नई दिल्ली (Worst Careers for Health). जिंदगी की दौड़ में आगे निकलने और बेहतर करियर की चाह में लोग जाने-अनजाने अपनी सबसे बड़ी पूंजी यानी सेहत को दांव पर लगा रहे हैं. कॉर्पोरेट सेक्टर, IT हब और मीडिया जगत जिस तेजी से तरक्की कर रहे हैं, उतनी ही तेजी से वहां काम कर रहे लोगों में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां पैर पसार रही हैं. कभी समय पर खाना न मिलना, कभी रातभर काम करना तो कभी लगातार 10-12 घंटे कुर्सी पर बैठे रहना- ये आदतें शरीर को अंदर से खोखला कर रही हैं.
लोग मोटी सैलरी तो पा लेते हैं लेकिन उस कमाई का एक बड़ा हिस्सा बाद में डॉक्टरों और दवाइयों के बिल चुकाने में खर्च हो जाता है. लेकिन क्या हर अच्छी नौकरी की कीमत अपनी सेहत से चुकानी जरूरी है? हेल्थ एक्सपर्ट्स भारत की कई नौकरियों को ‘हाई रिस्क’ कैटेगरी में रखते हैं. काम का दबाव, अनियमित वर्किंग आवर्स और लगातार बैठने की आदत इंसान को समय से पहले बूढ़ा और बीमार बना रही है. जानिए 5 ऐसी नौकरियां, जो सेहत की दुश्मन हैं.
सेहत बर्बाद कर रही हैं ये 5 नौकरियां
घर चलाने और अपने सपने पूरे करने के लिए नौकरी या बिजनेस करना जरूरी है. लेकिन जब यही नौकरी सेहत पर भारी पड़ने लग जाए तो थोड़ा ब्रेक लेना जरूरी हो जाता है. जानिए 5 ऐसी नौकरियां, जो अपने वर्किंग स्टाइल की वजह से सेहत की दुश्मन बनती जा रही हैं.
1. आईटी और सॉफ्टवेयर प्रोफेशन: ‘सिटिंग जॉब’ और स्क्रीन टाइम की मार
2. मीडिया, जर्नलिज्म और डिजिटल कंटेंट: डेडलाइन का कभी न खत्म होने वाला तनाव
पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया बाहर से जितनी ग्लैमर्स दिखती है, अंदर से उतनी ही ज्यादा स्ट्रगल और अनिश्चितता से भरी है. ब्रेकिंग न्यूज का कल्चर, हर पल डेडलाइन का मानसिक दबाव और अनियमित खान-पान इस प्रोफेशन के लोगों की इम्युनिटी को दीमक की तरह चाट रहा है. न तो सोने का फिक्स समय होता है और न ही खाने का. इस अनियंत्रित लाइफस्टाइल के कारण पत्रकार और कंटेंट राइटर्स अक्सर गैस्ट्रिक समस्याओं, अत्यधिक चिंता और माइग्रेन जैसी गंभीर दिक्कतों का शिकार हो जाते हैं.
3. सेल्स और मार्केटिंग: फील्ड वर्क की थकान और ट्रैवलिंग का स्ट्रेस
धूप-धूल, ट्रैफिक और टार्गेट पूरा करने का मेंटल स्ट्रेस- सेल्स और मार्केटिंग की नौकरी आसान नहीं होती. इस फील्ड से जुड़े लोगों को रोज नए लोगों से मिलना, घंटों धूप में सफर करना और कंपनी के सेल्स टारगेट का तनाव झेलना पड़ता है. खान-पान की अनियमितता और हाइड्रेशन की कमी के कारण इन्हें डिहाइड्रेशन, किडनी स्टोन और पैरों की नसों से जुड़ी समस्याएं घेर लेती हैं. मानसिक तनाव इतना ज्यादा होता है कि चिड़चिड़ापन और ब्लड प्रेशर की समस्या कम उम्र में ही उभरने लगती है.
4. बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर: हाई प्रेशर और जिम्मेदारी का बोझ
पैसे के लेन-देन और हिसाब-किताब से जुड़े इस सेक्टर में गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती. बैंकर्स और फाइनेंस एनालिस्ट्स को दिनभर सख्त नियमों, ऑडिट और ग्राहकों के दबाव के बीच काम करना पड़ता है. लगातार मानसिक उधेड़बुन में रहने के कारण इन्हें क्रोनिक स्ट्रेस (दीर्घकालिक तनाव) और हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत आम तौर पर हो जाती है. दिनभर डेस्क पर बैठे रहने और लंच ब्रेक तक ठीक से न मिलने के कारण पाचन तंत्र पूरी तरह गड़बड़ा जाता है.
5. हेल्थकेयर और मेडिकल प्रोफेशन
सफेद कोट के पीछे छिपी यह दुनिया बाहर से जितनी सम्मानित दिखती है, अंदर से उतनी ही चुनौतियों से भरी होती है. डॉक्टरों और नर्सों के लिए 18-24 घंटे की लंबी और लगातार शिफ्ट्स आम हैं. हर पल मरीजों की जान बचाने का स्ट्रेस, गंभीर मामलों की जिम्मेदारी और अनियमित नींद का चक्र उनकी बायोलॉजिकल क्लॉक बिगाड़ देता है. अपनों की जान बचाने वाले ये मेडिकल प्रोफेशनल्स खुद कब गंभीर तनाव, क्रोनिक फटीग और दिल की बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं, उन्हें पता नहीं चलता.
इसी तरह से पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की ड्यूटी भी बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण मानी जाती है.
नौकरी के साथ सेहत का बैलेंस कैसे बनाएं?
नौकरी छोड़ना हर किसी के लिए संभव नहीं है. लेकिन अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव लाकर आप खुद को स्वस्थ रख सकते हैं. हर 45 मिनट के बाद अपनी सीट से उठकर थोड़ा टहलें (‘पोमोडोरो तकनीक’ अपनाएं), स्क्रीन टाइम के बाद डिजिटल डिटॉक्स करें, जंक फूड की जगह घर का बना पौष्टिक खाना खाएं और रोजाना कम से कम 30 मिनट योग या एक्सरसाइज के लिए निकालें. याद रखिए, करियर महत्वपूर्ण है, लेकिन आप खुद हैं तभी आपका मुकाम है!