भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में शायद ही कभी ऐसा मंजर देखा गया हो जब एक भरी अदालत में न्यायाधीश और वकील के बीच तल्खी इस कदर बढ़ जाए कि मामला सीधे जेल की सलाखों तक पहुंचाने की नौबत आ जाए. आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के एक वायरल वीडियो ने देश के कानूनी गलियारों में भूचाल ला दिया है. माय लॉर्ड के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते एक युवा वकील और गुस्से से लाल न्यायमूर्ति टी. राजशेखर राव के बीच जो कुछ भी हुआ उसने अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर दस्तक दे दी है. तनाव इतना गहरा गया कि मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को खुद इस मामले की कमान संभालनी पड़ी है. सीजेआई जज को रिपोर्ट तलब करने पर मजबूर कर दिया.
लुकआउट नोटिस से जुड़ा मामला
यह मामला तब शुरू हुआ जब एक रिट याचिका (लुकआउट नोटिस और पासपोर्ट जब्त करने के खिलाफ) पर सुनवाई चल रही थी. महज 2 साल का अनुभव रखने वाले एक वकील के व्यवहार से नाराज होकर न्यायमूर्ति टी. राजशेखर राव ने उन्हें 24 घंटे की पुलिस हिरासत में भेजने का मौखिक आदेश दे दिया.
कोर्टरूम में क्या कुछ हुआ?
· विवाद की जड़: जज ने वकील के व्यवहार को अकर्मण्य यानी आलस्य से भरा बताया. वीडियो में जज को यह कहते सुना जा सकता है कि वकील ने कोर्ट में बंडल (फाइल) फेंका और वरिष्ठ वकील की तरह व्यवहार करने की कोशिश की.
· जज की कड़ी टिप्पणी: न्यायमूर्ति राव ने कहा, “अभी आपके पास 10 साल का अनुभव भी नहीं है और आप बंडल फेंक रहे हैं? अब आपको दर्द महसूस होगा.” उन्होंने रजिस्ट्रार को तत्काल हिरासत का आदेश जारी करने का निर्देश दिया.
· वकील की माफी: अधिवक्ता हाथ जोड़कर माफी मांगते रहे और दया की भीख मांगते दिखे लेकिन जज ने उन्हें बार काउंसिल जाकर धरना देने की नसीहत दे डाली.
· CJI का हस्तक्षेप: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की. जिसके बाद CJI ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
एसोसिएशन का हस्तक्षेप और आदेश की वापसी
जैसे ही यह खबर फैली आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारी न्यायाधीश के चैंबर में पहुंचे. उनके अनुरोध के बाद न्यायमूर्ति राव ने लिखित आदेश पर हस्ताक्षर होने से पहले ही अपना निर्देश वापस ले लिया.
सवाल-जवाब
कोर्ट में ‘इंडोलेंट’ (Indolent) व्यवहार का क्या अर्थ है?
कानूनी संदर्भ में इसका अर्थ है कि वकील ने अदालत की गरिमा के प्रति लापरवाही दिखाई या अदालत की कार्यवाही के दौरान सुस्त और अपमानजनक आचरण किया. इस मामले में जज ने वकील द्वारा फाइल फेंकने और बहस के दौरान अनुशासनहीनता को इंडोलेंट व्यवहार माना.
क्या कोई जज किसी वकील को सीधे पुलिस हिरासत में भेज सकता है?
न्यायाधीशों के पास ‘अवमानना’ की स्थिति में कार्यवाही करने की शक्ति होती है. हालांकि, पुलिस हिरासत का आदेश अत्यंत दुर्लभ और विवादास्पद है. बार काउंसिल का मानना है कि ऐसे मुद्दों को बार काउंसिल के अनुशासनात्मक तंत्र के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए, न कि हिरासत के जरिए.
इस मामले में वर्तमान स्थिति क्या है?
फिलहाल वह आदेश वापस ले लिया गया है और वकील को हिरासत में नहीं लिया गया. हालांकि, बार काउंसिल ऑफ इंडिया की शिकायत पर CJI सूर्यकांत ने रिपोर्ट मांगी है, जिससे यह मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में है.