कोडरमा: दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में सजावट के सामान, दीये और आकर्षक लाइटों की मांग बढ़ गई है. इस बीच कोडरमा जिले के सतगावां प्रखंड स्थित पहलवान आश्रम में पर्यावरण संरक्षण के साथ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की अनूठी पहल की जा रही है. राष्ट्रीय झारखंड सेवा संस्थान की ओर से वर्ष 2004 से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं. इस कड़ी में अब गाय के गोबर से दीपावली के सजावटी सामान और उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. सबसे खास बात यह है कि इन उत्पादों को तैयार करने के काम से आसपास के गांवों की करीब 15 युवतियां और महिलाएं जुड़ी हैं, जो इससे अच्छी आमदनी कर रही हैं.
गोबर से तैयार हो रहे आकर्षक सजावटी सामान
पहलवान आश्रम में गाय के गोबर से दीपावली के लिए कई तरह के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. इनमें आकर्षक दीये, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं, स्वास्तिक, ओम, घर के दरवाजों को सजाने वाले तोरण द्वार और अन्य सजावटी सामग्री शामिल हैं. इसके अलावा कार के डैशबोर्ड पर रखने के लिए छोटे आकार के गणेश जी की प्रतिमाएं तथा सुगंधित धूप कप भी तैयार की जा रही हैं. इन उत्पादों की खासियत यह है कि इन्हें बेकार समझे जाने वाले गोबर से तैयार किया जाता है. इससे एक ओर प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है. वहीं, दूसरी ओर पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा मिल रहा है.
15 महिलाओं को मिला आजीविका का साधन
राष्ट्रीय झारखंड सेवा संस्थान के सचिव मनोज दांगी ने बताया कि इस पहल के माध्यम से आश्रम के आसपास के गांवों की करीब 15 युवतियों और महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया है. ये महिलाएं सुबह और शाम घर के काम निपटाने के बाद दिन में आश्रम पहुंचती हैं और गोबर से अलग-अलग उत्पाद तैयार करती हैं. उन्होंने बताया कि पहले घर के कामकाज के बाद इन महिलाओं के पास पर्याप्त समय होता था, लेकिन आमदनी का कोई नियमित साधन नहीं था. अब वे अपने हुनर और मेहनत से पैसे कमा रही हैं. इससे वे अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों की पढ़ाई में भी आर्थिक सहयोग दे पा रही हैं. उत्पाद तैयार करने वाली कुछ महिलाएं महीने में 15 हजार रुपये तक मेहनताना प्राप्त कर रही हैं.
दीपावली के बाद भी उपयोगी रहेंगे गोबर के दीये
दीपावली के दौरान घरों को रोशन करने के लिए बड़ी संख्या में दीयों का इस्तेमाल किया जाता है. त्योहार के बाद कई दीये बेकार हो जाते हैं. ऐसे में पहलवान आश्रम में तैयार किए जा रहे गोबर के दीये पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से एक बेहतर विकल्प हैं. मनोज दांगी ने बताया कि गोबर से तैयार दीये दीपावली पर घरों की सुंदरता बढ़ाने के साथ त्योहार के बाद भी उपयोगी हैं. इस्तेमाल के बाद इन्हें गमलों या बगीचे की मिट्टी में मिलाया जा सकता है. उचित तरीके से मिट्टी में मिलाने और विघटित होने पर ये जैविक पदार्थ के रूप में पौधों के लिए उपयोगी हैं. इससे अनुपयोगी सामग्री का दोबारा इस्तेमाल होगा और कचरा कम करने में मदद मिलेगी.
दूध देना बंद करने वाली गायों से भी हो सकती है आमदनी
मनोज दांगी ने बताया कि अक्सर अधिक उम्र होने या दूध देना बंद कर देने के बाद कुछ गायों को लोग सड़कों पर छोड़ देते हैं, लेकिन गोबर से उत्पाद तैयार करने की पहल के जरिए ऐसी गायों की सेवा हो रही है. गाय के गोबर से दीये, प्रतिमाएं, सजावटी सामान और अन्य उत्पाद तैयार कर आमदनी की संभावना है. उत्पाद निर्माण और बिक्री की उचित व्यवस्था होने पर एक गाय के गोबर से तैयार उत्पादों के माध्यम से महीने में करीब 12 से 15 हजार रुपये तक की आमदनी की जा सकता है.
रांची और कोडरमा में लगेगी प्रदर्शनी
पहलवान आश्रम में तैयार किए जा रहे गोबर के उत्पादों की आपूर्ति झारखंड के विभिन्न जिलों के साथ बिहार के कई जिलों में भी की जा रही है. इससे स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को दूसरे बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल रही है. मनोज दांगी ने बताया कि 29 अक्टूबर से 3 नवंबर तक रांची में आयोजित होने वाली प्रदर्शनी में इन उत्पादों को प्रदर्शित करने की तैयारी है. इसके अलावा जिला प्रशासन के सहयोग से कोडरमा में भी एक स्टॉल लगाने की योजना है. जहां लोग गोबर से तैयार दीपावली के सजावटी सामान और अन्य उत्पाद देख और खरीद सकेंगे.