Last Updated:
पलामू के किसान अब संतरे की खेती से लाखों रुपये कमा सकते हैं. इसके लिए उन्हें नागपुर जाने की जरूरत नहीं है. क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में नींबू वर्गीय फलों के पौधे तैयार किए गए हैं. एक एकड़ में लगभग 160 पौधे लगाए जा सकते हैं. जिससे किसानों को चार से पांच लाख रुपये तक की सकल आमदनी हो सकती है.
पलामूः पलामू के किसानों के लिए खेती में कमाई का एक नया विकल्प सामने आ रहा है. अब यहां के किसान भी संतरे की खेती कर अच्छी आमदनी कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें नागपुर या इंदौर जाने की जरूरत नहीं है. दरअसल, पलामू में भी संतरा और नींबू वर्गीय फलों की खेती की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में संतरे के पौधे तैयार किए गए हैं, जिनमें फल भी निकलने लगे हैं. ऐसे में किसान पारंपरिक खेती के साथ बागवानी को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं.
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश शाह ने बताया कि सिट्रस यानी नींबू वर्गीय फलों की प्रजाति का पौधा है. किसान नागपुर संतरा, इंदौर संतरा और मौसमी जैसी किस्मों की खेती कर सकते हैं. इसकी खासियत है कि पौधे एक बार स्थापित हो जाएं तो सामान्य परिस्थितियों में कुछ समय तक कम पानी में भी जीवित रह सकते हैं. हालांकि, बेहतर फल उत्पादन के लिए सिंचाई और उचित देखभाल जरूरी है.
खेती का तरीका और पौधों की संख्या
उन्होंने आगे कहा कि संतरे की खेती के लिए ऐसी जमीन का चयन करना चाहिए जहां पानी का जमाव न हो. पलामू की ऊपरी और अच्छी जलनिकासी वाली जमीन इसके लिए उपयोगी हो सकती है. एक एकड़ में 5×5 मीटर की दूरी पर लगभग 160 पौधे लगाए जा सकते हैं. इसके लिए करीब एक मीटर गहरे गड्ढे तैयार कर उनमें मिट्टी के साथ सड़ी हुई गोबर खाद और जरूरी उर्वरक मिलाना चाहिए.
एक एकड़ में लागत और कमाई का गणित
उन्होंने बताया कि कमाई की अगर बात करे तो एक एकड़ में साइट्रस की खेती स्थापित करने की अनुमानित लागत करीब 50 से 60 हजार रुपए आता है. जिसमें की टपक सिंचाई प्रणाली का भी इस्तेमाल किसान कर सकते है. उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में संतरे के एक पेड़ से 50 से 100 किलो तक उत्पादन दर्ज किया गया है. यदि एक एकड़ में 160 पेड़ तैयार होते हैं और प्रत्येक पेड़ से औसतन 50 किलो फल मिलता है, तो कुल उत्पादन करीब 8 हजार किलो हो सकता है. जिसमें अगर 50 से 60 रुपये प्रति किलो के मूल्य पर किसानों को 4 से 5 लाख रुपये की सकल आमदनी हो सकती है.
उन्होंने बताया कि संतरे के पौधों में तीसरे साल से फल आने शुरू हो सकते हैं. लेकिन अगर आप तीन साल के बाद इसके फल लेते है तो करीब पांच साल इंतजार करना पड़ सकता है. इसलिए किसानों को शुरुआती वर्षों में देखभाल और सिंचाई पर विशेष ध्यान देना होगा. पलामू के किसानों के लिए संतरे की खेती आमदनी बढ़ाने का अच्छा विकल्प बन सकती है. खासकर चियांकी, पाटन, सतबरवा और चैनपुर जैसे क्षेत्रों में इसकी संभावनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं.
About the Author
प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…