राहुल गांधी का हाल आप देख लीजिए. अरविंद केजरीवाल की तरह वो भी छात्रों के मुद्दे पर खूब माहौल बना रहे हैं. राहुल गांधी के पुणे वाले कार्यक्रम के बाद उनके करीबी उन्हें पीएम बनाने की बात कर रहे हैं. कोई उन्हें बैटमैन जैसा हीरो बता रहा है. लेकिन बीजेपी राहुल गांधी के खिलाफ एक लिस्ट ले आई है और ये दावा कर रही है कि राहुल गांधी ने पुणे में जो छात्रों की गूंज कार्यक्रम किया था, वो तो फ्लॉप हो गया. बीजेपी का दावा है कि राहुल गांधी के अपने नेताओं ने ही उन्हें गच्चा दे गए. कई कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी के पुणे वाले कार्यक्रम पर कोई सोशल मीडिया पोस्ट नहीं किया, कुछ पॉजिटिव नहीं कहा. वो भी उस दौर में जब सोशल मीडिया पर नैरेटिव की लड़ाई चल रही है.
बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के पुणे वाले कार्यक्रम को कांग्रेस के नेता ही भाव नहीं दे रहे हैं. आरोप है कि कांग्रेस के कई सीनियर नेताओं ने राहुल गांधी के इवेंट को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट नहीं किया.
‘राहुल गांधी को GenZ का लीडर नहीं मान रहे कांग्रेस के ही नेता’
प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के 249 पदाधिकारियों में से सिर्फ 113 ने ही राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर एक्स पर पोस्ट किया. 249 में से सिर्फ 48 नेताओं ने इंस्टाग्राम पर राहुल गांधी कार्यक्रम से जुड़े पोस्ट किए. 83 नेता ऐसे हैं, जिन्होंने किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसकी बात नहीं की. बीजेपी प्रवक्ता ने दावा किया कि मनीष तिवारी, चरणजीत सिंह चन्नी, सीडब्लूसी मेंबर अजय माकन जैसे नेताओं ने राहुल गांधी के इवेंट को भाव नहीं दिया. इसी डेटा को दिखाकर बीजेपी ये माहौल बना रही है कि पुणे में राहुल गांधी के पीआर स्टंट को उनके ही नेता भाव नहीं दे रहे हैं , उनके ही नेता राहुल गांधी को GenZ का नेता नहीं मान रहे.
प्रदीप भंडारी ने कहा, ‘सीडब्लूसी के खुद के मेंबर्स ने राहुल गांधी के पुणे के छात्रों के ‘गूंज’ कार्यक्रम के बारे में कोई पॉजिटिव टिप्पणी नहीं दी और ये कोई नॉर्मल कार्यकर्ता नहीं हैं. इसमें कुछ नेता शामिल हैं, जैसे अजय माकन, मनीष तिवारी, चरणजीत सिंह चन्नी. जब ये राहुल गांधी के छात्रों के इवेंट ‘गूंज’ को अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर समर्थन नहीं करते हैं, इससे स्पष्ट होता है कि आज कांग्रेस पार्टी भी ये जानती है कि राहुल गांधी की पूरी आउटरीच एक मैन्युफैक्चर्ड पीआर कैंपेन है.
राहुल गांधी ने चला ओबीसी कार्ड
अगर बीजेपी के आरोपों को सही माने तो कांग्रेस के अंदर ही राहुल गांधी की गूंज सुनाई नहीं दे रही है. इस बीच पीएम मोदी को घेरने के लिए राहुल गांधी ने फिर से ओबीसी कार्ड चल दिया है. राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जाति जनगणना को लेकर पीएम मोदी को लेटर लिखा है. ये आरोप लगाया कि पीएम मोदी जाति जनगणना को सही से नहीं करवा रहे.
इन लोगों को हर चीज अपने मुताबिक चाहिए. पहले कह रहे थे कि पीएम मोदी जाति जनगणना से भाग रहे हैं. अब जाति जनगणना करवा रहे हैं तो उसकी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं.
पीएम मोदी को भेजे लेटर में क्या कहा?
पीएम मोदी को भेजे अपने लेटर में राहुल गांधी ने कहा कि ओपन एंडेड सवालों के जरिये जातियों की सही गिनती संभव नहीं है. ये तरीका भ्रामक है. इसमें हर व्यक्ति जाति का जो नाम बताएगा वही दर्ज होगी. भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों और भाषाओं से जानी जाती है. ऐसे में अगर एक ही जाति के लोग अलग-अलग नामों से दर्ज होंगे तो एक ही जाति हजारों नामों में बंट जाएगी. देश में लाखों जातियों के नाम निकलेंगे. जाति जनगणना से हासिल पूरा आंकड़ा ही बेकार हो जाएगा. इससे ये नहीं पता चलेगा कि भारत मे OBC की आबादी कितनी है. जनगणना में पिछड़े वर्ग का शब्द तक शामिल नहीं है. इसका समाधान ये है कि जातियों की एक ड्रॉप डाउन सूची बनाई जाए. सरकार मौजूदा प्रश्नावली रद्द कर सबसे बात कर नई प्रश्नावली बनाए.
कांग्रेस कह रही है कि जैसे बिहार और तेलंगाना में जाति जनगणना हुई है, वही तरीका अपनाया जाए. इसके लिए राहुल गांधी ने लेटर में तेलंगाना में इस्तेमाल जाति की सूची और बिहार में इस्तेमाल जाति की सूचि की कॉपी लेटर के साथ लगाई है.
जिस जनगणना को बताया फेक, अब उसी की वकालत
इसे लेकर जयराम रमेश ने कहा, ‘जिस तरह से बिहार में, तेलंगाना में जाति सर्वेक्षण करवाया गया था. उसी के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर 2027 की जो जनगणना है, जिसकी शुरुआत अभी-अभी हुई है, उसी तरह आप यही प्रणाली अपनाएं.’
राहुल गांधी ने अपने लेटर में बिहार और तेलंगाना के जाति जनगणना का जिक्र किया और पीएम मोदी को उसी की तर्ज पर जाति जनगणना कराने को कहा, जबकि यही राहुल गांधी पिछले साल पटना जाकर बिहार में हुई जाति जनगणना को फेक बता रहे थे. राहुल गांधी ने तब कहा था, ‘पहला कदम हमें ये पता लगाना है कि सच्ची स्थिति क्या है. जाति जनगणना हम छोड़ने वाले नहीं हैं. और ये बिहार वाला जाति जनगणना नहीं, ये फेक जाति जनगणना इन्होंने किया है. लोगों को बेवकूफ बनाने वाली ये जाति जनगणना नहीं.