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गुमला में आदिवासी समाज की बेटी निशा भगत की मौत के मामले में सीबीआई जांच और न्याय की मांग पर शनिवार को टावर चौक में धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। विरोध प्रदर्शन के साथ निशा भगत की अंतिम यात्रा निकाली गई। निशा भगत के पिता आंदोलनकारी हांदु भगत ने सरकार के सिस्टम पर सवाल उठाए। साथ ही कहा कि निष्पक्ष रूप से पूरे मामले की सीबीआई जांच हो। वह निडर और बहादुर थी। राज्य ने आज एक होनहार बेटी खो दिया है लेकिन इसके पीछे की सच्चाई सामने आने चाहिए। 6 नवंबर को की थी खुशकुशी
दरअसल, आदिवासी नेत्री निशा भगत ने शुक्रवार दोपहर रांची स्थित पिठौरिया के डहुटोली स्थित घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। वह मूल रूप से गुमला के बड़ाईक मोहल्ला की रहने वाली थी। आत्महत्या से पहले फेसबुक पर लाइव आकर मौत का ऐलान करते हुए कहा-यकीन मानिए… प्रशासन फेल है। लाइव वीडियो के दौरान ही उन्होंने पिठौरिया थानेदार सतीश कुमार को फोन किया। रोते हुए 52 सेकेंड तक बातचीत की। उन्होंने कहा-आप तो मेरे घर चोरी करने वाले चोर को नहीं पकड़ पाए। मुझे बदनाम करने वालों को भी नहीं पकड़ पाए। अब मैं अपनी लीला समाप्त कर रही हूं तो आपको फोन कर रही हूं। मैं फांसी लगा रही हूं। मेरी अंतिम लीला… आप यही देखना चाहते थे तो यही सही। इसके बाद थानेदार ने कहा कि आप एक बार मेरे पास आइए। निशा ने कहा कि मैं क्या आऊं, मेरी लाइव चल रही है… लाइव। यह बात सुनकर थानेदार ने फोन काट दिया। इसके चंद मिनट बाद ही निशा फंदे से झूल गई। क्या है मांग
धरना-प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों का कहना है कि निशा भगत की मौत के कारणों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। वायरल वीडियो में उन्होंने जिन मुद्दों और पीड़ा का जिक्र किया है, उनकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए, मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाए, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और पीड़ित परिवार को न्याय और सुरक्षा मिले। कौन थीं निशा भगत?
निशा भगत आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और सरना धर्म कोड की मांग को लेकर लगातार आंदोलन करती रही हैं। आदिवासी समाज में उन्हें एक निडर आवाज के रूप में जाना जाता था। बाबूलाल मरांडी ने परिजनों से की मुलाकात इधर, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शनिवार की दोपहर गुमला पहुंचे। उन्होंने निशा भगत को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के उपरांत परिजनों से बातचीत की। मीडिया से बात करते हैं उन्होंने कहा कि निशा भगत लगातार धर्मांतरण, भू माफिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही थी, जिससे सरकार को खतरा महसूस होने लगा था। इतना ही नहीं उन्होंने लाइव वीडियो के माध्यम से पिठौरिया थाना प्रभारी, अजय तिर्की सहित जिन लोगों का नाम लिया है, तत्काल उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए और पूरे मामले की सीबीआई जांच हो। सरकार से अगर सत्ता नहीं संभल रही है तो इस्तीफा देना चाहिए।
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