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थलापत‍ि व‍िजय को 1 या 2 सीटें जीतने वाले समर्थन देने के लिए रख रहे क्या शर्त?

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Thalapathy Vijay oath Latest News:थलापति विजय के नेतृत्व वाली टीडीपी ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीती हैं. किसी भी पार्टी को बहुमत न मिलने के कारण, सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते थलापति विजय ने सरकार बनाने का दावा किया है और शपथ ग्रहण से पहले बहुमत साबित करने के लिए दो सप्ताह का समय भी मांगा है. तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों की आवश्यकता होती है, ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि केवल 108 सीटें जीतने वाली टीडीपी को बहुमत के लिए कौन समर्थन देगा.

 थलापत‍ि व‍िजय को 1 या 2 सीटें जीतने वाले समर्थन देने के लिए रख रहे क्या शर्त?Zoom

थलापत‍ि व‍िजय को क्‍या कांग्रेस देगी समर्थन (AI Photo)

नई द‍िल्‍ली. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में थलापत‍ि व‍िजय की तमिलनाडु विक्ट्री पार्टी (टीवीके) 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और 7 मई को मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 118 के आंकड़े से अब भी 10 सीट दूर है. वहीं तम‍िलनाडु में एक और 2 सीटें जीतने वाली पार्ट‍ियां व‍िजय थलापत‍ि को समर्थन देने को तैयार है पर वो उसके ल‍िए शर्तें रखना शुरू कर द‍िया है. दूसरी तरफ व‍िजय थलापत‍ि को लेकर कांग्रेस खेमे में क्‍या चल रहा है.

कांग्रेस तैयार, मगर ‘सेक्युलर लाइन’ और साझा फैसला शर्त
तमिलनाडु के लिए कांग्रेस के प्रभारी गिरीश चोडंकर ने साफ कहा है कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है और युवा व महिलाएं टीडीपी की ओर झुकी हैं. उन्होंने खरगे, राहुल गांधी और के.सी. वेणुगोपाल को रिपोर्ट भेजकर आगे की रणनीति पर फैसला हाईकमान पर छोड़ दिया है. चोडंकर का संकेत है कि कांग्रेस टीवीके को समर्थन देने के लिए तैयार हो सकती है, मगर शर्त यह है कि फैसला सामूहिक हो और सेक्युलर राजनीति की लाइन साफ हो. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि कई कांग्रेस नेता टीवीके (थलापत‍ि) को समर्थन देने में रुचि दिखा रहे हैं और कहा, ‘किसी को भी टीवीके को हल्के में नहीं लेना चाहिए’. यह कांग्रेस की ओर से वैचारिक तालमेल और साझा कार्यक्रम को प्राथमिक शर्त के रूप में सामने रखा है.

कम्युनिस्ट पार्टियां: पहले व‍िजय अपना रुख साफ करें
सीपीएम के राज्य सचिव पी.शनमुगम ने स्पष्ट किया कि वे ‘धर्मनिरपेक्ष गठबंधन में बने रहेंगे’ और कहा कि जब तक टीवीके अपना स्पष्ट रुख नहीं बताती तब तक वे अपना स्टैंड घोषित नहीं करेंगे. यानी वाम दलों की पहली शर्त है व‍िजय पहले खुलकर बताएं कि उनकी सरकार का राजनीतिक और वैचारिक एजेंडा क्या होगा? सीपीआई के राज्य सचिव वीर पांडियन ने भी कहा कि थलापत‍ि व‍िजय ने अभी तक उनसे संपर्क नहीं किया है. अगर व‍िजय फोन करके समर्थन मांगते हैं, तो फैसला पार्टी कार्यकारिणी की राय के आधार पर होगा. यानी सीपीआई की शर्त है औपचारिक बातचीत, लिखित/साफ प्रस्ताव और फिर अंदरूनी लोकतांत्रिक प्रक्रिया से हो.

वीकेसी की 2 सीटें: ‘मिलकर फैसला’ और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ रुख
वीकेसी ने 2 सीटें जीती हैं और उसका समर्थन थलापत‍ि व‍िजय के लिए निर्णायक हो सकता है. वीकेसी नेता थिरुमावलवन ने साफ कहा कि वामपंथी दल और तमिल लिबरेशन टाइगर्स लंबे समय से धर्मनिरपेक्ष राजनीति में सक्रिय हैं और आगे भी ‘महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय मिलकर ही लेंगे.’

उन्होंने यह भी कहा कि वीकेसी और वामपंथी दल गैस समेत आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ लगातार विरोध कर रहे हैं. इसका मतलब है कि वीकेसी की शर्तें दो स्तर पर हैं

1) कोई भी समर्थन अकेले नहीं, बल्कि वाम दलों के साथ संयुक्त निर्णय के रूप में
2) जिस सरकार को समर्थन दिया जाए, वह जनविरोधी आर्थिक नीतियों और महंगाई के खिलाफ स्पष्ट स्टैंड ले.

डीएमडीके की 1 सीट: सेक्युलर प्रोग्रेसिव गठबंधन ने रखी क्‍या शर्त
वृद्धाचलम से जीती डीएमडीके महासचिव प्रेमलता विजयकांत ने साफ कर दिया कि उन्हें व‍िजय की ओर से कोई निमंत्रण नहीं मिला है और वे ‘धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन में हैं और बने रहेंगे.’ यानी डीएमडीके की फिलहाल मूल शर्त यही है कि वे अपना मौजूदा सेक्युलर प्रोग्रेसिव मोर्चा नहीं छोड़ेंगे. व‍िजय अगर समर्थन चाहते हैं तो उन्हें इसी फ्रेमवर्क के भीतर भरोसा देना होगा वरना डीएमडीके दूरी बनाए रखेगी.

क्या संख्या पूरा कर पाएंगे व‍िजय?
व‍िजय की टीडीपी के पास 108 विधायक हैं. सरकार बनाने के लिए 118 का जादुई आंकड़ा जरूरी है यानी कम से कम 10 और विधायकों का समर्थन चाहिए. गणित के मुताबिक, डीएमके और एआईएडीएमके को छोड़कर अन्य पार्टियों के पास 20 सीटें हैं. इनमें कांग्रेस की 5 सीटें जोड़ने पर सेक्युलर खेमे के पास कुल 14 विधायक हैं.तमिलनाडु लिबरेशन टाइगर्स, कम्युनिस्ट ऑफ इंडिया, मार्क्सिस्ट पार्टी और आईयूएमएल के पास 2‑2 सीटें हैं, डीएमडीके के पास 1 सीट और वीकेसी के पास 2 सीटें हैं. इन छोटी पार्टियों की हर 1 या 2 सीट अब सत्ता की कुंजी बन गई है लेकिन सभी की पहली शर्त यही है कि थलापत‍ि व‍िजय अपना कार्ड खुलकर खेलें सेक्युलर एजेंडा, जनहित नीतियां और साझी निर्णय प्रक्रिया के बिना समर्थन मुश्किल दिख रहा है.



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