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चिटफंड और नॉन-बैंकिंग कंपनियों में फंसे जमाकर्ताओं के पैसों की वापसी की धीमी गति पर उच्चस्तरीय समिति ने कड़ा रुख अपनाया है। राजस्व पर्षद के सदस्य मस्तराम मीना की अध्यक्षता वाली इस समिति ने सीबीआई और सीआईडी को 5 नवंबर तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इसमें स्पष्ट करना होगा कि प्रमंडलों के नोडल पदाधिकारियों के साथ समन्वय कर अब तक कितने पीड़ितों को उनकी रकम लौटाई गई है। इस प्रगति की समीक्षा के लिए 6 नवंबर को एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें सीबीआई, सीआईडी के अधिकारियों के साथ सभी प्रमंडलीय आयुक्त भी उपस्थित रहेंगे।
समिति ने उन सभी मामलों में कार्रवाई शुरू करने की हिदायत दी थी, जिन जमाकर्ताओं को अब तक पैसे वापस नहीं मिले हैं। सीबीआई और सीआईडी द्वारा जब्त पैसों को जमाकर्ताओं के बीच वितरित करने का आदेश दिया गया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई ने अब तक 1.11 करोड़ रुपए की चल संपत्ति जब्त की है। यह संपत्ति पांच कंपनियों की है। इसमें सिर्फ पलामू से ही 90 लाख रुपए जब्त किए गए हैं। पिछले दिनों हुई बैठक में चिटफंड और नॉन बैंकिंग कंपनियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर जमाकर्ताओं को जब्त रकम वितरित करने का निर्णय लिया गया था। 383 करोड़ में से 276 करोड़ का ही भुगतान
इस उच्चस्तरीय समिति का गठन हाईकोर्ट में दायर पीआईएल 585/2017 और सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी 2786/2024 के दौरान हुआ था। चिटफंड और नॉन बैंकिंग कंपनियों में जमा राशि वापस दिलवाने को लेकर बनी इस समिति में गृह सचिव एवं वित्त सचिव के साथ सीबीआई के डीआईजी रैक के अधिकारी सदस्य हैं
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