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केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) में मेस के खराब खाने और छात्र प्रतिनिधियों की सहमति के बिना लिए जा रहे फैसलों को लेकर छात्रों का धरना और अनशन सोमवार से शुरू हुआ था। सोमवार को कुलपति प्रो. सारंग मेढेकर के नेतृत्व में ऑडिटोरियम में छात्रों और अधिकारियों के बीच लंबी बैठक हुई। बैठक रात करीब 9 बजे तक चली, लेकिन छात्रों की प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। नतीजा बातचीत विफल रहा। वीसी और अधिकारी चले गए हैं, जबकि छात्र ऑडिटोरियम में जमे हुए हैं। छात्रों ने बातचीत से पहले कैंपस में नारेबाजी कर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। इधर मैथ के छात्र छात्र मनु कुमार का परीक्षा में शामिल करने को लेकर अनशन जारी है। इस मामले पर विवि ने कहा कि फेल छात्र को परीक्षा में कैसे शामिल किया जा सकता है। छात्रों ने मैस व्यवस्था में सुधार के लिए मांग रखी कि मैस से संबंधित विवाद को दंडात्मक कार्रवाई के रूप में लेते हुए सात दिन तक छात्रों को निशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही भोजन की व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए कूपन सिस्टम लागू करने की मांग की गई। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा कि छात्रों का दोनों मांग मानने लायक नहीं है। इस कारण स्वीकार नहीं किया। 3,800 रुपए की जगह 3,000 शुल्क ले विवि प्रशासन: छात्र बैठक में मेस शुल्क को लेकर छात्रों ने अपनी बात रखी। कहा कि प्रतिमाह 3,800 की जगह 3,000 रुपए शुल्क करने की मांग की, जिसे विवि प्रशासन ने अस्वीकार कर दिया। विवि ने कहा कि राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में करीब 4,200 रुपए और दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय में करीब 3,800 प्रतिमाह भोजन शुल्क लिया जा रहा है। कम शुल्क में मेस का संचालन संभव नहीं है। रविवार से शुरू हुआ था आंदोलन खराब भोजन और छात्र प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर छात्रों ने रविवार से धरना-प्रदर्शन शुरू किया था। इसके बाद कुछ छात्रों ने अनशन भी शुरू किया। देर रात प्रॉक्टर अमरेंद्र कुमार ने छात्रों से बातचीत कर उनकी मांगों पर सोमवार को कुलपति और विश्वविद्यालय अधिकारियों के साथ बैठक कराने का आश्वासन दिया था। इसके बाद छात्रों ने अनशन समाप्त किया था। पड़ोसी राज्यों के सेंट्रल यूनिवर्सिटी में यहां से अधिक पैसे लिए जाते हैं। आज फिर विवि अधिकारियों व छात्रों की वार्ता यूनिवर्सिटी के कम्यूनिकेशन अधिकारी नरेंद्र कुमार ने बताया कि मंगलवार को 11 बजे यूनिवर्सिटी प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत होगी, जिसमें समाधान निकल जाने की संभावना है। छात्रों के सभी जायज मांगों के लिए विवि प्रशासन हर संभव कदम उठाने के लिए तैयार है। पड़ोसी राज्यों के सेंट्रल यूनिवर्सिटी में यहां से भी अधिक प्रतिमाह मेस का शुल्क है।
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