![]()
हजारीबाग के हुरहुरू स्थित खासमहल जमीन विवाद में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कैंटोनमेंट मौजा की होल्डिंग संख्या 302 की जमीन पर बने पुराने सरकारी भवन को तोड़ने, पेड़ काटने और लोगों को धमकाने के आरोप में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पूनम उपाध्याय के आवेदन पर 23 अक्टूबर को बड़ा बाजार थाना में कांड संख्या 260/26 दर्ज किया गया। इसमें योगेंद्र साव, जेसीबी ऑपरेटर और अन्य को आरोपी बनाया गया है। विवादित जमीन का रकबा अलग-अलग विवरणों में 53 और 57 डिसमिल बताया गया है। मामला जमीन के स्वामित्व, लीज और उस पर निर्माण को लेकर पहले से न्यायालय में लंबित है। रविवार को सदर अंचल अधिकारी आशुतोष कुमार और एसडीपीओ रूपक कुमार सिंह के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। रात में जेसीबी से गिराया गया सरकारी कार्यालय स्थानीय लोगों के अनुसार, शनिवार की देर रात विवादित जमीन पर स्थित सरकारी भवन को जेसीबी से गिरा दिया गया। यह भवन पहले लघु सिंचाई विभाग के कार्यालय के रूप में इस्तेमाल होता था, लेकिन फिलहाल खाली पड़ा था। रविवार सुबह इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी गई। इसके बाद अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जमीन पर तोड़फोड़ के साथ पेड़ों की कटाई की गई और लोगों को धमकाकर जगह खाली करने को कहा गया। प्रशासन का कहना है कि जमीन सरकारी खासमहल संपत्ति है और इसकी लीज समाप्त हो चुकी है। जमीन को सरकार के पक्ष में वापस लेने यानी रिज्यूम करने के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का न्यायालय का आदेश था। योगेंद्र साव बोले- बेटे की शादी के लिए करा रहे साफ-सफाई पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने अपने ऊपर लगे आरोपों के बीच जमीन पर काम कराने को गलत नहीं बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने जमीन के मालिक मुजीबुर रहमान से पावर ऑफ अटॉर्नी ली है। मुजीबुर रहमान और झारखंड सरकार के बीच जमीन का मामला हाईकोर्ट में लंबित है। योगेंद्र साव का दावा है कि न्यायालय ने उन्हें इस जमीन पर काम करने से नहीं रोका है। उन्होंने बताया कि उनके बेटे की शादी होने वाली है। इसी वजह से जमीन की साफ-सफाई कराई जा रही थी। हालांकि, प्रशासन का पक्ष इससे अलग है। अधिकारियों का कहना है कि अदालत के यथास्थिति संबंधी आदेश के बावजूद पुराने सरकारी भवन को ध्वस्त किया गया और पेड़ काटे गए। इस मामले में न्यायालय के आदेश की अनदेखी किए जाने का आरोप भी सामने आया है। प्रशासन हाईकोर्ट को देगा जानकारी सदर अंचल अधिकारी आशुतोष कुमार के अनुसार, भवन तोड़े जाने और पेड़ काटने के मामले की जानकारी हाईकोर्ट को दी जाएगी। प्रशासन पूरे घटनाक्रम और न्यायालय के आदेश के संदर्भ में आगे की कार्रवाई करेगा। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी। दूसरी ओर, योगेंद्र साव का कहना है कि जमीन पर उनका काम कानूनी अधिकार के तहत हो रहा है। ऐसे में विवाद का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई और उसके आदेश को माना जा रहा है।
Source link