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जिले के स्कूलों में वज्रपात से बचने के कोई भी कारगर उपाय वर्तमान समय में नहीं है। जिलेभर में संचालित 693 स्कूलों में से वर्ष 2008-09 में 142 स्कूल भवनों में 36 हजार रुपए की लागत से तड़ित चालक लगाए गए थे। जिनमें से अधिकांश जगहों पर यंत्र की चोरी लगने के कुछ समय के बाद ही हो गई थी। इसे देखते हुए अन्य स्कूल प्रबंधनों ने अन्य भवन में तड़ित चालक यंत्र फिर लगवाया था। कुछ में भवनों में यंत्र लगे ही नहीं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में मात्र 14-20 स्कूल भवनों में ही तड़ित चालक लगा हुआ है। तड़ित चालक लगाने को ले कई बार विभाग से पत्राचार भी किया गया है। परंतु अभी तक तड़ित चालक लगाने की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो पाई है। कुछ विद्यालयों में जांच करने पर पता चला था कि कि स्कूल में तड़ित चालक लगने के कुछ सप्ताह के बाद ही तड़ित चालक की चोरी हो गई थी। चोरी की घटना को ले संबंधित थाने में एफआईआर भी किया गया था। बाद में वर्ष 2015, 16 में एक बार फिर लगभग 110 विद्यालयों में तड़ित चालक यंत्र लगे थे। जो पुनः देखरेख के अभाव के कारण खराब हो गई या फिर चोरी हो गए। कुछ प्रधानाध्यापकों का मानना है कि लोहरदगा जिला वज्रपात जोन में आता है। इसलिए बच्चों की सुरक्षा के लिए तड़ित चालक की अत्यंत आवश्यकता है। विभाग को चाहिए कि इस पर पहल करते हुए जिले के तमाम स्कूलों में तड़ित चालक की व्यवस्था सुनिश्चित हो। जिला शिक्षा अधिकारी एसडी चंदमौलेश्वर ने कहा कि वैसे स्कूल जहां पर तड़ित चालक नहीं हैं, या जहां से चोरी हो चुके हैं। वहां से मांगपत्र मंगाया जा रहा है। जल्द ही वैसे स्कूलों में तड़ित चालक लगाने का काम शुरू करते हुए उसके सुरक्षा की जिम्मेवारी विद्यालय प्रबंधन समिति को दी जाएगी। क्योंकि विद्यालय प्रबंधन समिति में स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक ही होते हैं। जो विद्यालय भवन के आसपास निवास करते हैं। वह बेहतर ढंग से स्कूल भवन व तड़ित चालक की सुरक्षा कर सकते हैं।
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