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Sushant Sinha Desh Ki Pathshala: ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगती कांग्रेस को...


नरेंद्र मोदी को हरा ना पाने के फ्रस्ट्रेशन में अब राहुल गांधी एंड टीम क्या क्या गजब कर रही है. आप देखिए कि राहुल गांधी की इस रैली को लेकर दिल्ली के कारोबारी कहते रह गए कि ये वक्त त्योहारों का है, इस वक्त रैली धरना प्रदर्शन मार्च करोगे तो काम धंधे पर असर पड़ेगा. लेकिन राहुल गांधी ने इसे सुना नहीं. ना राहुल गांधी ने उस मैसेज पर ध्यान दिया जो मैसेज बैलेट वाले चुनाव में मिला कि एक सीट जीतने के लिए कांग्रेस की सांसे फूल गई. यानी पब्लिक ने राहुल गांधी के नैरेटिव को रिजेक्ट कर दिया था. इसके बाद भी राहुल गांधी इंडी और इंडी का इकोसिस्टम लगा हुआ है कि मोदी के खिलाफ माहौल बनाना है. इसके लिए फिर जो चाहे करना पड़े वो करेंगे. जबकि लोग पूछ रहे हैं कि जब एसआईआर का मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इलेक्शन कमीशन का मामला सुप्रीम कोर्ट में है, तो फिर सड़कों पर क्यों गदर मचाया जा रहा है. सिर्फ मोदी विरोध के नाम पर सड़कों पर रोज रोज का तमाशा करके राजनीति को क्यों चमकाया जा रहा है.

एक नवंबर की तारीख आज दिन भर सुर्खियों में रही. दिल्ली में एक तरफ विपक्षी गठबंधन की महारैली थी. दूसरी तरफ सिख दंगों के खिलाफ बीजेपी का पैदल मार्च. और तीसरी तरफ बीजेपी का जारी किया वीडियो, जिसमें इंडी गठबंधन की रैली को फ्लॉप बताया गया. राहुल गांधी ने रैली में लाखों लोगों के पहुंचने का दावा किया था, लेकिन बीजेपी ने कहा कि 40 फीसदी मैदान खाली रहा. लोग राहुल के भाषण के बीच से निकल गए.

पीएम मोदी ने वह कर दिखाया, जो इंदिरा-राजीव भी नहीं कर पाए

आप देखिए ये लोग नरेंद्र मोदी को टारगेट करते हैं. वोट चोरी की बात करते हैं. लेकिन काम कैसे होता है. बदलाव कैसे होता है. वो आपको देखना चाहिए. पीएम मोदी ने तो अब वो कर दिखाया है, जो इंदिरा से लेकर राजीव गांधी तक नहीं कर पाए, और इसकी पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है. वर्ल्ड बैंक तक तारीफ कर रहा है. भारत में गरीबी हटाने के नारे इंदिरा गांधी के जमाने से दिए जा रहे हैं. लेकिन गरीबों का जीवन सुधारने के लिए पीएम मोदी ने जो किया आज उसकी चर्चा वर्ल्ड बैंक तक कर रहा है.

आप देखिए वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में गरीबी तेजी से घट रही है. 2011 से 2023 के बीच 49.6 करोड़ गरीबी से बाहर निकले हैं. ये बहुत बड़ा काम है. और आप देखिए कि बात सिर्फ इसी की नहीं है, डेवलमेंट से लेकर इकॉनमी और डिफेंस तक कैसे धाकड़ काम हो रहे हैं. कैसे एक तरफ ग्लोबल क्राइसिस और युद्ध के माहौल में इकॉनमी की रफ्तार पर ब्रेक ना लगे. लोगों को किसी तरह की परेशानी ना हो. दूसरी तरफ देश की सुरक्षा अभेद बने. इसके लिए गजब के काम हो रहे हैं. बड़ी बड़ी डिफेंस डील हो रही है. यानी उधर राहुल गांधी का नैरेटिव और इधर नरेंद्र मोदी के गजब काम.

एक तरफ राहुल गांधी और विपक्ष का आरोप, वोट चोरी हो रहे हैं, लोकतंत्र खतरे में है. चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ एक सवाल और है. देश की अर्थव्यवस्था, गरीबों की जिंदगी, इंफ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्रीय सुरक्षा में आखिर क्या बदलाव आया, क्योंकि राजनीति सिर्फ आरोपों से नहीं चलती. राजनीति का असली इम्तिहान होता है- काम, नतीजे और लोगों की जिंदगी में आया बदलाव, और अब भारत की गरीबी में आई गिरावट को लेकर वर्ल्ड बैंक की नई रिपोर्ट चर्चा में है.

रिपोर्ट के मुताबिक 2011 से 2023 के बीच भारत में करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानक से ऊपर आए, दूसरी तरफ IMF ने वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट के बीच भी भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7 फीसदी किया है और डिफेंस की बात करें तो भारत का रक्षा बजट 2013-14 के करीब 2.53 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, स्वदेशी हथियार और तकनीक के दम पर भारत ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपना GSLV-F18 रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया है, जो अगली पीढ़ी के नेविगेशन उपग्रह NVS-03 को अपने साथ ले गया है. अमेरिका पर अब भारत की निर्भरता नहीं रहेगी.

तो सवाल है कि क्या भारत की कहानी सिर्फ चुनावी आरोपों तक सीमित है. या देश के भीतर और दुनिया की नजर में कुछ बड़े बदलाव भी हो रहे हैं. आज इसी पूरे मुद्दे को आंकड़ों, रिपोर्टों और जमीन पर चल रही योजनाओं के साथ समझेंगे. एक तरफ दिल्ली के रामलीला बैठकर कोई वोट चोरी का नैरेटिव गढ़ रहा है, कोई संसद से सड़क तक हंगामा खड़ा कर रहा है, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काम बोल रहा है.

राजनीति दो तरह से होती है, एक वो जो दशकों तक सिर्फ नारे देती रही, और दूसरी वो जो धरातल पर नतीजे लाकर पूरी दुनिया को चौंका देती है. गरीबी हटाने का नारा इस देश में नया नहीं है, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी के दौर तक गरीबी हटाओ के बड़े-बड़े मंच सजाए गए, लेकिन गरीबी हटी या गरीब वही का वही रहा. इसका जवाब आज दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय संस्था यानी वर्ल्ड बैंक दे रही है. वर्ल्ड बैंक की ताजा रिपोर्ट ने मुहर लगा दी है कि भारत में साल 2011 से 2023 के बीच 49.6 करोड़ से ज्यादा लोग अत्यधिक गरीबी के जाल से बाहर निकल चुके हैं. जो काम 50 सालों में नारों के दम पर नहीं हो सका, वो नरेंद्र मोदी के 10-12 सालों के विजन और नीतियों से संभव हुआ है. आज पूरी दुनिया भारत के इस ट्रांसफॉर्मेशन का लोहा मान रही है.

विपक्ष का अवरोध, भारत के विकास को रोक नहीं पाया

लेकिन बात सिर्फ गरीबी हटाने तक सीमित नहीं है, जरा ग्लोबल स्तर पर विकास की रफ्तार को भी देखिए, आज दुनिया कहां खड़ी है. रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडल ईस्ट में जंग का माहौल, यूरोप में आर्थिक सुस्ती और चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट… इस वैश्विक तूफान और संकट के बीच भारत कैसे आगे बढ़ रहा है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि तमाम वैश्विक जोखिमों और एल नीनो जैसे मौसमी व आर्थिक संकटों के बावजूद, भारत की जीडीपी ग्रोथ प्रोजेक्शन को बढ़ाकर 7% कर दिया गया है. दुनिया भर के वित्तीय विश्लेषक हैरान हैं कि कैसे ग्लोबल क्राइसिस और युद्ध के माहौल के बावजूद भारत की आर्थिक रफ्तार पर ब्रेक नहीं लगा. भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है.

तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर भारत

भारत ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की 6वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और तेजी से तीसरे स्थान की ओर बढ़ रहा है. लेकिन बात सिर्फ गरीबी हटाने तक सीमित नहीं है, जरा ग्लोबल स्तर पर विकास की रफ्तार को भी देखिए, आज दुनिया कहां खड़ी है. रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडल ईस्ट में जंग का माहौल, यूरोप में आर्थिक सुस्ती और चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट इस वैश्विक तूफान और संकट के बीच भारत कैसे आगे बढ़ रहा है. आखिर ये करिश्मा हुआ कैसे? क्या ये सिर्फ कागजी आंकड़े हैं? बिल्कुल नहीं.

राजीव गांधी ने एक बार माना था कि दिल्ली से 1 रुपया भेजा जाता है तो जमीन पर 15 पैसे पहुंचते हैं. नरेंद्र मोदी ने उसी सड़े-गले सिस्टम पर सीधा प्रहार किया. प्रधानमंत्री मोदी ने देश में जनधन, आधार और मोबाइल यानि JAM त्रिमूर्ति की ऐसी अभेद्य व्यवस्था बनाई कि बिचौलियों का खेल पूरी तरह खत्म हो गया. डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से सरकारी योजनाओं का पैसा अब सीधे लाभार्थी के खाते में जाता है, जिससे खरबों रुपये की लीकेज रुकी. कोरोना महामारी से लेकर आज तक 80 करोड़ नागरिकों को मुफ्त राशन यानि PMGKAY की गारंटी दी गई, जिसने किसी भी परिवार को भुखमरी के कगार पर नहीं जाने दिया. 4 करोड़ से ज्यादा गरीबों को पक्के मकान, 11 करोड़ से ज्यादा शौचालय, और 10 करोड़ से ज्यादा परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन दिए गए.

वर्ल्ड बैंक और IMF दोनों ने माना है कि भारत ने अत्यधिक गरीबी को लगभग समाप्त कर दिया है. ये है फर्क सिर्फ बातें करने में और जमीन पर काम करके दिखाने में… मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए PLI योजनाएं, घरेलू उत्पादन और निवेश आकर्षित करने की कोशिशें की गई हैं. सरकार का लक्ष्य है कि भारत सिर्फ दुनिया का बड़ा बाजार ना रहे, बल्कि उत्पादन और निर्यात का भी बड़ा केंद्र बने.

2047 तक बड़े आर्थिक लक्ष्य की चर्चा

EY की India@100 रिपोर्ट भी भारत के 2047 तक बड़े आर्थिक लक्ष्य की चर्चा करती है. रिपोर्ट के अनुसार, अनुकूल परिस्थितियों में भारत 2047-48 तक 26 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है, यानी विकास की कहानी में एक तरफ बड़े प्रोजेक्ट और आर्थिक अवसर हैं, दूसरी तरफ यह चुनौती भी है कि विकास का फायदा छोटे शहरों, गांवों, युवाओं और कमजोर वर्गों तक पहुंचे, लेकिन जिस तरह से भारत में एक बड़ा वर्ग गरीबी से बाहर निकला है, वो वाकई में मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धी मानी जा रही है. इन देशों में जो हालात हैं वो आगे बताएंगे. लेकिन पहले देखिए कि भारत में पीएम मोदी क्या गजब काम कर रहे हैं.

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में क्या-क्या?

भारत में गरीबी हटाने के नारे इंदिरा गांधी के जमाने से दिए जा रहे हैं. लेकिन गरीबों का जीवन सुधारने के लिए पीएम मोदी ने जो किया आज उसकी चर्चा वर्ल्ड बैंक तक कर रहा है. आप देखिए कि वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में गरीबी तेजी से घट रही है. 2011 से 2023 के बीच 49.6 करोड़ गरीबी से बाहर निकले हैं. 2011 में भारत की 57.7% आबादी 4.20 डॉलर प्रतिदिन से कम पर जीवन गुजार रही थी. 2023 तक ये आंकड़ा घटकर 16.1 फीसदी रह गया. इस आधार पर करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं
वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि गरीबी में कमी का सिलसिला जारी रहेगा. 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली आबादी 2028 तक 12.1% हो सकती है.

इसके अलावा भारत में Extreme Poverty के आंकड़ों में भी गिरावट आई है. प्रतिदिन 3 डॉलर से कम पर गुजारा करने वाली आबादी साल 2011 में 27.1% थी. जबकि साल 2023 में ये आंकड़ा घटकर सिर्फ 2.6 फीसदी रह गया. वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में गरीबी घटने के पीछे कई कारण बताए गए हैं. जिस में खपत में मजबूत बढ़त, रोजगार के अवसर बढ़ना और खाद्य सब्सिडी महत्वपूर्ण है. रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से भी परिवारों की कमाई को सहारा मिला. 2017 से 2023 के बीच रोजगार करने वाले लोगों की संख्या करीब 13.4 करोड़ बढ़ी.

हालांकि वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक रोजगार और वेतन असमानता की चुनौती अभी भी बनी हुई है. लेकिन ये तो साफ दिख रहा है कि लोगों की गरीबी दूर हो रही है. और ये है पीएम मोदी का काम, जिसकी वजह से वो इतने दिनों से टिके हुए हैं.



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