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हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा… पुलिस के कितने पद स्वीकृत, कितने खाली



झारखंड में स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी (एसपीसीए) और जिला स्तरीय पुलिस शिकायत प्राधिकार के गठन को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। गुरुवार को चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सरकार को शपथ पत्र दाखिल कर बताने का निर्देश दिया कि राज्य में पुलिस के कुल कितने पद स्वीकृत हैं और इनमें से कितने पद रिक्त हैं। अदालत ने यह भी पूछा है कि राज्य और जिला स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकार का गठन हुआ है या नहीं। अदालत ने विशेष रूप से राज्य सरकार से पूछा कि स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी (एसपीसीए) का गठन होने के बाद वह वास्तव में काम कर रहा है या नहीं। साथ ही जिला स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकार गठित किए गए हैं या नहीं और उनकी कार्यप्रणाली क्या है, इसकी भी जानकारी मांगी है। यह मामला झारखंड में पुलिस शिकायत प्राधिकार के गठन और उसकी कार्यशीलता से संबंधित है। इस संबंध में हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि झारखंड में स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी का गठन किया जा चुका है। हालांकि, अदालत ने केवल गठन की जानकारी को पर्याप्त नहीं मानते हुए इसकी कार्यशीलता और जिला स्तर पर प्राधिकार की स्थिति स्पष्ट करने को कहा। खंडपीठ ने राज्य सरकार को सभी बिंदुओं पर शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में निर्धारित की गई है। 2,550 दारोगा और 150 इंस्पेक्टर के पद खाली झारखंड पुलिस महकमे में सिपाहियों के साथ-साथ अब जांच और पर्यवेक्षण स्तर के पुलिस अधिकारियों का भी गंभीर टोटा हो गया है। राज्य में दारोगा (सब-इंस्पेक्टर) के कुल 6,750 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इसके विरुद्ध वर्तमान में केवल 4,200 दारोगा ही कार्यरत हैं। यानी लगभग 2,550 पद सीधे तौर पर रिक्त हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि झारखंड में वर्ष 2018 के बाद से दारोगा की कोई नई सीधी बहाली नहीं निकाली गई है। सिर्फ दारोगा ही नहीं, बल्कि थानों के थाना प्रभारी और अंचलों में पर्यवेक्षण का दायित्व संभालने वाले इंस्पेक्टरों की भी भारी किल्लत है। सिपाही के 62.5% पद खाली झारखंड पुलिस महकमा इन दिनों जवानों की भारी कमी से जूझ रहा है। राज्य में सिपाही के कुल 40,000 स्वीकृत पदों के मुकाबले वर्तमान में केवल 15,000 जवान ही मैदानी ड्यूटी पर तैनात हैं। यानी महकमे में 62.5 प्रतिशत सिपाहियों के पद खाली पड़े हैं। इस गंभीर संकट की मुख्य वजह पिछले 9 वर्षों से नई भर्ती प्रक्रिया का न होना है। साल 2017 के बाद से राज्य में सिपाही के पद पर कोई सीधी नियुक्ति नहीं की गई है। इस बीच कई जवान सेवानिवृत्त हुए और कई का प्रमोशन हुआ, लेकिन नई भर्तियां न होने से यह अंतर लगातार बढ़ता चला गया। सिपाहियों की इस भारी कमी के बीच फील्ड में कमान संभालने और जवानों का नेतृत्व करने वाले हवलदारों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। वर्तमान में पूरे राज्य में हवलदारों की संख्या मात्र 4,194 रह गई है। यह संख्या सिपाहियों की इस भारी कमी को पाटने के लिए नाकाफी साबित हो रही है, जिससे थानों से लेकर संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था तक जवानों पर अत्यधिक कार्यभार बढ़ गया है। हाईकोर्ट से मिली राहत 512 पारा शिक्षकों की सेवा समाप्ति का आदेश रद्द हुआ झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को पलामू जिले के नौडीहा बाजार और छतरपुर प्रखंड के पारा शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए उनकी सेवा समाप्ति के आदेश को निरस्त करते हुए तत्काल सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि अनुशासनात्मक-सह-प्रशासनिक समिति के शिक्षकों के पक्ष में फैसला देने की तिथि से पुनर्बहाली तक का पूरा वेतन या मानदेय दिया जाए। अदालत ने पलामू के उपायुक्त सह प्रथम अपीलीय प्राधिकार की ओर से 16 जनवरी 2025 को जारी सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द कर दिया। यह कार्रवाई नियुक्ति से संबंधित प्रखंड स्तरीय समिति की अनुशंसा के सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाने या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के आधार पर की गई थी। अदालत ने कहा कि चयन और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों का रखरखाव अधिकारियों की जिम्मेदारी है। रिकॉर्ड गायब होने या उनमें अंतर मिलने के लिए शिक्षकों को दंडित नहीं किया जा सकता। मालूम हो कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति 2006 से 2008 के बीच सर्व शिक्षा अभियान के तहत हुई थी। वे 16 वर्षों से अधिक समय तक सेवा दे चुके थे। उच्चस्तरीय समिति ने 30 नवंबर 2022 की रिपोर्ट में छतरपुर के 302 और नौडीहा बाजार के 210, कुल 512 पारा शिक्षकों के चयन या अनुशंसा को दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं पाया था। अदालत ने अधिकारियों को आदेश की प्रति मिलने के चार सप्ताह के अंदर शिक्षकों को योगदान कराने और अनुपालन के लिए 8 सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया हैं।



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