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सड़क किनारे बेकार पड़ी लकड़ियों में जीवन फूंकते हैं प्रेम भसीन, बनाते...


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Palamu Artist Prem Bhasin: जिन लकड़ियों को लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं, उनसे इतने सुंदर आइटम तैयार होते हैं कि हजारों में बिक्री होती है. पलामू के बेलवाटिका निवासी प्रेम भसीन 26 साल से बेकार लकड़ियों से सिंगल वुड कलाकृतियां बना रहे हैं. उनकी कला के लिए प्रेम को कई बार सम्मानित भी किया गया है.

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पलामू. पलामू जिले में एक ऐसे कलाकार हैं, जिनकी नजरें सड़क किनारे पड़ी बेकार लकड़ियों में भी कला की संभावनाएं खोज लेती हैं. आम लोग जिस लकड़ी को जलाने या फेंकने लायक समझते हैं, उसी लकड़ी को बेलवाटिका निवासी प्रेम भसीन अपनी कल्पना और हुनर से जीवंत आकृतियों में बदल देते हैं. कोई लकड़ी उनके हाथों में साधु बन जाती है तो कोई जड़ों से बना टेबल, ये सब लोगों को हैरान कर देता है. पिछले 26 वर्षों से वह सिंगल लकड़ी से अनोखे और उपयोगी आइटम तैयार कर रहे हैं. उनकी खासियत यह है कि वे ज्यादातर बिना किसी जोड़ के एक ही लकड़ी से पूरी आकृति तैयार करते हैं.

सड़क पर गिरे पेड़ से शुरू हुआ सफर
प्रेम भसीन ने लोकल18 को बताया कि वर्ष 2000 में उन्होंने ठेकेदारी का काम छोड़ दिया था. खाली समय में एक दिन उन्होंने सड़क किनारे गिरे आम के पेड़ को देखा. लकड़ी का आकार उन्हें किसी मेंढक जैसा दिखाई दिया. बस वहीं से उनके भीतर कलाकार जाग उठा. उन्होंने उसी लकड़ी से मेंढक की आकृति बनाई. यह उनकी पहली कलाकृति थी, जिसे कोलकाता के एक व्यक्ति ने 21 हजार रुपये में खरीद लिया. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार नई-नई आकृतियां बनाते चले गए.

लकड़ी खुद बता देती है आकृति
प्रेम भसीन ने कहा कि वे लकड़ी को देखकर ही समझ जाते हैं कि उससे क्या बनाया जा सकता है. किसी लकड़ी में उन्हें आदमी का चेहरा दिखाई देता है तो किसी में जानवर की आकृति. उनका मानना है कि प्रकृति पहले से ही आकार तैयार कर देती है, कलाकार सिर्फ उसे उभारने का काम करता है. यही वजह है कि उनकी 90 प्रतिशत कलाकृतियां सिंगल वुड से तैयार होती हैं. फर्नीचर जैसी कुछ चीजों में ही मजबूरी में दूसरी लकड़ी का इस्तेमाल करना पड़ता है.

250 से अधिक अनोखे आइटम बना चुके
अब तक प्रेम भसीन 250 से अधिक अलग-अलग कलाकृतियां तैयार कर चुके हैं. इनमें जड़ों से बने टेबल, जानवरों की आकृतियां, साधु की प्रतिमाएं और कई सजावटी सामान शामिल हैं. उन्होंने छह फीट ऊंचा जिराफ भी बनाया, जो आज पलामू के रोटरी स्कूल में लगा हुआ है. इसके अलावा उनके बनाए 15 से अधिक आइटम उसी स्कूल में हैं, जबकि गुरु गोविंद सिंह पब्लिक हाई स्कूल और सेसा संस्थान में भी उनकी कई कलाकृतियां लगी हुई हैं.

बच्चों में जागरूकता फैलाना है उद्देश्य
प्रेम भसीन अपनी कला को सिर्फ कमाई का जरिया नहीं मानते. वे अक्सर अपनी बनाई कलाकृतियां स्कूलों को भेंट कर देते हैं ताकि बच्चों में रचनात्मक सोच विकसित हो सके. उनका कहना है कि घर में पड़ी बेकार चीजों को अगर थोड़ी कल्पना और मेहनत से देखा जाए तो उनसे उपयोगी और सुंदर सामान बनाया जा सकता है. वे लोगों को प्रेरित करते हैं कि बेकार वस्तुओं को फेंकने के बजाय उन्हें नए रूप में इस्तेमाल करें.

कला के लिए मिल चुके कई सम्मान
प्रेम भसीन को जिला स्तर पर कला से जुड़े कई पुरस्कार मिल चुके हैं. वर्ष 2012 में उन्होंने दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित प्रदर्शनी में अपनी कलाकृतियां प्रदर्शित की थीं. उस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने उनकी कला की सराहना करते हुए सम्मानित भी किया था. आज भी प्रेम भसीन उसी जुनून के साथ सड़क पर पड़ी लकड़ियों में नई जिंदगी तलाश रहे हैं और अपनी कला से लोगों को प्रकृति से जुड़ने का संदेश दे रहे हैं.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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