Rising Bharat Summit: पश्चिमी भारत लंबे समय से भारतीय अर्थव्यवस्था के मुख्य आधारों में से एक रहा है. मुंबई के शेयर बाज़ार, बैंकों और पेशेवर सेवा फर्मों से लेकर पुणे के मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी बेस, गुजरात के औद्योगिक क्लस्टर और राजस्थान के उभरते हुए व्यावसायिक केंद्रों तक—यह क्षेत्र पूंजी, उद्योग और उद्यमशीलता को ऐसे बड़े पैमाने पर एक साथ लाता है, जिसकी बराबरी शायद ही कोई और क्षेत्र कर सके.
आर्थिक क्षेत्र में इसका योगदान इस ताकत को दर्शाता है. वित्त वर्ष 2025-26 में, भारत के कुल वस्तु निर्यात में गुजरात और महाराष्ट्र की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग 41% रही. ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, केमिकल, इंजीनियरिंग, फाइनेंस, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में इस इलाके की मजबूत उपस्थिति है. मुंबई के वित्तीय बाज़ार और गुजरात की ‘गिफ्ट सिटी’ (GIFT City) यहाँ के व्यवसायों को भारत और विदेशों में पूंजी और नए अवसरों से जोड़ते हैं.
जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ेगी, इन केंद्रों का योगदान और भी महत्वपूर्ण होता जाएगा. निवेश, खपत और बढ़ती आर्थिक गतिविधियों के दम पर, वित्त वर्ष 2025-26 में देश की वास्तविक GDP (Real GDP) में 7.7% की वृद्धि हुई. इस गति को बनाए रखने के लिए यह ज़रूरी है कि पश्चिमी भारत के शहर और उभरते हुए व्यावसायिक केंद्र, अपने यहाँ आने वाले व्यवसायों और लोगों की ज़रूरतों के साथ कदम मिलाकर चलें.
इस पूरे क्षेत्र में शहरी और अर्ध-शहरी केंद्रों का विस्तार हो रहा है, क्योंकि लोग रोज़गार, शिक्षा और बेहतर अवसरों की तलाश में इन जगहों की ओर आ रहे हैं. लोगों के इस तरह आने से आवास, परिवहन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (public infrastructure) की नई मांग पैदा हो रही है. इसलिए, रियल एस्टेट इस विकास गाथा का एक अहम हिस्सा बन जाता है. यह तय करता है कि लोग कहाँ रहेंगे, उन्हें कितना सफर करना पड़ेगा, और क्या आर्थिक अवसर उनके जीवन की गुणवत्ता (quality of life) को बेहतर बनाने में बदल पाएंगे या नहीं.
आवास से जुड़े आंकड़े इस मांग के बड़े पैमाने को दर्शाते हैं. वर्ष 2026 की पहली छमाही में, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में 47,355 आवासीय इकाइयों की बिक्री हुई, जबकि पुणे में यह आंकड़ा 24,890 रहा. हालाँकि, खरीदारों की भारी दिलचस्पी का मतलब यह नहीं है कि हर जगह घर खरीदना एक समान रूप से आसान है. ‘नाइट फ्रैंक इंडिया’ (Knight Frank India) के ‘अफोर्डेबिलिटी इंडेक्स’ (Affordability Index) के अनुसार, MMR में घर के लोन की EMI, परिवार की कुल आय का 69% हिस्सा ले लेती है; जबकि पुणे में यह आंकड़ा 28% और अहमदाबाद में 23% है. 50% से अधिक की किसी भी दर को वहन करने योग्य नहीं माना जाता है, इसलिए पश्चिमी भारत में अपना घर खरीदने की स्थिति काफी अलग-अलग है.