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नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ की वजह से रसुवा में दो विशालकाय कृत्रिम झीलें बन गई हैं. इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर द्वारा जारी सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि रसुवा जिले के लांगतांग लिरुंग इलाके में भीषण आइस रॉक एवलांच के मलबे ने नदी का रास्ता रोक दिया. इस रुकावट से वहां 19 हेक्टेयर और 11 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाली दो विशाल कृत्रिम झीलें बन गई हैं, जिनमें से एक की लंबाई करीब एक किलोमीटर तक दर्ज की गई है.
नेपाल के रसुवा में आई बाढ़ के बाद वहां दो बड़ी-बड़ी झीलें बन गई हैं.
नई दिल्ली: नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के पीछे सिर्फ भारी बारिश या हिमस्खलन (एवलांच) ही वजह नहीं था, बल्कि पहाड़ों से आए मलबे ने नदियों का रास्ता रोककर विशाल जलभराव पैदा कर दिया. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र (NRSC) की सैटेलाइट तस्वीरों से नेपाल के रसुवा इलाके में ऐसी ही दो बड़ी कृत्रिम झीलों के बनने का खुलासा हुआ है. ISRO/NRSC के सैटेलाइट विश्लेषण के मुताबिक, लागतंग लिरुंग पर्वत श्रृंखला में हुए भीषण Ice Rock Avalanche के बाद बड़ी मात्रा में मलबा नीचे आया. इस मलबे ने नदी के प्रवाह को बाधित किया, जिसके चलते रसुवा जिले में दो बड़े Water Impoundments यानी कृत्रिम जलाशय जैसे जलभराव बन गए.
सैटेलाइट तस्वीरों में इन दोनों जलभरावों का आकार काफी बड़ा दिखाई दिया है. एक झील का क्षेत्रफल करीब 19 हेक्टेयर, जबकि दूसरी का क्षेत्रफल लगभग 11 हेक्टेयर बताया गया है. इनमें से एक जलभराव की लंबाई करीब 944 मीटर, यानी लगभग एक किलोमीटर तक दर्ज की गई. इन झीलों की वजह से बिहार और उत्तर प्रदेश पर भी खतरा मंडराने लगा है. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि अगर ये झीलें टूटती हैं, तो इससे कोसी और गंडक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ेगा जिसका खामियाजा इन नदियों के किनारे बसे यूपी-बिहार के गांवों और शहरों को भुगतना होगा.
Cartosat-3 और Resourcesat-2A ने कैद की तबाही
ISRO के राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र ने Cartosat-3 MX और Resourcesat-2A से हासिल तस्वीरों का विश्लेषण कर बाढ़ के बाद बने जलभराव और मलबे के फैलाव का आकलन किया. तस्वीरों में लागतंग इलाके से लेकर निचले क्षेत्रों तक बाढ़ और मलबे के व्यापक प्रभाव दिखाई दिए. विश्लेषण में सामने आया कि हिमस्खलन से आया मलबा नदी के रास्ते में जमा होता गया. नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होने से पानी जमा हुआ और बाद में जब यह जलराशि आगे बढ़ी तो निचले इलाकों में फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति पैदा हुई.
मलबे ने बदला नदियों का रास्ता
सैटेलाइट तस्वीरों में लागतंग क्षेत्र में मलबे के कारण नदियों के प्रभावित होने के संकेत मिले हैं. बाढ़ के तेज बहाव ने इलाके में मौजूद बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया. रिपोर्ट के मुताबिक, त्रिशूली डैम और एक नया पुल भी बाढ़ की चपेट में आ गए. रसुवा से लेकर नुआकोट तक इस आपदा का असर दिखाई दिया. हिमस्खलन, मलबे से नदी का रास्ता रुकना और उसके बाद अचानक पानी के बहाव ने मिलकर हालात को और भयावह बना दिया.
कृत्रिम झीलों ने बढ़ाया खतरा
ISRO के विश्लेषण में सामने आई करीब 944 मीटर लंबी कृत्रिम झील खास तौर पर चिंता का विषय है. पहाड़ी इलाकों में मलबे के कारण इस तरह पानी का जमा होना भविष्य में अचानक जलभराव टूटने की स्थिति पैदा कर सकता है. ऐसी स्थिति में नीचे की ओर बसे इलाकों में पानी बेहद तेजी से पहुंच सकता है. नेपाल की इस त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर, हिमस्खलन, मलबे से नदी अवरोध और अचानक आने वाली बाढ़ के बढ़ते खतरे को सामने ला दिया है.
ISRO/NRSC का यह सैटेलाइट विश्लेषण इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति, नदी के प्रवाह में बदलाव और बने जलभराव का आकलन करने में मदद मिलती है. आने वाले समय में इन कृत्रिम झीलों और मलबे से बाधित जलधाराओं की निगरानी बेहद अहम मानी जा रही है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…
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