइल में ही आपको देखने को मिलेगा. लाल कलर का छत बंगला स्टाइल में व दीवारे काफी चौड़ी और इतनी मजबूत की आज तक इसे रिनोवेशन तक की जरूरत नहीं पड़ी. यह स्कूल टॉप स्कूलों में गिना जाता है और आसपास सिर्फ और सिर्फ घना जंगल है. ऐसे में यहां पर पढ़ना बच्चों का सपना होता है.
यहां पर आपको कोई भी आधुनिकरण देखने को नहीं मिलेगी. आज भी वही गली, आज भी वहीं सड़क, चारों तरफ घनघोर जंगल और बीच में अंग्रेजी स्टाइल में बनाया गया बांग्ला. सरकारी कर्मचारी जो रिटायर्ड हैं, वह यहां पर रहना काफी पसंद करते हैं. रिटायरमेंट के बाद कई सारे लोगों ने अपनी जिंदगी यहीं पर बसा ली.
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यहां पर पास में ही आपको देगा देगी नदी भी देखने को मिलेगी. मंदिर मस्जिद और चर्च तीनों एक ही परिसर में देखने को मिलेंगे. एकदम शांति, कोई शोरगुल नहीं, शहर की भागदौड़ से कोई मतलब नहीं. सड़कें तो ऐसे जैसे लंदन की सड़क हो एकदम चिकनी, एकदम शुद्ध और ताजी हवा, ऐसे में दूर-दूर से लोग इस शहर में घूमने के लिए आते है.
आप यहां पर घूमेंगे तो आपको लगेगा यह तो जंगल है, घर कहां है? लेकिन जब आप थोड़ा नजदीक अंदर जाकर देखेंगे. तब देखेंगे अरे अंदर तो घर भी बना हुआ है और लोग रह भी रहे हैं. यहां आसपास शहद की खेती काफी अधिक देखी जाती है. नाशपाती, गेहूं और कई तरह की सब्जियां कि यहां पर स्थानीय लोग खेती करते हैं.