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Investment Tips : बढ़ती महंगाई और मंदी के खतरे के बीच कैसे...


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बढ़ती महंगाई और मंदी की आशंका के बीच कहां पैसा लगाने पर मिलेगा ज्‍यादा फायदा?

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Money Making Tips – शेयर मार्केट में पैसा लगाने का मकसद छोटी अवधि में अधिक कमाई होता है. हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि शेयर मार्केट में आपको लंबे समय तक पांव जमाने चाहिए. इक्विटी मार्केट में छोटी अवधि में रिस्क अधिक होता है.

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गोल्ड में निवेश आपको बाजार की तेज उथल-पुथल से बचाता है.

नई दिल्ली. ये साल निवेशकों के लिए उतना बेहतर नहीं रहा, जितना 2021 रहा था. कोविड-19 के प्रभाव के बावजूद भारतीय बाजारों ने निवेशकों को तब जबरदस्त रिटर्न दिया था. हालांकि, 2022 में यूक्रेन-रूस युद्ध, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण बढ़ती महंगाई, सख्त मौद्रिक नीतियों और मंदी की आशंका ने मनी मार्केट की कमर तोड़ दी. आगे भी कुछ समय स्थिति कमोबेश इसी तरह की दिख रही है. ऐसे में लोगों के पास निवेश के लिए क्या विकल्प हैं?

ऐसे समय में आपकी निवेश की रणनीति क्यों होनी चाहिए. आपको कहां और कितना निवेश करना चाहिए, यह समझना बहुत जरूरी है. अगर आप सोच-समझकर अपने निवेश से जुड़े फैसले करते हैं तो निश्चित है कि बाजार में किसी बड़ी उथल-पुथल का असर भी आप पर ज्यादा नहीं होगा. आज हम आपको यही बताएंगे कि आप अपना पोर्टफोलियो किस तरह तैयार करें?

केवल इक्विटी में नहीं लगाएं पैसा
शेयर मार्केट में पैसा लगाने का मकसद छोटी अवधि में अधिक कमाई होता है. हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि शेयर मार्केट में आपको लंबे समय तक पांव जमाने चाहिए. बेशक इक्विटी आपको कम समय में अन्य किसी एसेट के मुकाबले अधिक रिटर्न देने की क्षमता रखती है, लेकिन इसमें रिस्क फैक्टर भी उतना ही अधिक होता है. इसलिए अपना सारा निवेश शेयरों में डालने की बजाय डेट और गोल्ड की तरफ भी ध्यान दें. जानकारों के अनुसार, अपनी अपनी रिस्क लेने की क्षमता के अनुसार, इन एसेट्स में निवेश का बंटवारा कर सकते हैं. मान लीजिए आप अधिक जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं तो इक्विटी, डेट और गोल्ड में 70-25-5 के अनुपात में निवेश करें. आप मध्यम स्तर का रिस्क लेना चाहते हैं तो ये अनुपात 45-45-10 कर दें. जबकि अगर आप रिस्क बहुत ही कम लेना चाहते हैं को इसे 20-70-10 कर दें. इक्विटी में फिलहाल लार्ज एंड मिड कैप और मल्‍टीकैप श्रेणी में निवेश किया जा सकता है. जबकि डेट में आप मैच्‍योरिटी वाले फंड और डायनमिक बॉन्‍ड देख सकते हैं.

अलग-अलग एसेट क्लास क्यों?
निवेश एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाजार में अनिश्चितताएं अभी बनी हुई हैं. शॉर्ट टर्म में वैश्विक रुझान भी कुछ बेहतर नहीं दिख रहे हैं. ऐसे में किसी एक एसेट क्‍लास पर ध्यान केंद्रित करना गलत साबित हो सकता है. इसके बजाय लोगों को अलग-अलग एसेट क्‍लास पर ध्‍यान देना चाहिए. जानकारों के अनुसार, आप कितना रिस्क ले सकते हैं और बाजार में कितना समय बिता सकते हैं इन 2 कारकों को ध्यान में रखते हुए ही निवेश करना चाहिए. विशेषज्ञ इसीलिए पोर्टफोलियो को इक्विटी, गोल्ज और डेट में बांटने की सलाह दे रहे हैं.

About the Author

Jai Thakur

जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. पिछले 3 महीनों से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसक…और पढ़ें



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