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Animal Husbandry Tips: छपरा के किसान मुरारी सिंह ने नेपियर घास उगाकर पशुओं के चारे का खर्च बचाया है. इससे उनकी गायों का स्वास्थ्य सुधरा और दूध उत्पादन भी बढ़ा. यह घास सालभर हरा चारा उपलब्ध कराती है, जिससे पशुपालकों की लागत कम होती है. जानें इसके फायदे.
छपरा: किसान अब पारंपरिक और नकदी फसलों के साथ पशुपालन को भी फायदे का सौदा बनाने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं. इसी कड़ी में छपरा के गरखा प्रखंड के मिठेपुर गांव निवासी विष्णु प्रकाश सिंह उर्फ मुरारी सिंह ने अपने मवेशियों के लिए नेपियर घास की खेती शुरू की है. इससे उन्हें सालभर हरा चारा उपलब्ध हो रहा है और चारे पर होने वाले खर्च में भी बचत हो रही है. बता दें कि मुरारी सिंह गिर नस्ल की आधा दर्जन से अधिक गायों का पालन करते हैं. उनका कहना है कि अच्छे पशुपालन के लिए गुणवत्तापूर्ण चारा बेहद जरूरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर खेत में नेपियर घास लगाई.
दूध के उत्पादन में हुई बढ़ोतरी
पिछले करीब पांच वर्षों से वह अपनी गायों को नियमित रूप से नेपियर घास खिला रहे हैं. उनके मुताबिक, इस घास को पशुओं के आहार में शामिल करने के बाद मवेशियों के स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिला और दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई.
गन्ने की तरह उगाएं नेपियर घास
मुरारी सिंह ने बताया कि नेपियर घास को खेत में गन्ने की तरह लगाया जा सकता है. इसकी खासियत यह है कि एक बार लगाने के बाद लंबे समय तक हरे चारे के रूप में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. किसान जरूरत के अनुसार इसकी कटाई कर पशुओं को खिला सकते हैं. नेपियर घास किसी भी तरह के मवेशियों को खिलाई जा सकती है. यह पशुओं के लिए पौष्टिक हरे चारे का अच्छा विकल्प है. इससे पशुओं को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और उनके स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद मिलती है.
सालभर मिलेगा हरा चारा
किसान के मुताबिक नेपियर घास की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे पशुओं के लिए सालभर हरे चारे की व्यवस्था की जा सकती है. बाजार से लगातार चारा खरीदने की जरूरत कम हो जाती है, जिससे पशुपालकों का खर्च भी बचता है. मुरारी सिंह बताते हैं कि पशुपालक यदि अपने खेत में नेपियर घास की खेती करें तो उन्हें मवेशियों के चारे के लिए बाहरी स्रोतों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा. इससे पशुपालन की लागत घटाने में मदद मिल सकती है.
दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद का दावा
मुरारी सिंह के अनुसार नेपियर घास खिलाने से उनकी दुधारू गायों के दूध उत्पादन में वृद्धि हुई है. उनका मानना है कि पौष्टिक हरा चारा पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों के लिए फायदेमंद है. छपरा के मिठेपुर गांव के इस किसान का अनुभव दूसरे पशुपालकों के लिए भी उपयोगी हो सकता है. हालांकि, दूध उत्पादन में वास्तविक बढ़ोतरी पशु की नस्ल, आहार, स्वास्थ्य और देखभाल समेत कई कारकों पर निर्भर करती है. ऐसे में पशुपालकों को अपने क्षेत्र के कृषि या पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार नेपियर घास को पशुओं के आहार में शामिल करना चाहिए.
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अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …
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