Gurwinder Afridi Arrested: पंजाब में गैंगस्टरों और संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पंजाब पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. पंजाब पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने केंद्रीय एजेंसियों और पंजाब पुलिस की ओवरसीज फ्यूजिटिव ट्रैकिंग एंड एक्सट्राडिशन सेल (OFTEC) के साथ मिलकर विदेश में छिपे गैंगस्टर गुरविंदर सिंह उर्फ आफरीदी को अफ्रीकी देश इथियोपिया से भारत लाने में सफलता हासिल की है. करीब 10 महीने तक चले अंतरराष्ट्रीय अभियान के बाद उसे 6 नवंबर को इथियोपिया में हिरासत में लिया गया और भारत डिपोर्ट किया गया. दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर पंजाब पुलिस ने उसे अपनी हिरासत में ले लिया. अब उसे आगे की पूछताछ और जांच के लिए पंजाब ले जाया जा रहा है. गुरविंदर अफरीदी पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित है.
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान ‘गैंगस्टरां ते वार’ के तहत यह बड़ी सफलता मिली है. उन्होंने बताया कि गुरविंदर सिंह को भारत लाने के लिए ‘ऑपरेशन शहीद’ चलाया गया था. पंजाब पुलिस के मुताबिक, यह पहली बार है जब राज्य पुलिस किसी अफ्रीकी देश से अपने वांछित अपराधी को डिपोर्ट करवाकर भारत लाने में सफल हुई है. इस कार्रवाई को विदेश में छिपकर भारत में आपराधिक गतिविधियां संचालित करने वाले गैंगस्टरों के खिलाफ बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
10 महीने तक अलग-अलग देशों में तलाश
पुलिस के अनुसार, गुरविंदर सिंह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था. उसके विदेश में होने की जानकारी मिलने के बाद पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की. करीब 10 महीने तक चले ऑपरेशन के दौरान उसकी लोकेशन का पता लगाने, खुफिया सूचनाएं जुटाने और विभिन्न देशों की सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाने पर काम किया गया.
इस पूरे अभियान की निगरानी AGTF के स्पेशल डीजीपी प्रमोद बान कर रहे थे. वहीं, काउंटर इंटेलिजेंस विंग के तहत काम करने वाली OFTEC के आईजी आशीष चौधरी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ संपर्क और प्रत्यर्पण से जुड़ी कार्रवाई का समन्वय कर रहे थे. पुलिस ने उसकी गतिविधियों और फर्जी दस्तावेजों से संबंधित जानकारियां केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा कीं. लगातार सूचनाओं के आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की गई कार्रवाई के बाद आखिरकार उसकी गिरफ्तारी का रास्ता साफ हुआ.
पंजाब पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, उसकी विदेश यात्रा का क्रम इस प्रकार रहा:
- 31 मार्च 2025: मुंबई एयरपोर्ट से कथित फर्जी पासपोर्ट के आधार पर UAE पहुंचा.
- अप्रैल 2026: UAE से केन्या चला गया.
- जून 2026: केन्या से अंगोला पहुंचा.
- नवंबर 2026: अंगोला से इथियोपिया पहुंचा.
- 6 नवंबर 2026: इथियोपिया में हिरासत में लिया गया और बाद में भारत डिपोर्ट किया गया.
फर्जी पासपोर्ट के सहारे मुंबई से भागा था विदेश
पंजाब पुलिस के मुताबिक, गुरविंदर सिंह उर्फ आफरीदी 31 मार्च 2025 को मुंबई एयरपोर्ट से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भाग गया था. विदेश जाने के लिए उसने कथित तौर पर फर्जी पहचान के आधार पर तैयार करवाए गए पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था. यह पासपोर्ट उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी एक व्यक्ति की पहचान से संबंधित था, जिसे 12 फरवरी 2025 को लखनऊ से जारी किया गया था.
पुलिस अब इस बात की भी जांच कर सकती है कि एक वांछित अपराधी को फर्जी पहचान के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने में किस तरह मदद मिली और इस पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे. फर्जी दस्तावेजों के जरिए देश से बाहर निकलने के बाद आफरीदी ने लगातार अपनी लोकेशन बदली, ताकि भारतीय एजेंसियां उसकी गतिविधियों का पता न लगा सकें.
UAE से मैक्सिको भागने की कोशिश भी नाकाम
पुलिस के मुताबिक, विदेश पहुंचने के बाद आफरीदी शुरुआत में UAE में छिपा रहा. वहां से उसने इस्तांबुल के रास्ते मैक्सिको जाने की कोशिश की, लेकिन उसकी यह योजना सफल नहीं हुई. उसे मैक्सिको जाने के रास्ते से वापस UAE डिपोर्ट कर दिया गया. इसके बाद उसने फिर अपना ठिकाना बदलना शुरू कर दिया. इस तरह आफरीदी ने करीब डेढ़ साल के दौरान कई देशों में अपना ठिकाना बदला. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने के लिए वह लगातार अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार आवाजाही करता रहा. हालांकि, उसके खिलाफ जारी अंतरराष्ट्रीय अलर्ट और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के कारण आखिरकार उसकी पहचान और लोकेशन का पता लगा लिया गया.
रेड कॉर्नर नोटिस के साथ इंटरपोल के 7 रेफरेंस
गुरविंदर सिंह की गिरफ्तारी के लिए पंजाब पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रयास किए थे. उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया गया था. इसके अलावा फर्जी पासपोर्ट, विदेश में उसकी मौजूदगी और लगातार बदलते ठिकानों से संबंधित जानकारियां केंद्रीय एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के साथ साझा की गई थीं.
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में इंटरपोल के सात अलग-अलग रेफरेंस भी जारी किए गए थे. इन रेफरेंस के माध्यम से अलग-अलग देशों में उसकी गतिविधियों और पहचान से जुड़ी जानकारियों पर काम किया गया. करीब 10 महीने तक चले खुफिया अभियान और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ तालमेल के बाद 6 नवंबर को इथियोपिया में उसे हिरासत में लिया गया. इसके बाद उसे भारत भेज दिया गया. दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद पंजाब पुलिस की टीम ने उसे अपने कब्जे में ले लिया. अब उससे पूछताछ के जरिए पंजाब में दर्ज आपराधिक मामलों, विदेश में उसके संपर्कों और उसके नेटवर्क से जुड़ी जानकारियां जुटाई जाएंगी.
30 से ज्यादा गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित
पंजाब पुलिस के अनुसार, गुरविंदर सिंह उर्फ आफरीदी के खिलाफ भारत में 30 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें पांच हत्या के मामले, हत्या की कोशिश, जबरन वसूली और आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज मामले शामिल हैं. पुलिस का दावा है कि वह पंजाब में कई सनसनीखेज हत्याकांडों में वांछित है. इन मामलों में राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों को निशाना बनाकर की गई हत्याएं भी शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, आफरीदी पांच प्रमुख हत्याकांडों में आरोपी है. इनमें अक्टूबर 2024 में आम आदमी पार्टी के सरपंच राजविंदर सिंह उर्फ राज तलवंडी की हत्या का मामला शामिल है. इस हत्याकांड के बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी.
इसके अलावा मार्च 2025 में 12 वर्षीय गुरसेवक सिंह की हत्या और इसी महीने विक्की चुघ की हत्या के मामले में भी उसका नाम सामने आया है. मई 2025 में जसवंत सिंह की हत्या के मामले में भी पुलिस उसे वांछित बता रही है. वहीं, सितंबर 2025 में कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष गुरमेल सिंह की हत्या के मामले में भी गुरविंदर सिंह उर्फ आफरीदी आरोपी है. इन पांचों हत्याकांडों के अलावा उसके खिलाफ हत्या की कोशिश, रंगदारी और हथियारों से संबंधित कई अन्य मामले भी दर्ज हैं. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इन वारदातों में उसकी क्या भूमिका थी और उसने कथित तौर पर किन लोगों के साथ मिलकर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया.
पूछताछ में खुल सकते हैं गैंगस्टर नेटवर्क के राज
आफरीदी को भारत लाए जाने के बाद पंजाब पुलिस की जांच का दायरा उसके व्यक्तिगत आपराधिक मामलों से आगे भी बढ़ सकता है. जांच एजेंसियां उससे विदेश में छिपे अन्य गैंगस्टरों के संपर्क, भारत में सक्रिय सहयोगियों, हथियारों की सप्लाई और रंगदारी के नेटवर्क के बारे में पूछताछ कर सकती हैं. इसके अलावा यह भी पता लगाने की कोशिश होगी कि विदेश में रहते हुए वह पंजाब में आपराधिक गतिविधियों को किस तरह संचालित कर रहा था.
पुलिस यह भी जांच सकती है कि उसके विदेश प्रवास के दौरान उसे आर्थिक और लॉजिस्टिक मदद कौन उपलब्ध करा रहा था तथा फर्जी पासपोर्ट हासिल करने में किस नेटवर्क की भूमिका थी. उसके मोबाइल फोन, डिजिटल संपर्कों और अन्य दस्तावेजों की जांच से भी कई अहम जानकारियां मिलने की उम्मीद है.
विदेश में छिपने वाले गैंगस्टरों को सख्त संदेश
पंजाब पुलिस की इस कार्रवाई को राज्य में संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. खास बात यह है कि आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए एक के बाद एक कई देशों में ठिकाने बदले, लेकिन अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से उसकी तलाश जारी रखी गई. पुलिस का मानना है कि इस कार्रवाई से विदेश में छिपकर भारत में आपराधिक गतिविधियां चलाने वाले गैंगस्टरों को स्पष्ट संदेश जाएगा कि देश से बाहर चले जाने के बावजूद वे कानून की पहुंच से बच नहीं सकते. ‘ऑपरेशन शहीद’ के तहत हुई यह कार्रवाई पंजाब पुलिस के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय और वांछित अपराधियों को वापस लाने के प्रयासों की बड़ी सफलता है. अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि आफरीदी से पूछताछ के दौरान पंजाब में हुए हत्याकांडों और विदेश में सक्रिय गैंगस्टर नेटवर्क को लेकर क्या खुलासे होते हैं.