झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) में लंबे समय से खाली पड़े उपाध्यक्ष, फाइनेंस अफसर और 13 सदस्यों के पदों पर जल्द नियुक्ति होगी। नियुक्ति से संबंधित फाइल पर राज्य सरकार ने अनुमति प्रदान कर दी है। जैक द्वारा जल्द ही नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जैक में उपाध्यक्ष का पद करीब 21 महीने से खाली है। वहीं 19 सदस्यीय जैक बोर्ड में 13 सदस्य पद रिक्त हैं। फाइनेंस अफसर की नियमित नियुक्ति नहीं होने से वित्तीय निर्णयों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठते रहे हैं। प्रत्याशा में वित्तीय निर्णय लिए जा रहे हैं। बताते चलें कि जैक मैट्रिक-इंटर समेत अन्य परीक्षाओं, स्कूलों की मान्यता, पाठ्यक्रम और मूल्यांकन व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेता है। ऐसे में शीर्ष पदों और सदस्यों की रिक्तता का सीधा असर पड़ रहा है। 1. वित्त समिति की बैठकें नहीं हो रहीं : जैक में फाइनेंस अफसर की भूमिका वित्तीय प्रशासन और वित्त समिति के कामकाज में महत्वपूर्ण है। वित्त समिति की बैठकें नहीं होने और प्रत्याशा में वित्तीय निर्णय लिए जा रहे हैं। फाइनेंस अफसर की नियमित नियुक्ति और वित्त समिति की बैठकें शुरू होने से वित्तीय प्रस्तावों पर संस्थागत विचार-विमर्श और जवाबदेही की प्रक्रिया मजबूत होगी। 2. स्कूलों की मान्यता और प्रस्वीकृति: जैक से संबद्धता, प्रस्वीकृति और निरीक्षण से जुड़े मामलों में संबंधित समितियों की सक्रियता जरूरी है। जैक बोर्ड में सदस्यों के आधा से अधिक पद खाली रहने से समितियों के गठन, निरीक्षण दलों की व्यवस्था और प्रस्तावों पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। नियुक्तियों के बाद लंबित मान्यता और प्रस्वीकृति संबंधी मामलों का निपटारा तेजी से होगा। 3. पाठ्यक्रम संशोधन और शैक्षणिक प्रस्तावों पर निर्णय : पाठ्यक्रम में बदलाव, शैक्षणिक मानकों और अन्य शैक्षणिक विषयों से जुड़े प्रस्तावों पर समयबद्ध निर्णय लेना परिषद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इन मामलों में संबंधित समितियों की बैठकें और सदस्यों की भागीदारी आवश्यक होती है। नियुक्तियों के बाद परिषद के लंबित प्रस्तावों निर्णय लिए जा सकेंगे। 4. परीक्षकों की नियुक्ति और मॉडरेशन बोर्ड की प्रक्रिया : मैट्रिक और इंटर की परीक्षाओं के संचालन में परीक्षकों की नियुक्ति, मूल्यांकन व्यवस्था और मॉडरेशन बोर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जैक बोर्ड में रिक्त पदों के कारण संबंधित समितियों की कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है। खाली पदों पर नियुक्ति के बाद परीक्षकों की नियुक्ति, मॉडरेशन की गति में तेजी आएगी।
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