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24 घंटे में दूसरी बार फरार हुआ कैदी, जेल के गेट से...


तमिलनाडु में जेलों की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. कोयंबटूर सेंट्रल जेल के प्रवेश द्वार पर शनिवार तड़के 25 साल का एक विचाराधीन कैदी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया. चौंकाने वाली बात यह है कि महज 24 घंटे के भीतर उसके फरार होने की यह दूसरी घटना है. इससे एक दिन पहले भी वह पुलिस हिरासत से भागा था, लेकिन पुलिस ने उसे दोबारा पकड़ लिया था. अब जेल के गेट से उसके फरार होने के बाद राज्य में सियासी घमासान छिड़ गया है.

अन्नाद्रमुक के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने इस घटना को लेकर सत्तारूढ़ टीवीके सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मौजूदा सरकार में जेल से कैदियों के भागने की घटनाएं एक ऐसे टीवी सीरियल में बदल गई हैं, जिसका अंत ही नहीं हो रहा. उनका इशारा चेन्नई की पुझल सेंट्रल जेल से हाल में दो कैदियों के फरार होने और इसी सप्ताह थेक्कमपट्टी उप-कारागार से 17 दोषियों के भागने की घटनाओं की ओर था. हालांकि, इन दोनों घटनाओं में फरार कैदियों को दोबारा पकड़ लिया गया था.

जेल के गेट पर खुली सुरक्षा की पोल, हथकड़ी खोलते ही भागा कैदी

पुलिस के मुताबिक, फरार कैदी की पहचान राघवन उर्फ कोझिकरन के रूप में हुई है. वह चोरी और लूट के मामलों में आरोपी है. शुक्रवार रात उसे एक त्वरित अदालत में पेश किया गया था, जिसके बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया गया.

शनिवार रात करीब 12:40 बजे पुलिसकर्मी उसे कोयंबटूर केंद्रीय कारागार लेकर पहुंचे. जेल के दोहरी सुरक्षा वाले प्रवेश द्वार के पहले और दूसरे गेट के बीच जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जा रही थीं. इसी दौरान उसकी हथकड़ी खोली गई. मौका मिलते ही राघवन ने पुलिसकर्मियों को धक्का दिया और वहां से भाग निकला.

इस घटना के बाद उसकी सुरक्षा में तैनात चार पुलिसकर्मियों को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है. कोयंबटूर शहर की पुलिस ने अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर उसकी तलाश में बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है.

पहले बेंगलुरु ले जाते समय भागा, फिर थाने से और अब जेल के गेट से फरार

राघवन के फरार होने का यह पहला मामला नहीं है. पुलिस के अनुसार, जून 2026 में बेंगलुरु ले जाते समय भी वह पुलिस हिरासत से भाग गया था. काफी तलाश के बाद पुलिस ने उसे दोबारा गिरफ्तार किया.

इसके बाद 30 अक्टूबर को उसकी गिरफ्तारी हुई, लेकिन उसी शाम वह अन्नूर पुलिस थाने से भी फरार हो गया. पुलिस ने पीछा कर उसे फिर पकड़ लिया. हालांकि, कुछ ही घंटों बाद वह कोयंबटूर केंद्रीय कारागार के प्रवेश द्वार से तीसरी बार भागने में कामयाब हो गया. इस तरह 24 घंटे के भीतर उसके दो बार फरार होने की घटना ने पुलिस और जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

सभी जेलों की सुरक्षा व्यवस्था की होगी जांच

घटना के बाद पुलिस महानिदेशक (जेल) के. शंकर ने तमिलनाडु की सभी जेलों में सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने की बात कही है. उन्होंने कहा कि सुरक्षा में मौजूद कमियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाएगा और अधिकारियों को मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का पूरी तरह पालन करने के निर्देश दिए गए हैं.

शंकर ने थेनी जिले के थेक्कमपट्टी उप-कारागार का निरीक्षण करने के बाद बताया कि 200 कैदियों की क्षमता वाली इस जेल में 300 से अधिक कैदी बंद मिले. जेलों में भीड़ कम करने के लिए कैदियों को दूसरी जेलों में स्थानांतरित किया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तय सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करना होगा.

गौरतलब है कि शंकर ने शुक्रवार को ही जेल एवं सुधार सेवाओं के नए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक का पद संभाला था. उनसे पहले संदीप राय राठौर इस पद पर थे. 26 अक्टूबर को थेक्कमपट्टी उप-कारागार से 17 दोषियों के भागने की घटना के बाद राठौर को इस पद से हटा दिया गया था.

‘कैदियों का भागना भी सरकार की उपलब्धि’

कोयंबटूर की घटना को लेकर विपक्ष ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. पलानीस्वामी ने हैरानी जताते हुए कहा कि यह घटना ऐसे समय हुई है, जब मुख्यमंत्री खुद जेल कर्मचारियों को सतर्क रहने की चेतावनी दे चुके हैं.

उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था, नशीले पदार्थों की तस्करी, महंगाई, बिजली कटौती और सरकारी कर्ज जैसे मुद्दे उठाते हुए तंज किया कि अब जेलों से कैदियों का भागना भी सरकार की कथित उपलब्धियों की सूची में शामिल हो गया है.

वहीं, भाजपा नेता और कोयंबटूर दक्षिण की पूर्व विधायक वी. श्रीनिवासन ने कहा कि इस घटना ने राज्य की पूरी कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

अस्पताल से भी फरार हुआ यौन उत्पीड़न का आरोपी

तमिलनाडु में कैदियों और आरोपियों के फरार होने की घटनाओं के बीच चेन्नई से भी एक और मामला सामने आया है. यहां 61 वर्षीय ऑटो रिक्शा चालक डेविड अंबारासन एक अस्पताल से फरार हो गया. उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था. आरोप है कि एक स्कूली छात्रा के परिजनों ने उसकी पिटाई की थी.

चेन्नई पुलिस के मुताबिक, ऑटो चालक पर आठ साल की बच्ची को स्कूल ले जाते समय यौन उत्पीड़न करने का आरोप है. अन्य स्कूली छात्राओं के माता-पिता ने भी उसके खिलाफ शिकायतें दी थीं. पुलिस ने बयान जारी कर बताया कि आरोपी की तलाश की जा रही है.

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने तमिलनाडु में पुलिस हिरासत, जेलों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है. अब देखना होगा कि सरकार और जेल प्रशासन सुरक्षा में खामियों को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं.



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