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Claire Mazumdar : भारतीय उद्योग जगत ने नई पीढ़ी कारोबारियों का जलवा बढ़ता ही जा रहा है. देश में करीब 48 साल से बिजनेस करने वाली कंपनी बायोकॉन की बागडोर भी अब नई पीढ़ी के हाथ में जाने वाली है. कंपनी की मौजूदा चेयरपर्सन ने अपने उत्तराधिकारी की पहचान कर ली है. खास बात ये है कि इस कंपनी की कमान एक बार फिर महिला के हाथ में ही रहेगी, जो कारोबारी जगत में बढ़ती महिलाओं की ताकत का एक और शानदार उदाहरण होगा.
सबसे पहले बात करते हैं बॉयोकान की. बैंगलुरु स्थित इस बायोफार्मा कंपनी की शुरुआत साल 1978 में हुई थी. इसकी मौजूदा चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ हैं. बायोकॉन फार्मा सेक्टर की अग्रणी कंपनी है, जिसका मौजूदा मार्केट कैप करीब 60 हजार करोड़ रुपये के आसपास है. यह कंपनी सिर्फ भारत ही नहीं, कई और देशों में अपना कारोबार करती है. कंपनी की मौजूदा चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ ने अब रिटायर होने का फैसला किया है और कंपनी की कमान युवा पीढ़ी की हाथ सौंपने की तैयारी कर ली है.
अब जानते हैं क्लेयर के बारे में. क्लेयर का पूरा नाम क्लेयर मजूमदार है, जो किरण मजूमदार की भतीजी हैं. फिलहाल क्लेयर बिकारा थेरप्टिक्स ( Bicara Therapeutics) नाम की एक अमेरिकी बायोटेक्नोलॉजी कंपनी की कमान संभालती हैं, जिसे बायोकॉन ने ही वित्तीय मदद देकर तैयार किया है. इसका मतलब है कि यह एक तरह से बायोकॉन की ही सब्सिडियरी है. बिकारा को अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज नैस्डैक पर लिस्ट भी कराया गया है.
क्लेयर ने अमेरिका के मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से बायोलॉजिक इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए की डिग्री हासिल की. इतना ही नहीं स्टैनफोर्ड स्कूल ऑफ मेडिसिन से कैंसर बायोलॉजी में डॉक्टरेट की उपाधि भी ली. अपना एकाडेमिक मजबूत करने के बाद उन्होंने मेडिकल क्षेत्र में ही करियर शुरू किया.
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क्लेयर ने अमेरिकी बायो फार्मा कंपनी रेयोस मेडिसिन (Rheos Medicines) में भी बड़ी भूमिका निभाई. यहां बिजनेस डेवलेपमेंट एंड कॉरपोरेट स्ट्रेटजी सेक्शन को वह लीड करती थीं. साथ ही उन्होंने इस कंपनी को रोच के साथ पार्टनरशिप करने में भी बड़ी भूमिका निभाई थी. अमेरिका के ही एक निवेश फर्म थर्ड रॉक वेंचर्स ( Third Rock Ventures) में भी उन्होंने बतौर सीनियर एसोसिएट्स काम किया और कंपनी के बिजनेस डेवलपमेंट को लेकर भी बड़ी भूमिका में रहीं.
क्लेयर ने रीले थिरेप्टिक्स और नूरा हेल्थ जैसी गैर लाभकारी संस्थाओं के बोर्ड ऑर डायरेक्टर्स की भी भूमिका निभाई है. ये संस्थान मरीजों की जल्दी रिकवरी और उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. साथ ही उनके परिवार को भी देखभाल करने का प्रशिक्षण देते हैं और इस काम में मदद भी करते हैं. साल 2018 में क्लेयर ने बिकारा के सीईओ का पद संभाला और उनकी अगुवाई में ही साल 2024 में कंपनी को अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज नैस्डैक पर लिस्ट कराया गया.
क्लेयर की अगुवाई में बिकारा लगातार ग्रोथ कर रही है. फॉर्च्यून इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, क्लेयर ने कंपनी में क्लीनिकल डेवलपमेंट और कैंसर थेरेपी सेक्शन को भी लीड किया है. आज इस कंपनी का मार्केट कैप 1.6 अरब डॉलर यानी करीब 15 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. अब क्लेयर के हाथ में 60 हजार करोड़ की बायोकॉन कंपनी बागडोर सौंपने की भी तैयारी हो चुकी है. माना जा रहा है कि किरण मजूमदार ने इसका आधिकारिक ऐलान करने का भी मन बना लिया है.
किरण मजूमदार ने पिछले दिनों कहा था, ‘मैं बायोकॉन की एकमात्र मालकिन हूं और मैं यह समझती हूं कि इस कंपनी को संभालने के लिए क्लेयर सबसे अच्छी उम्मीदवार है. मैंने देखा है कि क्लेयर के अंदर मेरी उत्तराधिकारी बनने की पूरी क्षमता है और उसने यह बात साबित भी कर दिया है कि वह एक कंपनी चला सकती है. 73 वर्षीय किरण मजूमदार की कोशिश है कि बायोकॉन को अगले फेज तक ले जाया जाए. कंपनी का फोकस अब एडवांस्ड बायोटेक्नोलॉजी और एआई की मदद से विकास करने पर है.
बायोकॉन के शेयरों में आज 1.29 फीसदी का उछाल दिख रहा है और सुबह 11.26 बजे तक स्टॉक का भाव 365.26 रुपये तक पहुंच गए थे. यह एक मिड कैप कंपनी है, जिसका बाजार पूंजीकरण करीब 60 हजार करोड़ रुपये के आसपास है. इसके शेयरों का ऑल टाइम हाई 487.75 रुपये रहा है. 19 एनालिस्ट की टीम में से 47 फीसदी ने इस स्टॉक को बाय की रेटिंग दी है, जबकि 16 फीसदी का मानना है कि स्टॉक आउटपरफॉर्म कर रहा है.