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Purnia Paperless Land Registry: पूर्णिया में अब जमीन की रजिस्ट्री पेपरलेस तरीके से हो रही है. यह नई व्यवस्था प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और सुरक्षित बनाती है. जिससे धोखाधड़ी पर अंकुश लगेगा. आधार-आधारित सत्यापन और QR कोड वाली डिजिटल कॉपी से फर्जीवाड़ा रुकेगा और लोगों को कागजात ढोने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
पूर्णिया: पूर्णिया में जमीन की रजिस्ट्री अब पेपरलेस तरीके से की जा रही है. बिहार सरकार की इस नई व्यवस्था से जमीन के निबंधन की प्रक्रिया पहले के मुकाबले आसान, पारदर्शी और सुरक्षित हुई है. अब जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले लोगों को भारी-भरकम कागजात और पुराने केबाला लेकर चलने की जरूरत नहीं होगी. डिजिटल माध्यम से जमीन से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी. इससे जमीन के फर्जीवाड़े और एक ही जमीन की दोबारा बिक्री जैसे मामलों पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी.
पूर्णिया के जिला अवर निबंधक उमाशंकर मिश्र ने बताया कि पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था का उद्देश्य निबंधन प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ इसे अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है. पहले जमीन की रजिस्ट्री के दौरान लोगों को कई तरह के कागजात संभालकर रखने पड़ते थे. अब डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए संबंधित जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सकती है.
फर्जीवाड़े पर लगेगा अंकुश
पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा जमीन की खरीद-बिक्री में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकना है. कई मामलों में एक ही जमीन को अलग-अलग लोगों के नाम पर बेचने की शिकायत सामने आती रही है. डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन सत्यापन की व्यवस्था से ऐसे मामलों की पहचान करने और उन्हें रोकने में मदद मिलेगी.
आधार से खरीदार-विक्रेता का सत्यापन
नई व्यवस्था के तहत जमीन की रजिस्ट्री के दौरान खरीदार और विक्रेता दोनों का आधार आधारित सत्यापन किया जाता है. इसके बाद गवाहों का भी सत्यापन किया जाता है. आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद निबंधन की डिजिटल कॉपी तैयार की जाती है. निबंधन कार्यालय की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली ई-कॉपी पीडीएफ प्रारूप में होती है. इसमें क्यूआर कोड भी अंकित रहता है. यह डिजिटल दस्तावेज खरीदार पक्ष को उपलब्ध कराया जाता है. जिससे भविष्य में दस्तावेज की सत्यता की जांच करना आसान हो जाता है.
शुरुआत में लोगों के मन में था भ्रम
जिला अवर निबंधक उमाशंकर मिश्र के अनुसार, पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने के शुरुआती दौर में लोगों के मन में इसे लेकर कुछ भ्रम और आशंकाएं थीं. लोगों को लग रहा था कि कागजी दस्तावेज नहीं होने से भविष्य में परेशानी हो सकती है. हालांकि, लगातार जागरूकता और डिजिटल व्यवस्था की जानकारी मिलने के बाद लोगों का भरोसा बढ़ा है. उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि जमीन की खरीद-बिक्री और निबंधन के दौरान पेपरलेस व्यवस्था का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें. डिजिटल रिकॉर्ड, आधार सत्यापन और क्यूआर कोड जैसी सुविधाओं से रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाया गया है. इससे न केवल समय और कागज की बचत होगी, बल्कि जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े की संभावना को भी कम किया जा सकेगा.
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अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …
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