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कुसुम ने बताया कि गौ संरक्षण के प्रति उनकी संवेदनशीलता एक व्यक्तिगत दर्द से जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि उनके घर में इलाज के अभाव में पांच गोवंशों की मौत हो गई थी. इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया और तभी से उन्होंने संकल्प लिया कि वह गोवंशों के संरक्षण और उनके बेहतर इलाज की व्यवस्था के लिए….
कोडरमा: सावन माह में शिवभक्तों की आस्था अपने चरम पर है. इसी कड़ी में कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड की 21 वर्षीय कुसुम साहू ने एक अनोखी और प्रेरणादायक कांवड़ यात्रा की शुरुआत की है. कुसुम झुमरी तिलैया स्थित प्रसिद्ध झरनाकुंड धाम से 21 लीटर जल लेकर सुल्तानगंज के लिए पैदल रवाना हुई हैं. उनकी यह धार्मिक यात्रा करीब 350 किलोमीटर लंबी होगी. जिसे वह प्रतिदिन 25 से 30 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए पूरा करेंगी. कुसुम ने बताया कि यात्रा के पहले चरण में वह सुल्तानगंज स्थित प्राचीन अजगैबीनाथ मंदिर पहुंचकर अपने साथ ले जाए गए जल से भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगी. इसके बाद सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा से पुनः 21 लीटर गंगाजल कांवड़ में भरकर देवघर के लिए पदयात्रा शुरू करेंगी. देवघर पहुंचने पर विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग में गंगाजल अर्पित कर जलाभिषेक करेंगी. इसके बाद उनकी यात्रा बासुकीनाथ धाम तक जारी रहेगी. जहां भगवान शिव का पूजन-अर्चन कर वह अपनी धार्मिक यात्रा का समापन करेंगी.
राम मंदिर और वृंदावन तक पैदल यात्रा कर गौ वंशों के लिए उठा चुकी हैं पशु एंबुलेंस की मांग
कुसुम ने बताया कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है. बल्कि समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी और एक संदेश भी है. उन्होंने बताया कि इससे पहले भी वह राम मंदिर और वृंदावन की पैदल यात्रा कर चुकी हैं. उस यात्रा के दौरान उन्होंने सरकार से घायल और बेसहारा गोवंशों के इलाज के लिए विशेष एंबुलेंस सेवा शुरू करने की मांग उठाई थी. उन्होंने कहा कि उनकी मांग के बाद झारखंड में घायल गोवंशों के उपचार के लिए एंबुलेंस सेवा की शुरुआत हुई. वर्तमान में एंबुलेंस की संख्या पर्याप्त नहीं है. इसके अलावा इन एंबुलेंसों में आवश्यक दवाइयों और चिकित्सा संसाधनों की भी कमी रहती है जिससे समय पर उपचार नहीं मिल पाता.
घर के 5 गौ वंशों की मौत के बाद अलग-अलग तरीके से सरकार से कर रही हैं बेहतर सुविधा की मांग
कुसुम ने बताया कि गौ संरक्षण के प्रति उनकी संवेदनशीलता एक व्यक्तिगत दर्द से जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि उनके घर में इलाज के अभाव में पांच गोवंशों की मौत हो गई थी. इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया और तभी से उन्होंने संकल्प लिया कि वह गोवंशों के संरक्षण और उनके बेहतर इलाज की व्यवस्था के लिए लगातार आवाज उठाती रहेंगी. उन्होंने कहा कि विभिन्न यात्राओं, सामाजिक अभियानों और अन्य माध्यमों से वह सरकार और समाज का ध्यान इस दिशा में आकर्षित करती रही हैं. उन्होंने बताया कि इस बार की कांवड़ यात्रा भी भगवान शिव की भक्ति के साथ-साथ गौ संरक्षण का संदेश देने का एक प्रयास है.
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