Last Updated:
Jharkhand News: JSSC CGL परीक्षा पास करने वाले करीब 2000 अभ्यर्थियों के लिए दिवाली से पहले बड़ी खुशखबरी आई है. झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें JSSC CGL नियुक्ति परीक्षा का विज्ञापन रद्द किया गया था. कोर्ट ने कहा कि परीक्षा रद्द करने का कोई स्पष्ट आधार नहीं दिखता और सरकार का फैसला जल्दबाजी में लिया गया था.
झारखंड हाईकोर्ट.
रांचीः झारखंड में JSSC CGL परीक्षा पास करने वाले करीब 2000 अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया. जिसमें JSSC CGL नियुक्ति परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया था. कोर्ट के इस फैसले से लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे सफल अभ्यर्थियों को बड़ी उम्मीद मिली है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने साफ कहा कि परीक्षा रद्द करने के पीछे कोई स्पष्ट आधार नजर नहीं आता. कोर्ट ने सरकार के फैसले को जल्दबाजी में लिया गया कदम बताया.
सरकार के फैसले को हाईकोर्ट ने किया रद्द
JSSC CGL परीक्षा को लेकर राज्य में लंबे समय से विवाद चल रहा था. विरोध और प्रदर्शन के बीच राज्य सरकार ने नियुक्ति परीक्षा से जुड़े विज्ञापन को रद्द करने का फैसला लिया था. सरकार के इस कदम को अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. रमेश उरांव, नीरज खेस समेत कुल 8 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई. सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब अदालत ने सरकार के फैसले को रद्द कर दिया है.
परीक्षा रद्द करने का नहीं मिला स्पष्ट आधार
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने का फैसला प्रीमेच्योर यानी जल्दबाजी में लिया गया था. अदालत ने यह भी कहा कि सरकार की ओर से दाखिल काउंटर एफिडेविट फैसले के अनुरूप नहीं है. कोर्ट के मुताबिक, परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के आधार पर पूरी परीक्षा को रद्द करना सही नहीं है, खासकर तब जब इसके लिए कोई ठोस आधार सामने नहीं आया हो.
दागी अभ्यर्थियों की पहचान करना असंभव नहीं
अदालत ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि परीक्षा में शामिल दागी अभ्यर्थियों की पहचान करना असंभव नहीं है. अगर कुछ अभ्यर्थियों पर गड़बड़ी में शामिल होने का आरोप है तो उनकी पहचान कर कार्रवाई की जा सकती है. इसके लिए सभी सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया को रोकना या पूरी परीक्षा रद्द करना जरूरी नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार अदालत के फैसले से अलग कोई निर्णय नहीं ले सकती. सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि सरकार ने नियुक्ति परीक्षा रद्द करने का फैसला विरोध-प्रदर्शन के दबाव में लिया था.
About the Author
Journalist with a sharp focus on Bihar and Jharkhand, covering politics, crime, and trending stories with a strong ground-level perspective. Passionate about listening to stories, understanding them deeply, and…