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मामा के आइडिया ने बदल दी जिंदगी… ड्राइवर से आयुर्वेदिक जूस किंग...


जमशेदपुर: आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां लोग रोजगार के लिए काम तो करते हैं, लेकिन दिल से संतुष्टि कम ही मिलती है. वहीं, शहर के निरंजन की कहानी एक अलग मिसाल पेश करती है. साल 1996 से ड्राइविंग के पेशे से जुड़े जमशेदपुर के निरंजन अक्सर गाड़ी चलाते हुए सोचते थे कि क्या यही उनका असली मकसद है? उन्हें महसूस होता था कि वे समाज के लिए कुछ बेहतर और स्वास्थ्य से जुड़ा काम करें, लेकिन दिशा स्पष्ट नहीं थी.

इसी उलझन के बीच उन्होंने अपने मामा से मुलाकात किए, जो एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं. उनसे कई बार इस विषय पर चर्चा की. बातचीत के दौरान उन्हें एक अनोखा सुझाव मिला कि क्यों न लोगों की सेहत के लिए कुछ ऐसा किया जाए, जो प्राकृतिक हो और सीधे उनकी दिनचर्या से जुड़ सके. इसी सोच ने उन्हें जमशेदपुर के जुबली पार्क तक पहुंचाया. जहां हर सुबह सैकड़ों लोग वॉक, योग और एक्सरसाइज के लिए आते हैं.

20 से अधिक वैरायटी के हैं जूस

निरंजन ने ठान लिया कि वे यहां कुछ अलग करेंगे. उन्होंने आयुर्वेदिक जूस पर गहराई से रिसर्च शुरू किया. कई तरह की जड़ी-बूटियों, फलों और सब्जियों के गुणों को समझा, उनके संयोजन पर काम किया और आखिरकार शुरू किया अपना ‘आयुर्वेदिक जूस कॉर्नर’. आज उनके इस छोटे से स्टॉल पर 20 से भी अधिक प्रकार के हेल्दी जूस मिलते हैं, जो लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुके हैं.

जानें जूस के प्रकार

उनके जूस की खासियत है कि हर एक ड्रिंक शरीर के किसी न किसी हिस्से को फायदा पहुंचाती है. जैसे आंवला जूस इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए, गिलोय जूस रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए, अर्जुन की छाल का जूस दिल की सेहत के लिए और जामुन का सिरका डायबिटीज कंट्रोल में मददगार माना जाता है. इसके अलावा वे एलोवेरा जूस, लौकी जूस, करेला जूस, नीम-पत्ते का जूस, अदरक-तुलसी जूस, चुकंदर-गाजर जूस और व्हीटग्रास जूस भी तैयार करते हैं.

सिर्फ जूस ही नहीं, उनके स्टॉल पर टमाटर, पालक, कॉर्न और स्प्राउट्स से बना हेल्दी सलाद भी मिलता है, जो सुबह-सुबह एक्सरसाइज करने वालों के लिए एक परफेक्ट डाइट बन चुका है. खास बात यह है कि निरंजन अपनी दुकान सिर्फ सुबह 6 बजे से 9 बजे तक ही खोलते हैं, लेकिन इस सीमित समय में भी उनकी अच्छी खासी कमाई हो जाती है. आज निरंजन न सिर्फ आर्थिक रूप से संतुष्ट हैं, बल्कि उन्हें इस बात की खुशी है कि वे लोगों की सेहत सुधारने में योगदान दे रहे हैं. उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादा मजबूत हो और काम में समाजहित जुड़ा हो, तो छोटा सा प्रयास भी बड़ी पहचान बन सकता है.



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