भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

nepal tragedy | नेपाल त्रासदी : जहां गूंजती थी 1600 बच्चों की...


होमताजा खबरदेश

जहां गूंजती थी 1600 बच्चों की किलकारियां, वहां अब त्रिशूली की भयावह खामोशी

Last Updated:

Nepal Flash Floods : त्रिशूली नदी के उफान ने नेपाल में सब कुछ तिनके की तरह बहा दिया. स्थानीय नागरिक सुरेंद्र कुमार की आंखों के सामने जहां कभी तीन मंजिला स्कूल और राम मंदिर था, वहां अब केवल मलबा और सन्नाटा है. पढ़िए तबाही, दर्द और शिक्षकों के उस साहस की दिल दहला देने वाली दास्तान.

जहां गूंजती थी 1600 बच्चों की किलकारियां, वहां अब त्रिशूली की भयावह खामोशीZoom

नेपाल त्रासदी को लेकर चश्मदीद ने बयां किया दर्द.

त्रिशूली घाटी. प्रकृति जब अपने सबसे उग्र रूप में आती है, तो इंसानी वजूद के बड़े-बड़े दावों को पल भर में ताश के पत्तों की तरह बिखेर देती है. नेपाल की शांत वादियों में बहने वाली त्रिशूली नदी ने हाल ही में तबाही का जो तांडव रचा है, उसकी टीस सदियों तक महसूस की जाएगी. जहां कल तक जिंदगी हंसती-खिलखिलाती थी, व्यापार की चहल-पहल थी और मंदिरों में घंटियां बजती थीं, आज वहां सिर्फ चीखें, गदला पानी और कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा पसरा हुआ है. इस भीषण प्राकृतिक आपदा के प्रत्यक्षदर्शी सुरेंद्र कुमार की आंखें उस खौफनाक मंजर को याद कर आज भी पथरा जाती हैं. बहते हुए पानी के रुख की ओर उंगली उठाकर सुरेंद्र जब उस जगह की पहचान कराते हैं, तो सुनने वाले का कलेजा कांप उठता है.

जहां तीन मंजिला स्कूल था, वहां अब सिर्फ खालीपन है…

सुरेंद्र बताते हैं, ‘यहां एक तीन मंजिला भव्य इमारत हुआ करती थी, जो हमारा स्कूल था. ठीक सामने भगवान राम का पावन मंदिर था. यह पूरा इलाका एक गुलजार बाजार था, जहां सुबह से शाम तक रौनक रहती थी. लेकिन उस एक खौफनाक दिन त्रिशूली के उफान ने सब कुछ निगल लिया. अब उस तीन मंजिला इमारत और मंदिर का नामोनिशान तक नहीं बचा है. नदी अपने साथ न सिर्फ दीवारें बहा ले गई, बल्कि इस शहर की आत्मा को भी बहा ले गई.’

1600 मासूमों की जिंदगी बचाने वाला वो चमत्कार

इस असीम त्रासदी के बीच अगर कुछ राहत देने वाली बात रही, तो वो था उस स्कूल के शिक्षकों का अदम्य साहस और समझदारी. जब त्रिशूली नदी का जलस्तर विकराल रूप ले रहा था और मौत दरवाजे पर दस्तक दे रही थी, तब शिक्षकों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मुस्तैदी दिखाई. स्कूल में उस वक्त 1600 छात्र मौजूद थे. शिक्षकों ने पलक झपकते ही एक-एक बच्चे को सुरक्षित स्थानों की ओर निकाला और बाढ़ के तांडव के बीच से बाहर खींच लाए.





Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top