नई दिल्ली: बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के बीच डर, धमकी और असुरक्षा का माहौल बढ़ता जा रहा है. बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट की चर्चित वकील और हिंदू अधिकार कार्यकर्ता चैताली चक्रवर्ती ने कहा कि लगातार हिंसा और संस्थागत कमजोरी के कारण बड़ी संख्या में बांग्लादेश हिंदू-विहीन हो जाएगा, ऐसा दवा किया है.
चैताली चक्रवर्ती ने कहा कि असुरक्षा सिर्फ हिंदू समुदाय तक सीमित नहीं है. देश के आम नागरिक भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. हालांकि, हिंदुओं के सामने उनकी धार्मिक पहचान के कारण अतिरिक्त परेशानी है. अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए सार्वजनिक रूप से आवाज उठाने वाले लोगों को भी डराने-धमकाने का सामना करना पड़ सकता है.
उन्होंने कहा, “5 अगस्त से आज तक हम वास्तव में अस्थिर माहौल में हैं और हमारे पास कोई सुरक्षा नहीं है”. यह बयान बांग्लादेश में सांप्रदायिक हिंसा, अल्पसंख्यकों पर हमलों और कानून-व्यवस्था को लेकर चल रही अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बीच आया है.
‘सच बोलना खतरनाक हो गया है’
चैताली चक्रवर्ती ने कहा कि हिंदू समुदाय के लिए चुप रहना भी सुरक्षा की गारंटी नहीं है. वहीं, भेदभाव, हिंसा और मानवाधिकार से जुड़े मामलों पर सार्वजनिक रूप से बोलने वालों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. उन्होंने अपने साथ हुई परेशानियों और धमकियों के बारे में भी बात की.
चैताली चक्रवर्ती के अनुसार, उनका बैंक अकाउंट और उनके परिवार के कई सदस्यों के बैंक अकाउंट फ्रीज किए गए हैं या उन पर ऐसी पाबंदियां लगाई गई हैं, जिससे वे लेन-देन नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक कोई औपचारिक लिखित जानकारी नहीं मिली है, जिसमें इन पाबंदियों का कानूनी आधार बताया गया हो.
उन्होंने बताया कि वह कानूनी काम के जरिए अपनी आजीविका चलाती हैं और उन्हें किसी ऐसे गलत काम की जानकारी नहीं है, जिसके कारण उनके पैसों तक पहुंच रोकी जाए. उन्होंने इसे गंभीर आर्थिक समस्या बताया और कहा कि अगर स्थिति जारी रही तो वह कानूनी कदम उठाने पर विचार कर रही हैं.
चैताली चक्रवर्ती ने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें अभी तक बैंक खातों पर लगी पाबंदियों को लेकर कोई औपचारिक आदेश नहीं मिला है.
फोन पर अश्लील कॉल और गाली-गलौज
बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट की चर्चित वकील चैताली चक्रवर्ती ने मोबाइल फोन के जरिए लगातार परेशान किए जाने की बात भी कही. उनके अनुसार, उन्हें बार-बार फोन किए जाते थे और अश्लील भाषा के साथ गाली-गलौज की जाती थी. कॉल लगातार आने के कारण उन्होंने कई वर्षों से इस्तेमाल किए जा रहे अपने SIM कार्ड को बंद कर दिया.
उन्होंने कहा कि इसका असर उनके कानूनी काम पर भी पड़ा, क्योंकि उनके क्लाइंट और अन्य लोग इसी नंबर पर उनसे संपर्क करते थे. इंटरव्यू में फोन उत्पीड़न की शिकायत पुलिस या साइबर क्राइम अधिकारियों से नहीं किये जाने पर कहा कि “उन्होंने फोन पर हो रहे उत्पीड़न को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई, उन्होंने बताया कि लगातार गाली-गलौज के कारण उन्होंने फोन बंद कर दिया था”.
रंगपुर में हिंदू परिवार की हत्या का मामला
रंगपुर में एक हिंदू परिवार के 4 सदस्यों की हत्या का मामला भी सामने आया. चैताली चक्रवर्ती ने बताया कि वह मानवाधिकार से जुड़े अपने काम के तहत इस मामले की जांच कर रही थीं. उन्होंने कहा कि डर के कारण स्थानीय लोग घटना के बारे में खुलकर बात नहीं कर रहे हैं. उनके मुताबिक, इलाके के लोग बदले की कार्रवाई के डर से जानकारी देने से बच रहे हैं.
उन्होंने कहा कि घटना की गंभीरता को देखते हुए इसकी पूरी और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. चैताली चक्रवर्ती ने यह भी कहा कि घटना जिस तरह हुई, उससे यह पता लगाना जरूरी है कि इसमें किसी संगठित या वैचारिक रूप से प्रेरित लोगों की भूमिका थी या नहीं. इन बातों की स्वतंत्र जांच के जरिए पुष्टि होना बाकी है.
‘कमजोर पुलिस आम लोगों को सुरक्षा नहीं दे सकती’
चैताली चक्रवर्ती ने बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था और सरकारी संस्थाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर पुलिस प्रशासन खुद कमजोर स्थिति में है तो वह आम नागरिकों को प्रभावी सुरक्षा नहीं दे सकता.
उन्होंने कहा, “अगर प्रशासन मजबूत होता, तो सभी समस्याएं हल हो गई होतीं”. ‘एक दशक में बांग्लादेश में हिंदू नहीं बचेंगे?’
चैताली चक्रवर्ती ने हिंदू आबादी को लेकर सबसे गंभीर चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर हिंसा, डर और भेदभाव को नहीं रोका गया तो आने वाले समय में बांग्लादेश की हिंदू आबादी में बड़ी गिरावट आ सकती है.
उनके मुताबिक, लगातार असुरक्षा के कारण लोगों के सामने अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़ने या असुरक्षित माहौल में रहने के बीच चुनाव की स्थिति पैदा हो सकती है. उन्होंने कहा कि अगर मौजूदा स्थिति जारी रही तो एक दशक के भीतर बांग्लादेश लगभग हिंदू-विहीन हो सकता है.
हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि हिंदू बांग्लादेश छोड़ना नहीं चाहते, उन्होंने कहा कि यह उनका मातृभूमि है और उनके पिता, दादा और परिवार के कई सदस्य इसी देश में पैदा हुए हैं. उनका कहना है कि जरूरत हिंदुओं के पलायन की नहीं, बल्कि बराबरी के अधिकार और सुरक्षा की है.
‘यह बांग्लादेश सभी का है’
चैताली चक्रवर्ती ने बांग्लादेश में हिंदू-मुस्लिम साथ रहने की पुरानी परंपरा का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि एक समय हिंदू और मुस्लिम एक-दूसरे के धार्मिक त्योहारों में शामिल होते थे. मुस्लिम हिंदुओं के धार्मिक कार्यक्रमों में जाते थे और हिंदू मुस्लिम त्योहारों में हिस्सा लेते थे.
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने, धार्मिक त्योहार मनाने और राजनीतिक जीवन में स्वतंत्र रूप से हिस्सा लेने का अधिकार मिलना चाहिए. उन्होंने कहा, “यह बांग्लादेश हिंदुओं, मुसलमानों, ईसाइयों और बौद्धों सभी का है”.
चैताली चक्रवर्ती ने 1971 के मुक्ति संग्राम का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि हिंदुओं ने बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और उन्हें कभी बाहरी लोगों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने अपने परिवार के उन सदस्यों का भी जिक्र किया जिन्होंने मुक्ति संग्राम में हिस्सा लिया था. उनके मुताबिक, हिंदू स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान भी बांग्लादेश के राष्ट्रीय इतिहास का हिस्सा है. उनका संदेश था कि बांग्लादेश का भविष्य किसी भी धार्मिक समुदाय को बाहर करके नहीं बनाया जा सकता.
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ध्यान देने की अपील
चैताली चक्रवर्ती ने बांग्लादेश के भीतर के मुद्दे से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले पर ध्यान देने की अपील की. उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के सांसदों और नीति निर्माताओं से बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ उत्पीड़न और डराने-धमकाने के मामलों को उठाने की अपील की.
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की सरकार पर अल्पसंख्यक नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाया जाना चाहिए. इंटरव्यू में 5 अगस्त 2024 के बाद बांग्लादेशी समाज की दिशा को लेकर भी चिंता जताई गई. धार्मिक डराने-धमकाने, सांप्रदायिक हमलों और संस्थागत कमजोरी से जुड़े मुद्दे देश की राजनीतिक स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बने हैं.
हिंदुओं के पलायन के पक्ष में नहीं हैं चैताली
चैताली चक्रवर्ती ने साफ किया कि उनकी मांग हिंदुओं के बांग्लादेश छोड़ने की नहीं है. उनके मुताबिक, समाधान यह है कि हिंदुओं को सुरक्षा दी जाए और उन्हें अपने देश में बराबरी के साथ रहने का अधिकार मिले. उन्होंने ऐसे बांग्लादेश की बात की, जहां किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान उसकी सुरक्षा, न्याय तक पहुंच, आर्थिक अधिकार या सार्वजनिक जीवन में भागीदारी तय न करे.
उन्होंने कहा, “हम ऐसा बांग्लादेश चाहते हैं जो सभी का हो-हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और बौद्ध, सभी का अपना धर्म और अपने त्योहार हैं. हम इसी तरह रहना चाहते हैं”
इंटरव्यू के अंत में भी उनका संदेश पलायन, बंटवारे या अलगाव का नहीं, बल्कि साथ रहने का था.
यह सवाल अब बांग्लादेश की सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने है कि क्या देश अपने हिंदू नागरिकों को उसी सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता के साथ अपने पुश्तैनी घर में रहने की गारंटी दे सकता है, जो दूसरे धर्मों के नागरिकों को मिलती है.
स्वतंत्र जांच जरूरी
इंटरव्यू में हमलों, धमकियों, बैंक खातों पर पाबंदी और हिंसा की अलग-अलग घटनाओं से जुड़ी बातें सामने आईं. इनकी सक्षम अधिकारियों द्वारा स्वतंत्र जांच और पुष्टि जरूरी है.
हालांकि, चैताली चक्रवर्ती की बातचीत बांग्लादेश के एक हिंदू अधिकार कार्यकर्ता के तौर पर उनके द्वारा महसूस किए जा रहे डर और असुरक्षा की तस्वीर पेश करती है. इससे धार्मिक सह-अस्तित्व और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल भी उठता है.
चैताली चक्रवर्ती का संदेश स्पष्ट है, बांग्लादेश ऐसा देश बना रहे जहां हर नागरिक, चाहे उसका धर्म कुछ भी हो, सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता के साथ अपने पुश्तैनी घर में रह सके.