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दिवाली और धनतेरस पर बाजारों में खरीदारी की रौनक के बीच साइबर अपराधियों ने भी ठगी का जाल फैला दिया है। कारोबारी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कैश डिस्काउंट, कैशबैक और गिफ्ट जैसे ऑफर दे रहे हैं, वहीं साइबर ठग इन्हीं ऑफर्स की आड़ में लोगों को निशाना बना रहे हैं। कहीं 70 से 80 फीसदी तक छूट का लालच दिया जा रहा है, तो कहीं आकर्षक गिफ्ट और कैशबैक का झांसा दिया जा रहा है। राजधानी में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोग दिवाली की झालर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और फर्नीचर खरीदने के चक्कर में अपनी गाढ़ी कमाई गंवा चुके हैं। साइबर अपराधी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर आकर्षक वीडियो, फर्जी विज्ञापन और नामी कंपनियों से मिलते-जुलते पेज बनाकर लोगों को फंसा रहे हैं। विज्ञापनों में दिए गए नंबर पर संपर्क करने के बाद ग्राहकों को व्हाट्सएप के जरिए एपीके फाइल भेजी जाती है। ऑफर का लाभ लेने के नाम पर जैसे ही कोई व्यक्ति इस फाइल को डाउनलोड कर इंस्टॉल करता है, साइबर अपराधियों को उसके मोबाइल का एक्सेस मिल सकता है। इसके बाद वे मोबाइल में मौजूद बैंकिंग जानकारियों का इस्तेमाल कर खाते से रकम निकाल लेते हैं। साइबर थाने में ऐसा ही मामला सामने आया। इरफान अंसारी ने एक लिंक पर क्लिक किया, जिसके बाद करीब दो घंटे तक उनके मोबाइल का एक्सेस दूसरे व्यक्ति के पास रहा। इस दौरान उनके बैंक खाते से 41 हजार रुपए निकाल लिए गए। वहीं, दिवाली ऑफर के नाम भेजी गई एपीके फाइल के जरिए 2.99 लाख रुपए की निकासी कर ली गई। टीवी- फर्नीचर समेत अन्य सामान की खरीदारी में लालच देकर लोगों को फंसा रहे चार मामलों से समझें ठगी का खेल केस-1 : 80 फीसदी छूट पाने के चक्कर में गंवाई रकम ओरमांझी के सत्यम प्रसाद ने फेसबुक पर दिवाली डेकोरेशन और झालरों का विज्ञापन देखा। इसमें बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर आकर्षक लाइटें देने का दावा किया गया था। उन्होंने विज्ञापन में दिए गए लिंक के जरिए ऑर्डर किया और ऑनलाइन भुगतान कर दिया। पर न तो सामान पहुंचा और न विक्रेता ने कोई जवाब दिया। कुछ समय बाद संबंधित पेज भी गायब हो गया। केस-2 : इलेक्ट्रॉनिक सामान के साथ ऑफर ने लगाया चूना अंकिता शर्मा दिवाली पर नया टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने के लिए ऑनलाइन ऑफर तलाश रही थीं। उन्हें इंस्टाग्राम पर ब्रांडेड सामान पर भारी छूट और अतिरिक्त कैशबैक का विज्ञापन दिखा। सीमित समय का ऑफर देखकर उन्होंने दिए गए नंबर पर संपर्क किया और 9 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद न तो सामान मिला और न ही रकम वापस हुई। केस-3 : फर्नीचर के साथ महंगे गिफ्ट का लालच पंडरा सरकारी स्कूल के पास रहने वाली संजना ने इंस्टाग्राम पर 3 हजार रुपए में आकर्षक टीवी यूनिट देने का वीडियो देखा। साथ में मुफ्त गिफ्ट का भी ऑफर था। उन्होंने दिए गए नंबर पर संपर्क कर बुकिंग अमाउंट ट्रांसफर कर दी। बाद में डिलीवरी के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगे जाने लगे। संदेह होने पर उन्होंने संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन संबंधित नंबर बंद मिला। केस-4: कैशबैक के लिए एपीके फाइल भेज खाता खाली कर दिया बेड़ो के शिव कच्छप को व्हाट्सएप पर दिवाली स्पेशल ऑफर का मैसेज मिला। इसमें लिंक के जरिए एप डाउनलोड करने पर भारी छूट और कैशबैक दिया जा रहा था। साथ में एपीके फाइल भी भेजी गई थी। लिंक पर क्लिक करते ही उनका मोबाइल साइबर अपराधियों के नियंत्रण में चला गया और उनके बैंक खाते से 2.99 लाख रुपए की अवैध निकासी कर ली गई। भास्कर एक्सपर्ट मुकेश चौधरी, साइबर विशेषज्ञ शॉपिंग के लिए आधिकारिक एप का ही करें इस्तेमाल फेस्टिव सीजन में व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए नामी ऑनलाइन कंपनियों जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइटों के लिंक भेजे जाते हैं। ऐसे में अनजान लिंक पर क्लिक करने के बजाय शॉपिंग के लिए आधिकारिक एप का ही इस्तेमाल करें। वेबसाइट का यूआरएल, उसकी स्पेलिंग जरूर जांचें। बहुत कम कीमत पर सामान देने वाले ऑफर्स से सावधान रहें।
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