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Thalapathy Vijay | how to convert social media followers into votes |...


नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर जब हमारे या आपके फॉलोअर मिलियन में हो जाते हैं तो कई दफे मन में सवाल उठता है क्या हम इनके बूते विधायक, सांसद बन सकते हैं? भारत में एक ऐसे चुनावी रणनीतिकार का उदय हुआ है जो आपके सपनों को साकार कर सकता है. अक्सर बातें होती हैं कि सोशल मीडिया के फॉलोअर से चुनाव नहीं जीता जा सकता है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण बिहार चुनाव 2025 में दिखा था. जब चुनाणी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराजी की सोशल मीडिया पर जबरदस्त फैन फॉलोइंग थी, लेकिन चुनाव में उन्हें एक भी सीट नहीं आई. लेकिन मार्केट में एक ऐसे चुनावी रणनीतिकार की सफल लॉन्चिंग हुई है जो इस करिश्मे को हकीकत में बदल देता है. वो शख्स का नाम है जॉन अरोकियासामी. इसने अपनी काबलियत से अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय और उनकी पार्टी टीवीके के साथ काम करके इस सोशल मीडिया के फॉलाअर्स को वोट में तब्दील करके दिखाया है. जॉन अरोकियासामी ने यह करिश्मा पहली बार नहीं बल्कि शिवसेना के साथ काम करते हुए भी कर दिखाया है. आइए सोशल मीडिया के फॉलोअर्स को वोट में बदलन वाली जॉन अरोकियासामी की कहानी जानते हैं.

सोशल मीडिया के फॉलोअर्स को वोट में बदलने की तरकीब क्या?

बात 2023 की है. जब तमिल फिल्मों के सुपरस्टार थलापति विजय से जॉन अरोकियासामी की मुलाकात होती है. बातचीत के दौरान थलापति विजय ने जॉन को बताया कि वह राजनीति में उतरना चाहते हैं. इसमें वह उनकी क्या मदद कर सकते हैं. उस रोज विजय के साथ छोटी मीटिंग करने के बाद जॉन वहां से चले गए. कुछ दिनों बाद दोनों फिर मिले. इस मुलाकात के दौरान जॉन अरोकियासामी ने विजय से कहा- ‘मैं अगर आपके सोशल मीडिया फॉलोअर्स को वोट में तब्दील कर दूं तो कैसा रहेगा.’ इस बात पर विजय को पल भर के लिए यकीन नहीं हुआ, लेकिन उस वक्त भारी मन से ही सही विजय ने जॉन अरोकियासामी को काम शुरू करने की परमिशन दे दी.

जॉन अरोकियासामी ने जब अपनी टीम के साथ काम करना शुरू किया तो उन्होंने पहली ही मीटिंग में कहा- ‘आज से हम लोग एक एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर रहे हैं जो थोड़ा नया है. लेकिन हमें इसे हर हाल में पूरा करना है.’ उनके ऐसा कहते ही टीम मीटिंग में मौजूद लोगों के चेहरे देखकर जॉन अरोकियासामी समझ गए कि उनके मन में सवाल है कि आखिर काम क्या है? तभी जॉन अरोकियासामी ने कहा- ‘हम कल्ट ऐक्टर विजय थलापति के लिए काम शुरू करने जा रहे हैं. विजय वो शख्स हैं जिनके सोशल मीडिया पोस्ट पर मिलियन में रिएक्शन आते हैं. हमें विजय के सोशल मीडिया फॉलोअर्स को वोट में तब्दील करा है.’ इसी मीटिंग के दौरान जॉन अरोकियासामी ने कहा कि डिजिटल मीडिया में मिलने वाले प्यार को वोटों में बदला जा सकता है, यह हम सबको साबित करके दिखाना है. जब हम सफल होंगे तो दुनिया इस करिश्मे को देखेगी.

जॉन में यूं जगा विजय का भरोसा

बताया जा रहा है कि जॉन और उनकी टीम ने जब थलापति विजय और उनकी पार्टी टीवीके के लिए काम करना शुरू किया तो कुछ महीने में उम्मीद जगा दी. भरोसा इतना ज्यादा जगा कि थलापति से जब पार्टी के लोग कुछ भी सवाल करते तो वह झट से कहते- ‘जॉन से एक बार पूछ लो’.

टीवीके से जुड़े लोगों का कहना है कि कुछ ही दिनों में जॉन अरोकियासामी पर विजय बहुत ही ज्यादा भरोसा करने लगे. विजय के करीबी लोगों का कहना है कि विजय विचारधारा के स्तर पर बीजेपी या दक्षिणपंथी लोगों के करीब भी जा सकते थे, लेकिन जॉन की सलाह पर उन्होंने ऐसा नहीं किया. विजय ने जब टीवीके बनाई तब अरोकियासामी ने बीजेपी और व्यापक दक्षिणपंथी विचारधारा के खिलाफ मजबूती से खड़ा करने में मदद की. यह ज़रूरी नहीं कि उन्होंने ऐसा द्रविड़ राजनीति में वैचारिक रूप से डूबे होने के कारण किया हो, बल्कि उन्होंने ऐसा विजय को पूरी तरह से राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए किया है.

पार्टी के लोगों का कहना है कि टीवीके के अंदर, अरोकियासामी जिस तरह से विजय को समझते थे, उसे बताने के लिए बार-बार एक ही शब्द का इस्तेमाल किया जाता रहा- ‘कल्ट’ (एक ऐसा व्यक्तित्व जिसके दीवाने लोगों का एक अलग ही समूह हो). जॉन मानते हैं कि थलापति विजय केवल लोकप्रिय ही नहीं हैं, बल्कि वे एक ‘कल्ट’ बनने की राह पर हैं. शायद वे खुद भी अपनी इस क्षमता को पूरी तरह से नहीं समझ पाए थे.

लाइमलाइट से दूर रहते हैं चुनावी रणनीतिकार जॉन अरोकियासामी

कई मंचों पर खुद को प्रूफ कर चुके हैं जॉन

विजय की तरह जॉन अरोकियासामी भी क्रिश्चियन धर्म को मानते हैं, लेकिन प्रोफेशनल लाइफ में उनकी विचारधारा का खास प्रभाव नहीं दिखता है. यही वजह है कि वह विजय से पहले 2016 में पीएमके के ‘माट्रम मुन्नेट्रम अन्बुमणि’ अभियान, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पहले कार्यकाल के दौरान कर्नाटक में कांग्रेस, महाराष्ट्र में शरद पवार की अविभाजित एनसीपी और मुंबई में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली अविभाजित शिवसेना की नगरपालिका चुनाव के लिए रणनीति बना चुके हैं.

जॉन अपनी पर्सनल जिंदगी में बाइबल को मानते हैं, लेकिन सोशल लाइफ में वह धर्मनिरपेक्षता को तवज्जो देते हैं. वह पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के चित्तूर से ताल्लुक रखते हैं. चेन्नई से एमबीए कंप्लीट करने से पहले त्रिची में अंग्रेज़ी साहित्य की पढ़ाई की थी. उन्होंने ‘परफेक्ट रिलेशंस’ में काम किया और बाद में ‘गुड रिलेशंस इंडिया’ में डायरेक्टर और COO के पद तक पहुंचे. इसके बाद 2017 में उन्होंने ‘पर्सोना लीडरशिप एडवाइज़री प्राइवेट लिमिटेड’ की शुरुआत की और बाद में अपना राजनीतिक परामर्श उपक्रम ‘JPACPersona’ लॉन्च किया.

खुद को लाइमलाइट से दूर रखकर जॉन अरोकियासामी चुपचाप काम करने और सौ फीसदी रिजल्ट देने में यकीन करते हैं. आज तब तमिलनाडु चुनाव में टीवीके को सबसे ज्यादा 108 सीटें आई हैं और थलापति विजय का मुख्यमंत्री बनना तय है तो लोग जॉन अरोकियासामी के बारे में जानना समझना चाह रहे हैं. जॉन की चर्चा इस बात के लिए हो रही है कि यह वह शख्स है कि जो सोशल मीडिया फॉलोअर्स को वोट में तब्दील करने की तरकीब जानता है.



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