कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है. 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ऐतिहासिक बढ़त को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने राज्य के सभी महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय सुरक्षा बलों को सौंप दिया है. यह कदम राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ सहित अन्य प्रमुख भवनों से सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है.
सोमवार दोपहर को कोलकाता और हावड़ा की सड़कों पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सीआरपीएफ (CRPF) और त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) की गाड़ियाँ राज्य सचिवालय नबन्ना, राइटर्स बिल्डिंग, विकास भवन, जल संपद भवन और खाद्य भवन के बाहर खड़ी हो गईं. अधिकारियों के अनुसार, यह तैनाती इसलिए की गई है ताकि सत्ता हस्तांतरण के इस दौर में किसी भी प्रकार के महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड या फाइलों को नष्ट न किया जा सके. नबन्ना, जहाँ मुख्यमंत्री कार्यालय स्थित है, अब पूरी तरह से केंद्रीय बलों की निगरानी में है.
फाइलें खोली जाएंगी – अमित शाह ने दी थी चेतावनी
चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार हुंकार भरी थी कि भाजपा की सरकार आते ही पिछले सालों के भ्रष्टाचार की सभी ‘फाइलें खोली जाएंगी’. चुनाव आयोग का यह कदम इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है. भाजपा को आशंका थी कि चुनावी हार के डर से निवर्तमान सरकार के कुछ अधिकारी या कर्मचारी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को गायब या नष्ट कर सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भ्रष्टाचार के मुद्दों पर टीएमसी सरकार को जमकर घेरा था.
कर्मचारियों के बैग की तलाशी
सूत्रों के अनुसार, नबन्ना और अन्य भवनों में ड्यूटी पर आने-जाने वाले राज्य सरकार के कर्मचारियों के बैगों की कड़ी तलाशी ली जा रही है. सुरक्षा बलों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी कर्मचारी को सचिवालय से बाहर कोई भी फाइल या आधिकारिक दस्तावेज ले जाने की अनुमति न दी जाए. निगरानी इतनी सख्त है कि हर कमरे और गलियारे पर पैनी नजर रखी जा रही है.
राइटर्स बिल्डिंग का लौटेगा गौरव?
दिलचस्प बात यह है कि वाम मोर्चा के शासनकाल में शक्ति का केंद्र रही ‘राइटर्स बिल्डिंग’, जिसे टीएमसी शासन में लगभग हाशिए पर धकेल दिया गया था, उसे फिर से सजाया जा रहा है. राजनीतिक हलकों में अटकलें हैं कि नई भाजपा सरकार राइटर्स बिल्डिंग को फिर से मुख्य प्रशासनिक केंद्र बना सकती है. इन भवनों के जीर्णोद्धार की योजनाएं भी चर्चा में हैं.
भाजपा 200 के पार
चुनाव आयोग के नवीनतम अपडेट के अनुसार, बंगाल में भाजपा 208 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और कई सीटें जीत चुकी है, जबकि तृणमूल कांग्रेस महज 79 सीटों पर संघर्ष कर रही है. भारी बहुमत की संभावनाओं ने प्रशासनिक फेरबदल और पुरानी फाइलों की जांच के डर को और बढ़ा दिया है.
पश्चिम बंगाल के सरकारी कार्यालयों में केंद्रीय बलों की तैनाती क्यों की गई है?
चुनाव आयोग ने सत्ता परिवर्तन के दौरान सरकारी दस्तावेजों और महत्वपूर्ण फाइलों को नष्ट होने या चोरी होने से बचाने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया है.
किन प्रमुख भवनों की सुरक्षा बढ़ाई गई है?
राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’, राइटर्स बिल्डिंग, विकास भवन, जल संपद भवन और खाद्य भवन में भारी सुरक्षा बल और क्यूआरटी तैनात किए गए हैं.
सरकारी कर्मचारियों के लिए क्या नए नियम लागू किए गए हैं?
कर्मचारियों के बैग की सघन तलाशी ली जा रही है और किसी भी कर्मचारी को कार्यालय से कोई भी फाइल बाहर ले जाने की अनुमति नहीं है.
भाजपा का इन दस्तावेजों को लेकर क्या रुख रहा है?
अमित शाह और पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि सत्ता में आने पर पिछली सरकार के भ्रष्टाचार से जुड़ी सभी फाइलें खोली जाएंगी और उनकी जांच होगी.
चुनाव रुझानों में भाजपा और टीएमसी की वर्तमान स्थिति क्या है?
नवीनतम रुझानों के अनुसार, भाजपा 208 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि टीएमसी केवल 79 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.