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कुहासा और पाला कहीं बर्बाद न कर दे फसल, ठंड शुरू होने...


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कुहासा और पाला कहीं बर्बाद न कर दे फसल, ठंड शुरू होने से पहले कर लें ये उपाय

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How To Protect Crop From Cold And Frost: ठंड और कुहासे से कई बार सब्जियों की फसल खराब हो जाती है. इसे बचाने के लिए कृषि विशेषज्ञ अंबिका जी ने किसानों को विशेष देखभाल और फफूंदनाशक दवाओं के छिड़काव की सलाह दी है. किसानों को इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए.

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देवघर. धीरे-धीरे ठंड का मौसम दस्तक देने लगा है. सुबह और शाम के समय तापमान में गिरावट महसूस होने लगी है. ऐसे में ठंड का असर सिर्फ आम जनजीवन पर ही नहीं, बल्कि खेतों में लगी सब्जियों और अन्य फसलों पर भी पड़ने लगता है. खासकर सर्दियों के मौसम में कुहासा और पाला किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है. कई बार खेतों में लहलहाती सब्जियों की फसल देखते ही देखते खराब होने लगती है. पौधों की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं, तने सड़ने लगते हैं और आलू जैसी फसलों पर भी पाले का प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलता है. अगर किसान समय रहते इन समस्याओं से बचाव के उपाय नहीं करते हैं तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. ऐसे में इस मौसम में किसानों को अपनी फसलों की विशेष देखभाल करने की जरूरत है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
दरअसल, मौसम में होने वाले बदलाव का सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ता है. देवघर के कृषि विशेषज्ञ अंबिका जी ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए बताया कि जब भी मौसम में बदलाव होता है तो इसका असर खेतों में लगी सब्जियों और दूसरी फसलों पर दिखाई देने लगता है. खासकर ठंड के मौसम में लगातार कुहासा रहने और वातावरण में नमी बढ़ने से फसलों में फंगस यानी फफूंद जनित बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है.

इसकी वजह से पौधों की पत्तियां गलने लगती हैं, पौधों के तने और निचले हिस्से में सड़न की समस्या आने लगती है. वहीं, पाला पड़ने की स्थिति में आलू समेत कई दूसरी सब्जियों की फसल को भी नुकसान पहुंच सकता है. इससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है.

इन दवाओं का करें हफ्ते में एक बार छिड़काव
कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक, इन समस्याओं से बचने के लिए किसानों को फसल लगाने के समय से ही सावधानी बरतनी चाहिए. सबसे पहले किसानों को हमेशा उपचारित बीज का ही इस्तेमाल करना चाहिए. बीज उपचारित रहने से शुरुआत में ही कई तरह के रोगों का खतरा कम किया जा सकता है. वहीं, जिन किसानों ने बिना उपचारित बीज के फसल लगा दी है, उन्हें कुहासा शुरू होने से पहले ही फसलों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए.

इसके लिए कृषि विशेषज्ञ ने मेटालेक्सिल, मैनकोजेब और कार्बेन्डाजिम जैसी फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव हर 10 दिन में करने की सलाह दी है. हालांकि, इन दवाओं का इस्तेमाल फसल में बीमारी और उसके प्रकार के अनुसार कृषि विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए.

खेतों में जलजमाव बिल्कुल न होने दें
कृषि विशेषज्ञ अंबिका जी ने बताया कि किसान मौसम की स्थिति और फसल की जरूरत को देखते हुए उचित अंतराल पर फसलों की निगरानी करें. खेतों में जलजमाव न होने दें और पौधों के आसपास अनावश्यक नमी जमा न होने दें, क्योंकि इससे फफूंद जनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. वहीं, पाला पड़ने की आशंका होने पर खेतों में हल्की सिंचाई करना भी फसलों को बचाने में मददगार हो सकता है. किसानों को बिना जानकारी के बार-बार दवाओं का छिड़काव नहीं करना चाहिए, बल्कि दवा की सही मात्रा और छिड़काव का अंतराल कृषि विशेषज्ञ से पूछकर ही तय करना चाहिए.

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Raina Shukla

Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…

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