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Jharkhand Famous Personality Nirmala Joshi: रांची की सिस्टर निर्मला जोशी को झारखंड की मदर टेरेसा के नाम से लोग जानते हैं. वह मिशनरीज ऑफ चैरिटीज की प्रमुख बनीं थी. साथ ही समाज सेवा में अपना जीवन समर्पित किया और पद्म विभूषण से सम्मानित हुईं. आइये जानते हैं उनके बारे में.
साल 1934 में 23 जुलाई को झारखंड की राजधानी रांची में जन्मी सिस्टर निर्मला मार्च, 1997 में मिशनरीज ऑफ चैरिटीज की प्रमुख बनी थी. उन्होंने मदर टेरेसा के बाद उनका पद संभाला था. इन्होंने मदर टेरेसा के साथ कई सारे देशों की यात्रा भी की. उनके माता-पिता नेपाल से थे. 17 साल की उम्र में सिस्टर निर्मला ने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया था और मिशनरीज ऑफ चैरिटीज से जुड़ गई थीं.
रांची के संत कुलदीप स्कूल की सिस्टर थ्योडोरा एक्का बताती हैं कि उनको देश का दूसरा सर्वोच्च पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. अपनी सारी जिंदगी दूसरों की सेवा में ही लगा दी, उन्होंने शादी नहीं की. उनके साथ भी हमने काम किया है और देखा है कि दुख भी लोगों के लिए उनके मन में गजब की संवेदना थी.
उन्होंने अपनी टीचिंग के जरिए कई लोगों को धर्म से जोड़ा अच्छे कर्म करने को प्रेरित किया. गांव -गांव गई, वहां पर खासतौर पर ऐसे लोग जो नशाखोरी में पूरी तरह डूब चुके हैं. वैसे लोगों को भी उन्होंने नशा से बाहर निकाल के एक नई जिंदगी देने में काफी अहम भूमिका निभाई है. जितने दिन में जीवित रही एक दिन भी बिना सेवा और बिना जनकल्याण का नहीं रही.
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सिस्टर थ्योडोरा बताती हैं कि वह बचपन से ही इस प्रवृत्ति की महिला रही हैं. सांसारिक गृहस्थी में उनका मन कभी नहीं लगा. उनको हमेशा समाज कल्याण व दूसरों के दुख को कैसे दूर किया जाए, उनको कैसे ज्ञान दिया जाए, जिससे वह अपना दुख खुद ही मिटा पाए. हमेशा इसी चीजों में उनका मन लगा रहता था. मदर टेरेसा को इन पर इतना भरोसा था कि वह जहां जाती हैं, इन्हें अपने साथ लेकर जाती थी.
अलग-अलग देश में मदर टेरेसा के साथ जाकर उन्होंने संस्था का केंद्र स्थापित किया. सिर्फ रांची ही नहीं, बल्कि विदेश तक में अपने काम का लोहा मनवाया है. इसीलिए जब उनका निधन 2015 कोलकाता में हुआ तो पीएम नरेंद्र मोदी समेत अन्य लोगों ने भी शोक व्यक्त किया. आज भी रांची में उनकी गजब की लोकप्रियता है. खासतौर पर स्कूल कॉलेज में तो उनको बच्चे आइडल मानते हैं.
अपने स्कूल में हम उनके बारे में पढ़ाते हैं. उनके जीवन के बारे में पढ़ाते हैं कि कैसे निस्वार्थ होकर दूसरों की सेवा करनी चाहिए या फिर पढ़ाई भी करते हैं तो निश्चित होकर इस पढ़ाई को कैसे जन कल्याण में लाना चाहिए. उनकी जीवनी से हम बच्चों को प्रेरणा देने का काम करते हैं. स्कूल कॉलेज में ही नहीं, बल्कि आम जिंदगी में भी लोग उनको अपना आदर्श मानते हैं.