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Torai Farming: बोकारो जिले के चंद्रपुरा प्रखंड के तेलों गांव के किसान भरत महतो आधुनिक खेती से मिसाल पेश कर रहे हैं. महज 80 डिसमिल जमीन में मल्चिंग विधि से झींगा खेती कर वह लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. लोकल 18 से खास बातचीत में किसान भरत महतो ने बताया कि खेती उनके परिवार का पारंपरिक पेशा है और कई पीढ़ियों से वे इसी काम से जुड़े हैं.
बदलते समय के साथ उन्होंने खेती में नई तकनीक अपनाई और मल्चिंग विधि और ड्रिप के माध्यम से झींगा की खेती शुरू की है और अब सफलतापूर्वक झींगा की फसल से बढ़िया आमदनी कर रहे हैं. मल्चिंग तकनीक के फायदे बताते हुए किसान भरत ने बताया कि इस विधि में सिंचाई कम करनी पड़ती है.
पौधों को ड्रिप सिस्टम के माध्यम से सीधे पानी और पोषण मिलता है, और गर्मियों के दौरान सब्जी में नमी बनी रहती है और बरसात में अधिक बारिश होने पर भी फसल को नुकसान नहीं पहुंचता है. जिस कारण फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर होते हैं.
भरत महतो ने आगे बताया कि उन्होंने मार्च महीने में झींगा बोयी थी, जो करीब 40 से 45 दिनों में तैयार हो जाती है. फिलहाल बाजार में झींगा सब्जी 20 से 40 रुपये प्रति किलो के थोक भाव से बिक रहा है और 80 डिसमिल जमीन में वे करीब 80 से 100 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त कर लेते हैं.
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उन्होंने बताया कि इस खेती में करीब 15,000 रुपये की लागत आई है, और तैयार फसल को वे बोकारो के गोमो मंडी में बेचते हैं. अच्छी पैदावार और सही बाजार मिलने से वे दो महीने के भीतर करीब 1 से 1.5 लाख रुपये तक की बचत कर लेते हैं.
आखिर में उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि झींगा की फसल में ‘लीफ रिमाइंडर’ (पत्ती से जुड़ी बीमारी) का खतरा रहता है, जिससे समय पर कीटनाशक का छिड़काव कर नियंत्रण पाया जा सकता है और झींगा की खेती से किसान कम समय में मोटी आमदनी कमा सकते हैं.