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Jamshedpur Handmade Clothing Embroidery: जमशेदपुर में आधुनिक फैशन के दौर में भी हाथों से कपड़ों की महीन कारीगरी करने वाले आरिफ बुटीक की पुरानी कला का क्रेज बरकरार है. यहां तीन पीढ़ियों से पारंपरिक डिजाइन तैयार किए जा रहे हैं. ऐसे तो यहां सालभर भीड़ रहती है पर त्योहार के मौके पर ग्राहकों की संख्या काफी बढ़ जाती है.
जमशेदपुर. समय बदला, दिन बदले और फैशन के तौर-तरीके भी बदल गए, लेकिन जमशेदपुर में आज भी हाथों से कपड़ों पर की जाने वाली महीन कारीगरी का अपना अलग महत्व है. शहर की महिलाएं आज भी साड़ी, सूट, सलवार और ब्लाउज पीस पर खूबसूरत डिजाइन बनवाने के लिए बहुत सी बुटीक पर भरोसा करती हैं और इन्हीं में से एक है आरिफ बुटीक. खासकर शादी-विवाह के मौसम में यहां कपड़ों की डिजाइनिंग कराने वालों की अच्छी-खासी भीड़ रहती है.
लोकल 18 को जानकारी देते हुए आरिफ बताते हैं कि उनका यह काम पिछले तीन पीढ़ियों से चला आ रहा है. इस कारीगरी को करते हुए उनके परिवार को 50 साल से भी अधिक समय हो चुका है. आज बाजार में कई बड़े ब्रांड और डिजाइनर शोरूम मौजूद हैं, लेकिन हाथों से तैयार किए गए कपड़ों की खूबसूरती और फिनिशिंग आज भी एक अलग ही पहचान रखती है.
बहुत बारीकी से होता है यह काम
आरिफ बताते हैं कि उनके यहां आज भी पारंपरिक बुनकर और कारीगर जुड़े हुए हैं, जो बेहद बारीकी से कपड़ों पर डिजाइन तैयार करते हैं. कारीगर जमीन पर बैठकर पूरी एकाग्रता के साथ कपड़ों पर काम करते हैं. यह काम मशीनों से होने वाली सामान्य डिजाइनिंग से काफी अलग है. इसमें हर छोटी से छोटी बारीकी का ध्यान रखना पड़ता है, ताकि कपड़े की खूबसूरती और उसकी फिनिशिंग बेहतरीन हो.
मशीन से नहीं हो सकता तैयार
उन्होंने बताया कि एक कपड़े पर मनचाही डिजाइन तैयार करने में करीब दो से तीन दिन तक का समय लग जाता है. डिजाइन की जटिलता और काम की बारीकी के हिसाब से मेहनत भी बढ़ जाती है. हालांकि, जब कपड़ा तैयार होकर सामने आता है, तो उसकी खूबसूरती देखते ही बनती है. हाथों से की गई कारीगरी कपड़े को एक अलग पहचान देती है, जिसे मशीनों से हूबहू तैयार करना आसान नहीं है.
पुरानी कला को जिंदा रखने में मिलती है मदद
आरिफ का कहना है कि आज भले ही लोग बड़े-बड़े ब्रांड और नामी शोरूम के कपड़े पहनना पसंद करते हों, लेकिन पारंपरिक कारीगरी का आकर्षण कभी खत्म नहीं होता. खासकर शादी-ब्याह जैसे मौकों पर महिलाएं अपने कपड़ों को खास और अलग दिखाने के लिए ऐसी डिजाइनिंग को प्राथमिकता देती हैं. इससे न केवल कपड़ों की सुंदरता बढ़ती है, बल्कि पुरानी कला को भी जिंदा रखने में मदद मिलती है.
जमशेदपुर में आज भी इस तरह की पारंपरिक डिजाइनिंग और बारीक कारीगरी करने वाले स्थान बहुत कम हैं. आरिफ बुटीक उन्हीं चुनिंदा जगहों में से एक है, जहां तीन पीढ़ियों से चली आ रही इस कला को आगे बढ़ाया जा रहा है. बदलते फैशन के दौर में भी यहां के कारीगर अपने हाथों के हुनर से पुरानी परंपरा को नई पहचान दे रहे हैं.
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Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…