जमशेदपुर: रेलवे विभाग की एक बड़ी लापरवाही और असंवेदनशीलता का मामला सामने आया है. यह घटना गीतांजलि एक्सप्रेस से जुड़ी है जहां मुंबई से हावड़ा जाने के दौरान कैंसर पीड़ित विनोद पासवान की सुबह 8 बजे ट्रेन में मौत हो गई. यात्रियों ने टीटी को इसकी जानकारी भी दे दी. इसके बाद भी रेलवे विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई. ट्रेन के बाकी यात्री मृतक विनोद पासवान के शव के साथ ही 12 घंटे तक ट्रेन में सफर करते रहे. थक हारकर यात्रियों ने रेलवे मंत्री को ट्वीट किया. रेलवे मंत्री को ट्वीट करने के 12 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद टाटानगर रेलवे स्टेशन में ट्रेन को रोकर शव को उतारा गया.
भारतीय रेलवे की लचर व्यवस्था और यात्रियों के प्रति लापरवाह रवैया फिर सामने आया, मुंबई से हावड़ा जा रही है गीतांजलि एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 12859 अपने निर्धारित समय से लगभग 12 घंटे देरी से चल रही थी, जब यात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल के निवासी 45 वर्षीय विनोद पासवान की चलती ट्रेन में सुबह मौत हो गई, वह कैंसर से पीड़ित थे, इस घटना के बाद यात्री मेडिकल और शौक उतारने की मांग कर रहे थे, लेकिन किसी तरह कोई शोध लेने नहीं आया, यात्रियों ने ट्रेन के कर्मचारी और TT को इसकी सूचना दी थी, बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, लोगों ने थक हारकर वीडियो बनाया और रेलवे मंत्री को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी, इसके बाद रेलवे विभाग के अधिकारी हड़कंप में आए, और आनंद आनंद में टाटानगर रेलवे स्टेशन रात को ट्रेन को रोक कर बोगी से उतारा गया, इसके बाद ट्रेन हावड़ा के लिए रवाना हुई, ट्रेन कि एम-1 बोगी मे सवाल यात्री की मौत के बाद सुबह 8 बजे TT को यात्रियों ने जानकारी दी थी, शव के साथ सैकड़ो यात्री ट्रेन में सवार होकर सफर करते रहे, ना तो पानी नहीं शौचालय में सफाई डरे से हमें यात्री सफर करते रहे, रेलवे मौजूद कर्मचारी और विभाग कुंभकर्णी नीद सोया रहा, तब जा कर जमशेदपुर के टाटानगर रेलवे स्टेशन करीब 8:30 में गीतांजलि एक्सप्रेस ट्रेन पहुंची, फिर स्टेशन पर मेडिकल टीम मौके पर पहुंच शव को उतारा गया, इस घटना के बाद रेलवे द्वारा किए गए कई दावों की पोल खोल दिखाई, और यात्रियों ने रेल के सुविधाओं पर सवाल खड़ा किया, एक तरफ गीतांजलि एक्सप्रेस 12 घंटे से भी अधिक लेट चल रही थी वहीं दूसरी तरफ यात्री शव के साथ सफर करते नजर आए.
इस घटना के बाद यात्री काफी डरे समय हुए थे, लोगों ने इस घटना को लेकर रेलवे विभाग पर कई सवाल खड़ा किया, जहां एक तरफ बंदे भारत और बुलेट ट्रेन की बात की जा रही है, दुनिया चांद पर जा चुकी है, और चलती ट्रेन से शव को उतारने में 12 घंटे लग रहे हैं, आखिर इतनी बड़ी लापरवाही क्यों की गई ऐसे जिम्मेवार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ऐसी ट्रेन की व्यवस्था होगी तो हम सफर कैसे करेंगे, क्या रेलवे विभाग ट्रेनों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है.
दूसरी तरफ इस घटना के बाद जमशेदपुर में राजनीतिक घमासान चढ़ गया, झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल सारंगी ने रेलवे मंत्रालय पर उठाए सवाल, उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि यह शर्मनाक है मिनिस्ट्री आफ रेलवे गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के लिए, रेलवे मंत्री कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं उन्होंने बिना नाम लिए जमशेदपुर संसद पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि पुरानी ट्रेनों को कभी बंद और फिर उसी को दोबारा चालू करके हरी झंडी दिखानें कि जगह व्यवस्था में सुधार कीजिए.
इस घटना में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष में केंद्र सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि ऐसी माननीय घटना पर तत्काल रेलवे मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए, रेलवे का किराया भरत जा रहा है दूसरी तरफ यात्रियों की सुविधा भगवान भरोसे हो रहा है, 12 से 15 घंटे ट्रेन लेट से चल रही है, दूसरी तरफ यात्री शव के साथ सफर कर रहे हैं, प्रधानमंत्री को ऐसे मामले पर गंभीरता लेनी चाहिए, आज मिडिल क्लास के लोग ट्रेनों में इसी तरह सफल करें, भाड़ा बढ़ते जा रहे हैं और सुविधा न के बराबर है, कोई ट्रेन समय पर नहीं चलती, सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है, जनता सब देख रही है.
वहीं भाजपा ने इस घटना की निंदा करते हुए, कहां की लापरवाह लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, रेलवे मंत्री को जैसे ही इसकी सूचना मिली तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया, मगर झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस जो सवाल खड़ा कर रहे हैं वह अपने गिरिबन में झाके, झारखंड सरकार झारखंड में फेल हो चुकी है, स्वास्थ्य विभाग वेंटिलेटर पर है, अपराधी घटनाएं चरण पर है, पहले झारखंड की व्यवस्था को देखें फिर किसी पर सवाल खड़ा करें.
हाल कि घटना को लेकर जहां एक तरफ हर एक व्यक्ति सवाल खड़ा कर रहा है मगर दूसरी तरफ क्या रेलवे इस मामले को गंभीरता से लगा, जो लापरवाह लोग है उसे पर कार्रवाई होगी, आखिर क्यों घंटे घंटे ट्रेन लेख चल रही है, कभी किसी ट्रेन में पानी नहीं तो कभी खाने में चल जाता आंखें प्रेम की व्यवस्था क्यों देनी होते जा रही है, ट्रेनों में भाड़े तो भाई जा रहे हैं मगर याद क्यों की सुविधा कम होते जा रही है.