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Sushant Sinha Desh Ki Pathshala: मोदी-योगी का यूपी मॉडल Vs राहुल-अखिलेश का...


एक तरफ देश में GenZ वाली राजनीति का शोर मचा हुआ है. दूसरी तरफ आप ये भी देखिए कि जाति के मुद्दे पर घमासान शुरू हो गया है. यूपी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. और हर मामले में जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश की जा रही है. यूपी में अंकित बालियान मर्डर केस में भी जाति खोजी जा रही है. हत्या के आरोपियों का एनकाउंटर हो तो उस पर सवाल उठाए जा रहे हैं. अखिलेश यादव की पार्टी ने पहले अंकित बालियान की मौत पर जाति वाला नैरेटिव सेट करने की कोशिश की. योगी सरकार पर निशाना साधा. लेकिन जब योगी की पुलिस ने आरोपियों का एनकाउंटर कर दिया तो अखिलेश यादव एनकाउंटर पर ही सवाल उठा रहे हैं.

उधर राहुल गांधी ने अलग ही मोर्चा खोला हुआ है. मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद शुद्धिकरण के मुद्दे को राहुल गांधी हवा दे रहे हैं. शुद्धिकरण वाले मामले में नए नए खुलासे हो रहे हैं, जिस से राहुल गांधी के दावों पर सवाल उठ रहे हैं. और अब तो राहुल गांधी के खिलाफ ही FIR दर्ज हो गई है. इस पर कांग्रेस भड़की हुई है. कह रही है कि दलित के अपमान की बात करने पर राहुल गांधी को निशाना बनाया जा रहा है.

राहुल गांधी अलग ही स्टाइल में राजनीति कर रहे हैं. दलितों के साथ भेदभाव के लिए कभी शुद्धिकरण का मुद्दा उठाते हैं, तो कभी दलितों को कागज के कप में चाय देने का आरोप लगाते हैं. कुल मिलाकर किसी भी तरह से दलित राजनीति में फिर से पैठ जमाना है. वहीं इधर जाति और आरक्षण के मुद्दे पर NDA के दो मंत्री आपस में ही भिड़ गए हैं. दोनों एक दूसरे से इस्तीफा मांग रहे हैं. यानी जाति से लेकर आरक्षण के मुद्दे तक गजब का राजनीतिक हंगामा मचा हुआ है.

अंकित बालियान केस में जाति एंगल

आप ये भी देखिए कि एक तरफ अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी जाति को लेकर राजनीति कर रहे हैं. तो दूसरी तरफ अंकित बालियान का परिवार पुलिस के एक्शन से संतुष्ट है. अंकित बालियान के परिवार ने आरोपियों के एनकाउंटर की मांग की थी. अब एनकाउंटर के बाद अंकित की पत्नी और बहन ने कहा है कि पुलिस प्रशासन अच्छा काम कर रहा है. दो आरोपियों के एनकाउंटर से वो संतुष्ट हैं. लेकिन अभी काम पूरा नहीं हुआ है. बाकि के आरोपियों को भी सजा मिलनी चाहिए.

अंकित बालियान की हत्या के फौरन बाद ही पुलिस एक्टिव हो गई थी. पुलिस और एसटीएफ साथ मिल कर काम कर रहे थे. पुलिस को इस बात की आशंका थी कि अंकित के हत्यारे यूपी के नहीं बल्कि बाहर से आए थे. पुलिस ने वारदात के बाद इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए.

आरोपियों की तलाश के लिए 7 जिलों की 8 पुलिस टीमें लगाई गई थीं. अंकित की हत्या में 6 लोगों की भूमिका सामने आई है, जिसमें 4 शूटर थे और दो आरोपियों ने अंकित की रेकी की थी. पुलिस के मुताबिक, दो शूटर 20 अगस्त को शामली आ गए थे. दोनों शामली के एक होटल में कमरा लेकर ठहरे हुए थे. इसी होटल के सीसीटीवी फुटेज से शूटर्स की पहचान मोहित और सुमित के रूप में हुई थी. 26 अगस्त को अंकित की हत्या के बाद दो शूटर करनाल की तरफ भागे थे, जबकि मोहित और सुमित बागपत की तरफ फरार हुए थे.

शूटर्स तक कैसे पहुंची पुलिस

पुलिस ने मोहित और सुमित को ट्रैक करना शुरू किया. सोमवार को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दोनों को घेर लिया. पुलिस के मुताबिक दोनों शूटर सोनीपत की तरफ भाग रहे थे. पकड़े जाने के डर से दोनों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी.पुलिस की जवाबी फायरिंग में दोनों आरोपी मारे गए. इस एनकाउंटर में दो पुलिस वालों के भी घायल होने की खबर है. अंकित बालियान मर्डर केस में अब चार आरोपी फरार हैं और उनकी भी तलाश चल रही है. फरार आरोपियों की पहचान सत्यम और आर्यन के तौर पर हुई है.

एनकाउंटर पर अखिलेश के सवाल

अंकित की हत्या के आरोपियों के एनकाउंटर के बाद अब समाजवादी पार्टी के सुर बदले हुए हैं. अभी तक अंकित की जाति को लेकर राजनीति कर रही समाजवादी पार्टी अब एनकाउंटर पर ही सवाल खड़ा कर रही है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, ‘अपराधी सरकार को पता है, फिर भी अपराध हो रहा है. अपराध होगा क्यों नहीं? अगर सरकार की बात को सही मानें, तो क्या सही लोगों का एनकाउंटर हुआ है? उनके पिता ने कहा, अभी पूरा न्याय नहीं मिला है. ये जांच का विषय है.’ इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘फेक एनकाउंटर में तो जाति को देख कर एनकाउंटर हुए हैं, आने वाले समय में सरकार बनेगी इन सबकी जांच होगी.’

वहीं सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने पार्टी सुप्रीमो की सुर में सुर मिलाते हुए कहा, ‘किन स्थितियों में एनकाउंटर हुआ है, ये जांच का विषय है. उच्चस्तरीय जांच की जाए. वो ठीक है, इसके लिए जो भी दोषी होते हैं, कितने बड़े-बड़े जुर्म हैं, उनके लिए IPC, CRPC और न्यायपालिका को पूरा अधिकार है, इवन सजा-ए-मौत का प्रावधान है. तो ये सारी चीजों की व्यवस्था है. अब कौन-सी स्थिति उत्पन्न हो गई थी?’

बीजेपी ने किया पलटवार

इधर बीजेपी ने अखिलेश की जाति वाली राजनीति और एनकाउंटर पर सवाल उठाने पर पलटवार किया है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि अखिलेश को किसी भी संस्था पर भरोसा नहीं रह गया है. ये सिर्फ आरोप लगाते रहते हैं. पंकज चौधरी ने कहा, ‘देखिए विपक्ष हो, चाहे अखिलेश यादव जी हों, इन लोगों को किसी भी संस्था पर कोई विश्वास नहीं रह गया है. जब इनके समय में ये कोई हमारा बनाया हुआ नहीं है, पहले से चलता चला आ रहा है. निश्चित तौर से केवल आरोप लगाने का काम है.’

यूपी में पिछले दो चुनाव से अखिलेश यादव लगातार हार रहे हैं. 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव हर पैंतरा आजमा रहे हैं. पीडीए का नारा दे रहे हैं, तो जाति वाली राजनीति भी कर रहे हैं. अखिलेश यादव के नेता तो कह रहे हैं कि 27 का चुनाव जीवन मरण का चुनाव होगा. इसलिए अगर अखिलेश यादव किसी कुत्ते के गले में घंटी बांध कर भेज दें तो उसी को वोट देना है.

लाल बिहारी यादव ने कहा, ‘कुत्ते के गले में घंटी बांध कर भेज दें तो वोट उसी को देना है. क्योंकि उसी से आपकी समस्या का समाधान होना है. व्यक्ति की बात छोड़ दीजिए, व्यक्ति तो बहुत महान होता है. इसलिए मैं आपसे कहना चाहता हूं कि साथियों 2027 का चुनाव आपके जीवन और मरण का चुनाव होगा.’

राहुल गांधी की जाति वाली राजनीति

इधर अखिलेश यादव जाति कार्ड खेल रहे हैं तो उधर राहुल गांधी भी जाति वाली राजनीति पर खेल रहे हैं. राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कथित अपमान के मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और ये आरोप लगाए कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में खड़गे की रैली के बाद मैदान का शुद्धिकरण किया गया था. राहुल गांधी ने इस पर एफआईआर की मांग की. राहुल गांधी ने कहा, ‘हम कोई असंभव चीज़ नहीं मांग रहे हैं. संविधान के मुताबिक अपराध किया गया है. छुआछूत एक अपराध है. यह छुआछूत है. हम कांग्रेस अध्यक्ष के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं. हम इससे ज्यादा कुछ नहीं कह रहे हैं. हम कह रहे हैं उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष को न्याय दिया जाए.’

लेकिन इस मामले में नया खुलासा हो गया है. राहुल गांधी के आरोपों को गलत बताते हुए दो लोगों ने राहुल के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज करा दी है. 29 अगस्त को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके शुद्धिकरण को दलितों के अपमान से जोड़ा था. और 30 अगस्त को राहुल गांधी के खिलाफ ही FIR हो गई.

शुद्धिकरण कराने वाली श्री राम सेना धर्माथ सेवा न्यास ने राहुल के आरोपों को गलत बताया है. श्रीराम सेना का कहना है कि ‘मंच पर शराब की बोतले, गंदगी और कचरा फैला हुआ था. ये मामला जाति से नहीं बल्कि साफ सफाई और गंदगी से जुड़ा हुआ है. रामलीला मैदान में रामलीला होती है इसलिए सफाई के बाद पूजा की गई थी. राहुल गांधी ने इस मामले को अलग ही रंग दे दिया है. शुद्धिकरण में दलित समाज के लोग भी शामिल थे और इस आयोजन का बीजेपी या संघ से कोई संबंध नहीं है.’

शुद्धिकरण मामले में एफआईआर

रामलीला मैदान में साफ सफाई और शुद्धिकरण में शामिल दलित युवकों ने भी राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है. आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने आधी-अधूरी जानकारी और तथ्यों को तोड़मरोड़कर पेश किया, जिससे उनकी भावनाएं आहत हुईं. शिकायतकर्ता अमित कुमार का कहना है कि, ‘वहां पर ज्यादा गंदगी थी, ठीक है. वहां गंदगी इतनी थी कि वहां यूरिन रखा था बोतलों में और बोतलें बड़ी थीं बीयर की, दारू की. वहां गुटखा के निशान थे, मांस पड़ा था, तो उसके लिए हमने वहां सफाई अभियान कराया था.’

वहीं दूसरे शिकायतकर्ता विनोद आर्य कहते हैं, ‘ये जो मैसेज जा रहा है कि दलित हैं, ये गलत जा रहा है, क्योंकि हम खुद दलित हैं और हमने वहां खुद पूजा-पाठ करी और हमने कोई गलत नारे नहीं लगाए, किसी के लिए गलत नहीं बोला, हमने सिर्फ पूजा-पाठ करी वहां.’

कौन सी धाराएं-कितनी सजा?

राहुल गांधी आयोजकों पर एक्शन की मांग कर रहे थे. अब खुद राहुल गांधी पर एफआईआर हो गई है. राहुल गांधी पर एससी-एसटी एक्ट भी लगाया गया है. आप देखिए राहुल के खिलाफ कौन सी धाराएं लगी हैं और उस में क्या प्रावधान है.

BNS की धारा 196 – जाति धर्म या समुदायों के बीच दुश्मनी नफरत बढ़ाना. 3 साल तक जेल या जुर्माना या दोनों.
BNS की धारा 299- जानबूझकर धार्मिक भावनाओं का अपमान करना 3 साल तक जेल या जुर्माना या दोनों
SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(q) सरकारी अधिकारी को झूठी जानकारी देकर SC/ST व्यक्ति को परेशान करवाना 6 महीने से 5 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों

राहुल गांधी के खिलाफ FIR होने के बाद कांग्रेस भड़की हुई है. कांग्रेस लगातार प्रोटेस्ट कर रही है. उत्तराखंड में कांग्रेस ने एक्शन की मांग को लेकर प्रदर्शन किा औऱ नारेबाजी की. कर्नाटक में भी कांग्रेस कार्यकर्तओं ने खड़गे के अपमान पर प्रोटेस्ट किया. मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक से ही आते हैं. हल्द्वानी में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ एक्शन की मांग की है.

हल्द्वानी में तो कांग्रेस नेताओं ने कोतवाली पुलिस थाने में जाकर FIR दर्ज कराने की मांग की. पुलिस के साथ काफी देर तक कांग्रेस नेताओं की बहस होती रही. कांग्रेस का कहना है कि राहुल के खिलाफ तो केस दर्ज हो गया, लेकिन शुद्धिकरण करने वालों पर एक्शन नहीं हो रहा है.

कुमारी शैलजा ने इसे लेकर कहा, ‘जिस प्रकार से कांग्रेस अध्यक्ष के साथ हुआ और ‘सो-कॉल्ड’ शुद्धिकरण का मामला उन्होंने किया. आपने अनुमति कैसे दी?, क्या मतलब था आपका? क्या आप सरोकार रखते हैं ऐसी सोच से? पहले तो वो बताएं. अगर राहुल जी ने ये बात उठाई है तो ये तो ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ क्या मतलब है राहुल जी के खिलाफ FIR करने का?’



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