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Punjab Assembly Election 2027 : पंजाब चुनाव 2027 से पहले बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के दोबारा एक साथ आने की अटकलों पर नए प्रभारी सतीश पूनिया ने विराम लगा दिया है. पूनिया ने स्पष्ट किया कि बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व का सीधा संदेश लेकर आई है कि पार्टी राज्य की सभी 117 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी. इस बयान के बाद क्या पंजाब चुनाव 2027 में अकाली दल और बीजेपी में गठबंधन नहीं होगा?
पंजाब चुनाव 2027 में अकाली दल-बीेजेपी में गठबंधन पर लगा ग्रहण.
चंडीगढ़. पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचलों का दौर शुरू हो गया है. पिछले कुछ दिनों से मीडिया गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि भारतीय जनता पार्टी और उसका पुराना सहयोगी शिरोमणि अकाली दल एक बार फिर साथ आ सकते हैं. लेकिन पंजाब बीजेपी के नए संगठनात्मक प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव सतीश पूनिया ने स्पष्ट और बेबाक बयान देकर इन सभी अटकलों पर पूरी तरह पूर्णविराम लगा दिया है. चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूनिया ने दो टूक कहा, ‘मैं इस बात को फिर दोहरा रहा हूं, यह आपको बोरिंग लग सकता है, लेकिन बीजेपी अपने दम और क्षमता पर पंजाब की सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ेगी’. सतीश पूनिया के इस बयान के क्या मायने हैं? क्या पंजाब चुनाव 2027 में सुखबीर बादल से बीजेपी की बात नहीं बन पाई?
सतीश पूनिया का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब बीजेपी के भीतर ही दो अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे थे. पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ जैसे वरिष्ठ नेता अकाली दल के साथ दोबारा गठबंधन की वकालत कर रहे थे, ताकि पंथिक और हिंदू वोटों को एकजुट किया जा सके. वहीं, अकाली दल के नेताओं की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकातों ने भी गठबंधन की अफवाहों को हवा दी थी. संसद के शीतकालीन सत्र के बीच पीएम मोदी और अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल में मुलाकात हुई थी. बीते दिनों बादल पर हमले के बाद पीएम मोदी ने उनका हालचाल जाना था. लेकिन, बीजेपी के नए प्रभारी ने 117 सीटों पर चुनाव लड़ने वाला बयान देकर गठबंधन पर पूर्णविराम लगा दिया है.
सतीश पूनिया के बयान के क्या हैं सियासी मायने?
पूनिया ने स्पष्ट किया कि वे दिल्ली से आलाकमान का डायरेक्ट मैसेज लेकर आए हैं. नेताओं की प्रधानमंत्री से मुलाकात का मतलब राजनीतिक गठबंधन नहीं होता. 2020 में तीन कृषि कानूनों के मुद्दे पर अकाली दल से नाता टूटने से पहले बीजेपी पंजाब में ‘छोटे भाई’ की भूमिका में 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी. अब बीजेपी पंजाब में खुद को मुख्य राष्ट्रीय विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहती है न कि किसी के क्षेत्रीय छत्रछाया में. अकेले चुनाव लड़ने के ऐलान से बीजेपी के जमीनी कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश मिला है कि उन्हें सभी 117 सीटों पर अपना आधार मजबूत करना है.
VIDEO | Chandigarh: “I am repeating that thing again. It may seem boring to you, but the BJP will contest elections in all 117 seats on its own strength and capability,” BJP’s in-charge for Punjab, Satish Poonia, told reporters.