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मेदिनीनगर में जीवन ज्योति नर्सिंग होम को गुरुवार रात जिला प्रशासन ने सील कर दिया। जांच टीम ने दो प्रसूताओं और एक नवजात की मौत के मामले में अस्पताल की लापरवाही और गड़बड़ियां पाईं। दोषी डॉक्टर और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी। प्रशिक्षु आईएएस ऋत्विक मेहता ने बताया कि उपायुक्त के निर्देश पर जांच टीम बनाई गई थी। टीम की रिपोर्ट में तीनों मौतों के लिए अस्पताल की लापरवाही सामने आई है। पिछले शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक अस्पताल में भर्ती दो प्रसूताओं और एक नवजात की मौत हुई थी। पाटन की सुमन कुमारी और गढ़वा की पूजा कुमारी की प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव और तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी। नवजात की भी मौत हुई थी। घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ वहां से चले गए थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची, तब अस्पताल में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ नहीं मिले। डीसी के निर्देश पर सिविल सर्जन ने जांच शुरू कराई थी। नर्सिंग होम की संचालिका डॉ. प्रिया सिन्हा को नोटिस दिया गया था। विभाग ने उनके जवाब को संतोषजनक नहीं पाया। इसके बाद 26 अक्टूबर को अस्पताल का क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन निलंबित कर दिया गया था। अस्पताल की चिकित्सा सुविधाओं, व्यवस्था और कमियों की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम बनाई गई थी। एमएमसीएच की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुषमा सबनम होरो के नेतृत्व वाली टीम में डॉ. नीलम होरो, डॉ. अर्चना तिवारी, डॉ. गौतम यादव और डीडीएम शशिकांत तिवारी शामिल थे। जांच में मरीजों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं देने और उन्हें केवल एक एएनएम के भरोसे छोड़ने की बात सामने आई। इसी नर्सिंग होम में एमएमसीएच के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार भी अपनी क्लिनिक चलाते हैं। डॉ. प्रिया सिन्हा और डॉ. राकेश पति-पत्नी हैं।
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