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Sunil Bansal Bengal Chunav Strategy: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है. एग्जिट पोल के नतीजे भी सामने आ चुके हैं, जिसमें बीजेपी की बढ़त दिखाई गई है. ऐसे में बंगाल चुनाव के लिए रणनीति बनाने वाले उस ‘कौटिल्य’ की चर्चा करना जरूरी हो गया है, जिन्होंने जनता के बीच भाजपा के पक्ष में जनसमर्थन जुटाने में अहम भूमिका निभाई.

पश्चिम बंगाल में सुनील बंसल ने ऐसी चुनावी रणनीति बनाई, जिसके सामने ममता बनर्जी जैसी माहिर राजनीतिज्ञ को भी बेबस नजर आईं. (सुनील बंसल के फेसबुक अकाउंट से साभार)
इस पूरे चुनाव में रणनीति के मुताबिक छोटी-छोटी जनसभाओं पर फोकस किया गया. ये छोटी-छोटी मीटिंग्स मोहल्लों और घरों के आधार पर की गई. पश्चिम बंगाल की 53 विधानसभाओं में 12 हजार से ज्यादा स्ट्रीट मीटिंग रखी गई. इसके अलावा 1 लाख 65 हजार छोटी-छोटी सभाएं रखी गईं, जिसके जरिये मतदाताओं खासकर महिलाओं से संवाद कायम किया गया. इन सभाओं के माध्यम से ‘भाजते ताई-बीजेपी चाई’ का माहौल बनाने का काम किया गया.
BJP की वो रणनीति जिसमें उलझ गई TMC
चुनावी रणनीति के मुताबिक, पहले ममता बनर्जी को टार्गेट न करने का निर्णय लिया गया, लेकिन TMC के विधायकों के खिलाफ माहौल बनाने की मुहिम शुरू की गई. करीब 80 प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके इस मुहिम के तहत करीब 220 विधानसभाओं में TMC विधायकों के खिलाफ बीजेपी ने चार्जशीट जारी की. इसके बाद दूसरे चरण में जिला स्तर पर चार्जशीट जारी की गई. और फिर आखिरी कील ठोकने का काम गृहमंत्री अमित शाह ने ममता सरकार को खिलाफ चार्जशीट जारी करके किया. इस मुहिम का असर यह हुआ कि TMC को अपने 77 उम्मीदवार चेंज करने के लिए मजबूर होना पड़ा. इसके बाद बीजेपी ने 10 हजार किलोमीटर लंबी परिवर्तन यात्रा बंगाल में निकाली.
‘जिसने ब्रिगेड जीत लिया, उसने बंगाल जीत लिया’
बीजेपी के प्रति जोश और बंगाल में बदलाव के लिए बयार की संभावना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में हुई पहली जनसभा से लगाया जा सकता है. इस रैली ने ममता बनर्जी के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी थीं, क्योंकि ब्रिगेड मैदान के बारे में कहा जाता है कि जिसने ब्रिगेड जीत लिया, उसने बंगाल जीत लिया. पीएम मोदी की इस जनसभा में 5 लाख से ज्यादा लोग जुटे थे. इसके बाद सह प्रभारी और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री विप्लब देव के फीड बैक के आधार पर डायरेक्ट ममता के खिलाफ बीजेपी नेताओं ने मोर्चा खोल दिया और फिर ममता द्वारा ‘मां-माटी-मानुष’ के ऊपर हुए अत्याचारों की शृंखला को बंगाली वोटरों को याद दिलाने का काम किया गया. इसी क्रम में RG कर और संदेशखाली पीड़िताओं के परिवार के सदस्यों को टिकट दिया गया.
युवाओं-महिलाओं पर फोकस
युवा और महिलाओं से सीधे संवाद किए गये और इसके साथ ही युवा कार्ड और मातृशक्ति कार्ड के तहत लाखों की संख्या में फॉर्म भी भरवाये गए. पूरे चुनाव के दौरान राज्य और केन्द्रीय नेतृत्व के द्वारा 640 सभाएं आयोजित की गईं. प्रधानमंत्री मोदी ने कुल 19 सभाएं और 2 रोड शो किए और करीब 42 संगठनात्मक जिले कवर किए. वहीं, गृहमंत्री शाह ने 29 सभाएं और 11 रोड शो किए और 29 संगठनात्मक (23 प्रशासनिक) जिले कवर किए. बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के भी करीब 17 कार्यक्रम चुनाव के दौरान लगाए गए.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें