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पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर मासधारी गांव में सड़क नहीं है। 4 नवंबर को प्रसव पीड़ा होने पर एक गर्भवती महिला को ग्रामीण खटिया पर लिटाकर चार कंधों के सहारे 4km दूर मुख्य सड़क तक ले गए। इसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस वहां नहीं पहुंच सकी। ग्रामीणों ने महिला को खटिया पर लिटाया और करीब चार किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले गए। जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों से गांव में सर्वे कराकर गांव तक सड़क निर्माण कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज को इलाज के लिए खाट के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाने की मजबूरी न हो। इधर, इस घटना का वीडियो एक ग्रामीण ने सोशल मीडिया पर डाला। वीडियो सोशल मीडिया में आते ही लोग इस पर तरह-तरह की चर्चा करते देखे गए। वहीं इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया। सिविल सर्जन सौपेंगे रिपोर्ट उपायुक्त के ओएसडी अमित कुमार ने बताया कि मामले को जिला प्रशासन ने संज्ञान में लिया है और इस बाबत सिविल सर्जन को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं।
किस परिस्थितियों के कारण मरीज को खटिया में बिठाकर अस्पताल ले जाया गया और गांव में क्या-क्या समस्याएं हैं इसका विस्तृत रिपोर्ट सिविल सर्जन द्वारा जिला प्रशासन को सौपा जाएगा। गाड़ियां गांव में नहीं आ पाती हैं: ग्राम प्रधान इधर, ग्राम प्रधान बैदा पहाड़िया ने बताया कि गांव से मुख्य सड़क करीब चार किलोमीटर दूर है। रास्ते में सड़क नहीं होने से बीमारी, दुर्घटना या प्रसव जैसी आपात स्थिति में लोगों को खटिया के सहारे मुख्य सड़क तक जाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यह समस्या केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि गांव के प्रत्येक व्यक्ति की है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव तक सड़क नहीं रहने के कारण एंबुलेंस, चारपहिया वाहन और अन्य आपातकालीन सेवाएं नहीं पहुंच पाती हैं। सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन मासधारी गांव की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़ा करती है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क नहीं होने से एंबुलेंस, चारपहिया वाहन और दूसरी आपातकालीन सेवाएं गांव तक नहीं पहुंच पातीं। उन्होंने कहा कि यह समस्या गांव के सभी लोगों की है।
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