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हाईकोर्ट में दो आर्बिट्रेशन आवेदन स्वीकार, दोनों पक्ष मध्यस्थता का खर्च बराबर उठाएंगे झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन और आरके एंड कंपनी मैनपावर प्रा लि के बीच हुए विवाद के निपटारे के लिए सेवानिवृत्त जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को मध्यस्थ नियुक्त किया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अदालत ने कंपनी की ओर से दाखिल दो आर्बिट्रेशन आवेदनों को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। दोनों पक्षों के बीच 6 अक्टूबर 2023 को हुए समझौतों में विवाद की स्थिति में मध्यस्थता से समाधान का प्रावधान किया गया था। अदालत ने समझौते में दर्ज मध्यस्थता की शर्त को आधार बनाते हुए यह नियुक्ति की है। इससे पहले सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत को बताया कि मामले से जुड़े मुद्दे हाईकोर्ट के 8 मई 2026 के पूर्व आदेश से आच्छादित हैं। वहीं, झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन की ओर से अधिवक्ता रौनक सहाय ने कहा कि इस मामले से संबंधित दस्तावेज एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के पास हैं। एसीबी एफआईआर संख्या 09/2025, 20 मई 2025 के तहत मामले की जांच कर रही है। ऐसे में कॉरपोरेशन फिलहाल विवाद के गुण-दोष पर विस्तृत जवाब दाखिल करने की स्थिति में नहीं है। अदालत ने निर्देश दिया कि मध्यस्थ की कार्यवाही शुरू करने से पहले मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम की धारा 12(2) तथा पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत आवश्यक घोषणा करेंगे। मध्यस्थ का शुल्क अधिनियम की चौथी अनुसूची के अनुसार निर्धारित होगा। इसका भुगतान दोनों पक्ष बराबर-बराबर करेंगे। अदालत ने मध्यस्थता की कार्यवाही धारा 29-ए के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए जल्द पूरी करने का प्रयास करने का भी निर्देश दिया। समझौते में मध्यस्थता का प्रावधान था
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कॉरपोरेशन ने अपने जवाब में 6 अक्टूबर 2023 को हुए दोनों समझौतों के निष्पादन से इनकार नहीं किया है। दोनों समझौतों के क्लॉज 14 में विवाद के समाधान के लिए मध्यस्थता का प्रावधान स्पष्ट रूप से दर्ज है। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर उसे केवल प्रथम दृष्टया यह देखना है कि दोनों पक्षों के बीच वैध मध्यस्थता समझौता मौजूद है या नहीं। समझौते के अस्तित्व की पुष्टि होने के बाद अदालत ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश को मध्यस्थ नियुक्त करने का निर्णय लिया।
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